थोड़े दिनों पहले शांति समझौते के टूटने से जुडी बातें पूरे विश्व में फैल रही थीं लेकिन अब कहीं न कहीं यह आभास होता नजर आ रहा है कि फिर से अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ रहे है। दरअसल कुछ दिन पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शान्ति समझौते से पीछे हटने के संकेत दिए थे। वहीं कुछ घंटों पहले विश्व की सबसे बड़ी समुद्री खाड़ी स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर ईरान ने अमेरिका के जहाजों पर जोरदार बमबारी की।
ईरान ने कुछ दिन पहले स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर तीन तेल टैंकरों पर जोरदार हमला बोल दिया जिसके कारण अब अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुआ शांति समझौता टूटने की कगार पर आ गया है। हमले का पलट जवाब देने के लिए अमेरिका ने बुधवार को ईरान के खिलाफ हमले करने शुरू कर दिए हैं।
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने क़तर और सऊदी अरब के जहाजों को निशाना बनाया। होर्मुज स्ट्रेट पर हुए क़तर के जहाजी हमले का जिम्मेदार क़तर ने ईरान को बताया। इसके बाद ईरान ने ओमान के तट के पास से गुज़र रहे सऊदी अरब के सुपरटैंकर पर ड्रोन से हमले किए।
अमेरिका ने किया पलटवार
अमेरिका ने आरोप लगाया है कि होर्मुज पर जहाजों पर हमला करने और उनके कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के की ईरान की उम्मीद थी। नए हमले के कारण कई निर्णय प्रभावित नजर आ रही है जैसे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को पूर्ण रूप से खोलना, 28 फरवरी को शुरू हुई जंग को हमेशा के लिए खत्म करना है।
यहां तक की अमेरिका सेंट्रल कमांड ने X पर ट्वीट करते हुए बताया कि ईरान पर हमलों की बौछार शुरू कर दी गयी है। अमेरिका ने साफ़ बयान दिया कि वह स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर 3 जहाजों पर किये गए हमले के अधीन है क्योंकि शांति समझौते के बाद भी हमला करना युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन है। ईरान पर हमले करने का मुख्य मकसद अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में आम नागरिकों वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को कोई खतरा न हो।
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ईरानी मीडिया ने भी हमले कवर किए
अमेरिका की घोषणा के बाद मीडिया एजेंसी ने दक्षिणी ईरान में धमाकों की खबर दी। मीडिया के अनुसार, दक्षिणी शहर सिरिक में सात धमाकों की आवाज सुनी गई। इसके अलावा सिरिक के ताहेरुई पियर क्षेत्र में छह मिसाइलें या गोले गिरे। ईरान के प्रेस टीवी ने बताया कि धमाकों से हुए नुकसान या जान जाने की कोई जानकारी नहीं उपलब्ध हुई। इसके अलावा दक्षिणी ईरान के केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में भी धमाकों की आवाज सुनी गई।
हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का विदेश मंत्रालय, अमेरिका द्वारा समझौते का उल्लंघन किए जाने के नतीजों के बारे में चेतावनी देता है। ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए ज़रूरी कोई भी कदम उठाएगा।’
तेल बिक्री का लाइसेंस भी रद्द
अमेरिका-ईरान के समझौते के बाद अमेरिका ने 22 जून को तेल का सामान्य लाइसेंस जारी किया था जिसमें अमेरिका ने 21 अगस्त तक कच्चे तेल की बिक्री दूसरे देशों में कर सकते है लेकिन होर्मुज पर लगातार हमलों को देख कर अमेरिका ने यह लाइसेंस भी रद्द कर दिया है और ईरान को 17 जुलाई तक अपने सभी लेन-देन को समेटने का आदेश दिया है।
वहीं अमेरिका के इस एलान को लेकर ईरान के मंत्रालय ने कड़ी निंदा करते हुए इसे समझौते का उल्लंघन बताया है। इस समझौते को तोड़ने के परिणामों का जिम्मेदार सिर्फ अमेरिका ही होगा। वहीं अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान की यह हरकतें अस्वीकार्य है और इसके परिणामों का सामना करना होगा।
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दुनिया में भी बढ़ी चिंता
स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर हो रहे निरन्तर हमलों का असर कहीं न कहीं अन्य देशों पर भी पड़ रहा है क्योकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस स्थिति में होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।