पिछले कुछ महीनों से भारत की करेंसी नोट में बड़ा बदलाव करने के चर्चा कर रही है। RBI ने आज यानि 17 जुलाई को प्लास्टिक नोट को लेकर खबर जारी की है। इसमें नोटों की छपाई के लिए ओपैसिफाइड पॉलिमर सब्सट्रेट शीटों के निर्माण तथा आपूर्ति के लिए कंपनियों से वैश्विक स्तर पर निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। इसका यूज प्लास्टिक के नोट बनाने में होता है। देश में कैश की बढ़ती मांग और हर साल खराब होने वाले करोड़ों नोटों को देखते हुए यह फैसला लिया जा रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड ने इस बारे में अखबारों में एक विज्ञापन दिया है कि जल्द ही भारत में प्लास्टिक करेंसी देखी जाएगी। यह कंपनी आरबीआई और नोट छापने तथा सिक्के ढालने वाली सरकारी कंपनी एसपीएमसीआईएल का जाइंट वेंचर है।
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प्लास्टिक नोट का क्यों विचार किया गया ?
भारत में कागज के नोट लगातार इस्तेमाल की वजह से जल्दी फट जाते हैं, मैले हो जाते हैं और चलन से बाहर हो जाते हैं। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में पुराने नोटों को नष्ट करना पड़ता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 2,380 करोड़ मैले और खराब नोटों को नष्ट किया गया, जिनमें सबसे ज्यादा 500 और 100 रुपय के नोट शामिल थे।
इसके साथ ही नए नोट छापने का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। 2024-25 में नोटों की छपाई पर करीब 6,372.8 करोड़ रुपय का खर्च आया था , जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पॉलीमर नोट लागू होते हैं, तो उनकी उम्र कागज के नोटों से कई गुना ज्यादा होगी। इससे नोटों को बार-बार छापने की जरूरत कम पड़ेगी, सरकार का खर्च घटेगा और लंबे समय में करेंसी सिस्टम अधिक टिकाऊ और किफायती बन सकेगा।
प्लास्टिक के नोट और कागज़ नोट में क्या अंतर है ?
| पहलू | कागज के नोट | प्लास्टिक (पॉलीमर) नोट |
|---|---|---|
| टिकाऊपन | जल्दी फट सकते हैं | कई साल तक चलते हैं |
| पानी का असर | भीगने पर खराब हो सकते हैं | पानी से आसानी से खराब नहीं होते |
| नकली नोट | नकली बनाना अपेक्षाकृत आसान | आधुनिक सुरक्षा फीचर्स के कारण नकली बनाना मुश्किल |
| सफाई | जल्दी गंदे हो जाते हैं | लंबे समय तक साफ रहते हैं |
| उम्र | कम | कागज के नोटों से 2-4 गुना अधिक |
| रखरखाव | बार-बार नए नोट छापने पड़ते हैं | लंबे समय तक उपयोग होने से लागत कम |
| पर्यावरण | जल्दी बदलने पड़ते हैं | लंबे समय तक चलने से संसाधनों की बचत |
| सुरक्षा फीचर्स | सीमित | पारदर्शी विंडो, माइक्रो प्रिंटिंग और एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स |
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किन-किन देशों में पॉलीमर नोट हैं लागू ?
दुनिया के कई देशों ने पहले ही पॉलीमर नोटों को अपनाया हुआ है। ऑस्ट्रेलिया इस तकनीक को लागू करने वाला पहला देश था। इसके बाद कनाडा ने भी अपने सभी प्रमुख नोट पॉलीमर सामग्री में जारी किए। यूनाइटेड किंगडम में £5, £10, £20 और £50 के नोट प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। वहीं न्यूजीलैंड ने पूरी तरह पॉलीमर करेंसी को अपनाया है।
एशिया की बात करें तो सिंगापुर, मलेशिया और वियतनाम भी लंबे समय से पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें मलेशिया ने कुछ चुनिंदा मूल्यवर्ग के नोटों में यह तकनीक अपनाई है, जबकि वियतनाम में अधिकतर नोट पॉलीमर से बनाए जाते हैं। इसके अलावा रोमानिया भी उन शुरुआती देशों में शामिल है, जिसने अपनी करेंसी को पॉलीमर तकनीक में बदल दिया था। इन देशों का अनुभव बताता है कि प्लास्टिक नोट ज्यादा टिकाऊ होते हैं, जल्दी खराब नहीं होते और नकली नोटों पर रोक लगाने में भी काफी प्रभावी साबित हुए हैं।
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