हाल फिलहाल में ही पासपोर्ट को लेकर देश भर में छिड़ी बहस के बीच भारत सरकार ने अपना रूख स्पष्ट कर दिया है विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के पासपोर्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय नागरिकों की विदेश यात्रा को नियमित करना है इससे भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस बयान के बाद नागरिकता और पहचान से जुड़े दस्तावेजों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज से हो रही है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पासपोर्ट पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत जारी किया जाने वाला एक यात्रा दस्तावेज है। इसका प्राथमिक उद्देश्य भारतीय नागरिकों को विदेश यात्रा की अनुमति देना और उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने का अधिकार केवल पासपोर्ट के आधार पर नहीं होता।
दरअसल विवाद उस समय शुरू हुआ था जब कुछ बयानों के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या भारतीय पासपोर्ट अपने आप में नागरिकता का प्रमाण माना जा सकता है या नहीं। इस पर विपक्षी दलों ने भी सरकार से सवाल किए बढ़ते विवाद के बाद विदेश मंत्रालय ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पासपोर्ट और नागरिकता दोनों अलग-अलग विषय है और इन्हें एक दूसरे का पर्याय नहीं माना जा सकता।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम 1955 और उससे जुड़े प्रावधानों के आधार पर किया जाता है। वही पासपोर्ट अधिनियम 1967 का उद्देश्य केवल पासपोर्ट जारी करने और विदेश यात्रा को नियंत्रित करना है। यही कारण है कि पासपोर्ट होने का अर्थ यह नहीं है कि वह दस्तावेज अकेले नागरिकता का अंतिम कानूनी प्रमाण बन जाता है।
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सरकार ने यह भी बताया कि देश की पूरी आबादी के मुकाबले बहुत कम लोगों के पास पासपोर्ट है। ऐसे में केवल पासपोर्ट को नागरिकता का सार्वभौमिक ब्रह्मांड मानना व्यावहारिक नहीं होगा। भारत में बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक हैं जिन्होंने कभी विदेश यात्रा नहीं की और उन्होंने पासपोर्ट भी नहीं बनवाया इसलिए नागरिकता साबित करने के लिए अन्य कानूनी दस्तावेज और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।
कानूनी जानकारी के अनुसार विभिन्न सरकारी सेवाओं और प्रक्रियाओं में आधार कार्ड वोटर आईडी कार्ड जन्म प्रमाण पत्र निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों को अलग-अलग नियमों के अनुसार उनकी जरूरत पड़ सकती है। किसी एक दस्तावेज को हर स्थिति में अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। संबंधित विभाग अपनी आवश्यकताओं के अनुसार दस्तावेजों की जांच करता है।
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विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी नागरिक के अधिकारों को प्रभावित करना नहीं बल्कि पासपोर्ट की कानूनी स्थिति को लेकर फैली गई गलतफहमी को दूर करना है। मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है और इसकी उपयोगिता पर कोई सवाल नहीं है लेकिन इसे नागरिकता का एकमात्र और अंतिम प्रमाण मानना कानून के अनुरूप नहीं है। सरकार की इस सफाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर चल रही बहस काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी।