India-UK CETA: व्यापार समझौते के पहले दिन भारत ने भेजा 14 करोड़ डॉलर का निर्यात

Shakshi Chauhan

16 जुलाई 2026

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच में हुए कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट ने अपने पहले ही दिन शानदार शुरुवात की है। समझौते के प्रभावी होने के पहले दिन भारत से 140 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के उत्पाद बिना किसी आयात शुल्क के यूके भेजे गए। यह उपलब्धि भारत के निर्यात एरिया के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। और आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की उम्मीद है।

इस व्यापार समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय नागरिक को मिलेगा अब भारतीय उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में आर्थिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध होंगे, जिससे उनकी मांग बढ़ने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इससे निर्यात में तेजी आएगी और घरेलू उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी।

भारत यूके CETA का सबसे अधिक लाभ टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, स्टील, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्युटिकल, केमिकल्स, समुद्री उत्पाद, जेम्स एंड ज्वेलरी और प्रोसेस्ड फूड उद्योगों को मिलने की उम्मीद है। पहले इन उत्पादों पर यूके में आयात शुल्क लगता था जिससे भारत के कंपनी के लागत बढ़ती जा रही थी। आयात शुल्क समाप्त होने से भारतीय उत्पादन की कीमतें कम होगी और निर्यात में वृद्धि की संभावना मजबूत होगी।

यह भी पढ़ें: होर्मुज में फिर बढ़ा तनाव, अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले, तेल बिक्री का लाइसेंस भी रद्द

विशेष रूप से टेक्सटाइल उद्योग के लिए यह समझौता देना माना जा रहा है भारतीय वस्त्र उद्योग लंबे समय में वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। जीरो ड्यूटी सुविधा मिलने से भारतीय कपड़ों और होम टैक्सटाइल उत्पादन की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
स्टील और फार्मा उद्योग को मिलेगा नया बाजार भारतीय स्टील और इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए यह समझौता नया अवसर लेकर आया है शुल्क कम होने से उत्पादन की ब्रिटेन में स्थिति बेहतर होगी वहीं फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल सेक्टर को भी राहत मिलेगी, समाप्त होने से भारतीय दवाइयों का निर्यात बढ़ सकता है।

यह भी पढ़ें: सोना हुआ थोड़ा सस्ता, चांदी में भी नरमी बरकरार; जानें आज का शहरवार गोल्ड-सिल्वर प्राइस

व्यापार समझौते के लागू होने के पहले ही दोनों 140 मिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात या संकेत देता है कि भारतीय उद्योग पहले से ही यह सब सर्कुलर तैयार थे निर्यातकों में तेजी से नए नियम का लाभ उठाते हुए अपना उत्पादन ब्रिटेन भेजे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल निर्यात बढ़ाने का सीमित नहीं रहेगा बल्कि मैं निवेश, रोजगार और विनिर्माण क्षेत्र को भी गति देगा। छोटे और मध्यम उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक आसान पहुँच मिलेगी।

Leave a Comment