नवरात्रि शुरू होते ही कई घरों में खाने-पीने का तरीका बदल जाता है। कोई पूरे नौ दिन व्रत रखता है, तो कोई पहले और आखिरी दिन उपवास करता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि दिनभर क्या खाएं, जिससे कमजोरी न आए, पेट भी भरा रहे और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते रहें।
व्रत के दौरान आमतौर पर कुट्टू, सिंघाड़े और राजगिरा के आटे का इस्तेमाल किया जाता है। इनके अलावा समा के चावल भी काफी लोकप्रिय हैं। इनसे रोटी, पूरी, पराठा, चीला, खिचड़ी और कई दूसरे पकवान बनाए जा सकते हैं। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि व्रत में इस्तेमाल होने वाले सभी आटे पोषण के मामले में एक जैसे नहीं होते।
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कुट्टू में प्रोटीन और फाइबर मिलता है, राजगिरा कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है, जबकि सिंघाड़े का आटा और समा भी व्रत के खाने में विविधता लाते हैं। इनका फायदा इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप इन्हें कितनी मात्रा में खाते हैं और पकवान बनाने में कितना घी, तेल, चीनी या नमक इस्तेमाल करते हैं।
1. कुट्टू का आटा: प्रोटीन और फाइबर के लिए अच्छा विकल्प
कुट्टू का आटा नवरात्रि के दौरान सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले आटों में से एक है। इससे पूरी, पराठा, चीला और पकौड़े बनाए जाते हैं। कुट्टू नाम में गेहूं जैसा लग सकता है, लेकिन यह गेहूं नहीं है। इसके बीजों को अनाज की तरह इस्तेमाल किया जाता है और यह स्वाभाविक रूप से ग्लूटेन-मुक्त होता है।
कुट्टू के आटे के बेनेफिट्स
- प्रोटीन का सोर्स : कुट्टू में पौधों से मिलने वाला प्रोटीन होता है, जो शरीर की मांसपेशियों और ऊतकों को बनाए रखने में मदद करता है।
- फाइबर से भरपूर: इसमें मौजूद फाइबर पाचन को सहारा देता है और संतुलित भोजन के साथ पेट भरा महसूस करने में मदद कर सकता है।
- दिल की सेहत के लिए उपयोगी: कुट्टू में मौजूद कुछ पौधों के यौगिक और पोषक तत्व संतुलित खानपान के हिस्से के रूप में हृदय स्वास्थ्य को सहारा दे सकते हैं।
- ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मददगार हो सकता है: कुट्टू में फाइबर और दूसरे पोषक तत्व होते हैं। हालांकि, इससे बनी पूरी या पकौड़ी का असर तलने के तरीके और खाई गई मात्रा पर भी निर्भर करता है।
2. सिंघाड़े का आटा: व्रत के पकवानों में इस्तेमाल होने वाला विकल्प
सिंघाड़े का आटा पानी में उगने वाले सिंघाड़े को सुखाकर और पीसकर बनाया जाता है। व्रत के दौरान इससे हलवा, पूरी, पराठा और दूसरे पकवान बनाए जाते हैं। यह स्वाभाविक रूप से ग्लूटेन-मुक्त होता है, इसलिए गेहूं से परहेज करने वाले लोग भी इसे अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं।
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सिंघाड़े के आटे के फायदे
- ऊर्जा देने में मदद: इसमें कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने का काम करते हैं।
- खाने में विविधता: व्रत में बार-बार एक ही तरह का भोजन खाने के बजाय इससे अलग-अलग पकवान बनाए जा सकते हैं।
- ग्लूटेन-मुक्त विकल्प: गेहूं में मौजूद ग्लूटेन से परहेज करने वाले लोगों के लिए यह उपयोगी विकल्प हो सकता है।
- मीठे और नमकीन, दोनों तरह के पकवान: इससे हलवा, चीला और पराठे जैसे व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं।
3. समा के चावल: व्रत के खाने में एक और विकल्प
समा को कई जगह समक, सामक या व्रत के चावल भी कहा जाता है। यह सामान्य चावल नहीं, बल्कि एक प्रकार का छोटा अनाज है। इसे उबालकर चावल की तरह खाया जाता है और इससे खिचड़ी, पुलाव या दूसरे पकवान बनाए जा सकते हैं। समा के आटे का इस्तेमाल भी कुछ व्यंजनों में किया जाता है। इसकी किस्म और प्रसंस्करण के आधार पर पोषण की मात्रा अलग हो सकती है।
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समा के प्रमुख फायदे
- ऊर्जा का स्रोत: इसमें कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं।
- फाइबर और दूसरे पोषक तत्व: समा जैसे छोटे अनाज में फाइबर और कुछ खनिज मिल सकते हैं। इनकी मात्रा किस्म और प्रसंस्करण पर निर्भर करती है।
- व्रत के खाने में विविधता: इससे खिचड़ी या पुलाव बनाकर रोजाना एक ही तरह के भोजन से बचा जा सकता है।
- ग्लूटेन-मुक्त विकल्प: समा स्वाभाविक रूप से ग्लूटेन-मुक्त होता है, हालांकि पैक किए गए उत्पादों में मिलावट या दूसरी सामग्री की जांच जरूरी है।
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व्रत में आटा खाते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान
हर चीज को तलकर न खाएं: कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूरी और पकौड़ी स्वादिष्ट लग सकती हैं, लेकिन बार-बार तली हुई चीजें खाने से भोजन में वसा और कैलोरी बढ़ सकती हैं। जहां संभव हो, चीला या कम तेल वाला पराठा चुनें।
2. प्रोटीन को न करें नजरअंदाज: सिर्फ आटे से बना भोजन खाने के बजाय दही, दूध, पनीर या मूंगफली जैसे उपयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। इससे भोजन अधिक संतुलित बनाने में मदद मिल सकती है।
3. पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं: व्रत में कुछ लोग पानी भी कम पीते हैं। इससे सिरदर्द, थकान और कब्ज जैसी परेशानियां हो सकती हैं। यदि आपको डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह नहीं दी है, तो दिनभर पर्याप्त पानी पिएं।
4. ब्लड शुगर पर नजर रखें: डायबिटीज वाले लोगों को व्रत में लंबे समय तक भूखे रहने या एक बार में बहुत ज्यादा कार्बोहाइड्रेट खाने से बचना चाहिए। आटे की मात्रा, पकवान बनाने के तरीके और दवाओं के समय को लेकर डॉक्टर की सलाह लें।
5. व्रत के नियम और सामग्री की जांच करें: अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में व्रत के नियम अलग हो सकते हैं। पैकेट वाले आटे पर सामग्री की सूची पढ़ें और सुनिश्चित करें कि उसमें ऐसी कोई चीज न मिली हो, जिसे आप व्रत में नहीं खाते।
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डायबिटीज या दूसरी बीमारी है तो क्या करें?
यदि आपको डायबिटीज, किडनी की बीमारी या कोई दूसरी ऐसी स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें खानपान पर विशेष ध्यान देना पड़ता है, तो व्रत रखने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ से सलाह लें। केवल यह मानकर किसी आटे को न चुनें कि वह प्राकृतिक, ग्लूटेन-मुक्त या पारंपरिक है। आपके लिए सही विकल्प आपकी बीमारी, दवाओं, कुल भोजन और पोषण की जरूरत पर निर्भर करेगा।
यदि व्रत के दौरान तेज कमजोरी, चक्कर, पसीना, कंपकंपी या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो इसे सामान्य उपवास का हिस्सा मानकर नजरअंदाज न करें। खासकर डायबिटीज में ऐसे लक्षणों पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है। नवरात्रि का व्रत सिर्फ आस्था और नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने खानपान पर ध्यान देने का भी अच्छा मौका है। कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा या समा हर विकल्प की अपनी खूबियां हैं, लेकिन असली फायदा तभी मिलेगा, जब आप स्वाद के साथ सेहत का भी ख्याल रखेंगे।
थाली में सिर्फ पेट भरने वाली चीजें रखने के बजाय ऐसे पकवान चुनें, जो शरीर को ऊर्जा दें और जरूरी पोषण भी पहुंचाएं। बहुत देर तक भूखे रहने, जरूरत से ज्यादा तला-भुना खाने और पानी कम पीने से बचें।





