बच्चे को चिकनपॉक्स हो तो क्या करें?बच्चे की देखभाल में इन बातों का रखें ध्यान, डॉक्टर से जानें जरूरी सावधानियां

बच्चे के शरीर पर लाल दाने निकलने के बाद अगर वे पानी भरे फफोलों में बदलने लगें और तेज खुजली हो, तो यह चिकनपॉक्स यानी चेचक हो सकता है। यह बीमारी वायरस से होती है और बहुत आसानी से दूसरे लोगों तक फैल सकती है। ज्यादातर स्वस्थ बच्चे घर पर आराम, पर्याप्त पानी और खुजली कम करने वाली देखभाल से ठीक हो जाते हैं, लेकिन इस दौरान कुछ दवाओं से बचना बेहद जरूरी है।

Palak Gupta

8 अक्टूबर 2026

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बच्चे को चिकनपॉक्स हो तो क्या करें?बच्चे की देखभाल में इन बातों का रखें ध्यान, डॉक्टर से जानें जरूरी सावधानियां

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की साल 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 में दुनियाभर में चिकनपॉक्स के करीब 8.67 करोड़ मामले सामने आए थे। इसी अवधि में इस बीमारी से 13,931 लोगों की मौत दर्ज की गई। आंकड़े बताते हैं कि चिकनपॉक्स को केवल बच्चों में होने वाली एक सामान्य और हल्की बीमारी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

यह बीमारी वैरिसेला-जोस्टर वायरस के कारण होती है और बच्चों में इसके मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं। ज्यादातर स्वस्थ बच्चों में चिकनपॉक्स कुछ दिनों में ठीक हो जाता है और गंभीर परेशानी नहीं होती, लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह बीमारी गंभीर रूप भी ले सकती है। खासकर बहुत छोटे बच्चों, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों और कुछ अन्य संवेदनशील समूहों में इसके कारण जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।

चिकनपॉक्स को स्मॉलपॉक्स यानी चेचक समझना भी सही नहीं है। दोनों अलग-अलग वायरस से होने वाली बीमारियां हैं और चिकनपॉक्स आमतौर पर स्मॉलपॉक्स की तुलना में कम गंभीर माना जाता है। फिर भी इसके संक्रमण को हल्के में लेना ठीक नहीं है, क्योंकि सही देखभाल न होने पर त्वचा में संक्रमण समेत दूसरी जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए बच्चे को चिकनपॉक्स होने पर समय पर पहचान, उचित देखभाल और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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चिकनपॉक्स क्या है और बच्चे को कैसे होता है?

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चिकनपॉक्स को मेडिकल भाषा में वैरिसेला कहा जाता है। यह वैरिसेला-जोस्टर वायरस के कारण होने वाली बेहद संक्रामक बीमारी है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर वायरस आसानी से फैल सकता है। यह सांस के जरिए निकलने वाले संक्रमित कणों और फफोलों के तरल के संपर्क से भी फैल सकता है।

इस बीमारी में संक्रमण के करीब 10 से 21 दिन बाद लक्षण दिखाई दे सकते हैं। बच्चों में कई बार दाने ही बीमारी का पहला संकेत होते हैं। पहले लाल या गुलाबी छोटे दाने निकल सकते हैं, फिर इनमें पानी भर जाता है और बाद में ये सूखकर पपड़ी में बदलने लगते हैं। दाने अक्सर छाती, पीठ और चेहरे से शुरू होकर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकते हैं।

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शुरुआत में कौन से लक्षण दिख सकते हैं?

लक्षणबच्चे में क्या दिख सकता है
बुखारचिकनपॉक्स की शुरुआत में हल्का या तेज बुखार हो सकता है। बच्चा गर्म महसूस कर सकता है और सामान्य से ज्यादा चिड़चिड़ा या सुस्त रह सकता है।
शरीर में कमजोरीबच्चा जल्दी थक सकता है, खेलने में रुचि कम हो सकती है और सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा आराम करना चाह सकता है।
भूख कम लगनाबीमारी के दौरान बच्चे का खाने का मन कम हो सकता है। कुछ बच्चों में मुंह के अंदर भी दाने होने से खाना निगलने में परेशानी हो सकती है।
सिरदर्दखासकर बड़े बच्चों में सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। इसके साथ थकान और बेचैनी भी महसूस हो सकती है।
शरीर पर लाल दानेशुरुआत में त्वचा पर छोटे लाल या गुलाबी दाने दिखाई दे सकते हैं। ये दाने अक्सर चेहरे, छाती और पीठ से शुरू होकर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकते हैं।
पानी भरे फफोलेकुछ समय बाद लाल दानों के अंदर साफ तरल भरकर छोटे फफोले बन सकते हैं। ये चिकनपॉक्स की पहचान वाले प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं।
तेज खुजलीफफोलों में काफी खुजली हो सकती है। बच्चा बार-बार उन्हें खुजलाने की कोशिश कर सकता है, लेकिन ऐसा करने से त्वचा पर घाव और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
नए दाने निकलनाचिकनपॉक्स में एक साथ सभी दाने नहीं निकलते। कई दिनों तक शरीर के अलग-अलग हिस्सों में नए दाने और फफोले दिखाई दे सकते हैं।
फफोलों का सूखनाकुछ दिनों बाद पानी भरे फफोले सूखने लगते हैं और उन पर पपड़ी बन जाती है। धीरे-धीरे ये पपड़ियां गिरने लगती हैं।
त्वचा पर दर्द या जलनकुछ बच्चों को फफोलों के आसपास हल्का दर्द, जलन या संवेदनशीलता महसूस हो सकती है, खासकर अगर बच्चा उन्हें खुजा रहा हो।
चिड़चिड़ापनखुजली, बुखार, कमजोरी और नींद में परेशानी के कारण छोटा बच्चा सामान्य से ज्यादा चिड़चिड़ा या परेशान रह सकता है।
नींद में परेशानीरात के समय खुजली बढ़ने पर बच्चा बार-बार उठ सकता है या ठीक से सो नहीं पाता।
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खुजली कम करने के लिए क्या करें?

चिकनपॉक्स में खुजली बच्चे को सबसे ज्यादा परेशान कर सकती है। बच्चा बार-बार फफोलों को खुजलाए तो त्वचा पर घाव हो सकते हैं और उनमें बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

  1. बच्चे के नाखून छोटे रखें।
  2. उसे फफोले खुजलाने से रोकें।
  3. ठंडे या हल्के गुनगुने पानी से नहला सकते हैं।
  4. नहाने के बाद त्वचा को रगड़कर नहीं, बल्कि हल्के हाथ से थपथपाकर सुखाएं।
  5. डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह से कैलामाइन जैसे खुजली कम करने वाले उत्पाद इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
  6. रात में खुजली बहुत ज्यादा हो तो बच्चे के डॉक्टर से उचित एंटीहिस्टामिन के बारे में पूछें।

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इन संकेतों को नजरअंदाज न करें

ज्यादातर बच्चों में चिकनपॉक्स गंभीर नहीं होता, लेकिन कुछ मामलों में जटिलताएं हो सकती हैं। अगर बच्चे में नीचे दिए गए संकेत दिखें तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें:

  • सांस लेने में परेशानी
  • बहुत ज्यादा सुस्ती या बच्चे को जगाने में परेशानी
  • भ्रम या असामान्य व्यवहार
  • गर्दन में अकड़न
  • बार-बार उल्टी
  • तेज या लगातार सिरदर्द
  • चलने में परेशानी
  • तेज या लंबे समय तक बना रहने वाला बुखार
  • फफोलों के आसपास ज्यादा लालिमा, गर्माहट या दर्द
  • फफोलों से पस निकलना
  • बच्चा पानी न पी पा रहा हो या डिहाइड्रेशन के संकेत दिखें
  • बच्चा अचानक पहले से ज्यादा बीमार दिखाई दे

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चिकनपॉक्स से बचाव कैसे करें?

चिकनपॉक्स से बच्चे को बचाने का सबसे अच्छा तरीका वैरिसेला वैक्सीन है। अगर बच्चे को अभी तक यह वैक्सीन नहीं लगी है, तो उसकी उम्र और पहले से लगे टीकों को ध्यान में रखते हुए बाल रोग विशेषज्ञ से इसके बारे में जरूर पूछें। आमतौर पर वैरिसेला वैक्सीन की दो खुराक बीमारी से बचाव में 90 प्रतिशत से ज्यादा प्रभावी मानी जाती हैं। हालांकि वैक्सीन लगने के बाद भी कुछ मामलों में संक्रमण हो सकता है, लेकिन बीमारी का असर आमतौर पर कम गंभीर रहता है।

अपोलो हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन डॉ. रोहित शर्मा के मुताबिक, बच्चों को चिकनपॉक्स से बचाने के लिए समय पर वैक्सीनेशन और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है। अगर बच्चे में चिकनपॉक्स के लक्षण दिखाई दें, तो उसे स्कूल या भीड़भाड़ वाली जगह पर भेजने से बचना चाहिए, ताकि संक्रमण दूसरे बच्चों तक न पहुंचे।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.

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