भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से चल रही बातचीत अब अहम मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 19 अक्टूबर को संकेत दिया कि दोनों देश प्रस्तावित ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। उनके इस बयान से समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।
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रुबियो ने यह टिप्पणी उज्बेकिस्तान के समरकंद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की। उन्होंने भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। उन्होंने रूस से तेल और गैस की खरीद से जुड़े प्रतिबंधों पर भी बात की और कहा कि ऐसे फैसले लेते समय वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखना पड़ता है।
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मार्को रुबियो ने ट्रेड डील पर क्या कहा?
मार्को रुबियो ने स्पष्ट संकेत दिया कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, दोनों देश इस समझौते के काफी करीब हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रूस से तेल और गैस की खरीद से जुड़े प्रतिबंधों के मामलों में अमेरिका को वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर संभावित असर को देखते हुए कुछ छूट देने जैसे फैसले लेने पड़े हैं।
रुबियो ने कहा कि विदेश नीति से जुड़े फैसले लेते समय हर देश की परिस्थितियों को समझना जरूरी है। ऊर्जा की जरूरतें, उपलब्ध विकल्प और भौगोलिक स्थिति भी ऐसे निर्णयों को प्रभावित करती हैं। भारत की ओर से भी व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में बताया था कि समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और कानूनी मसौदे पर काम किया जा रहा है।
भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसके उत्पादों को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले उचित अवसर मिलें। इसके साथ ही व्यापार और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता कम करना भी महत्वपूर्ण है।
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20 अक्टूबर को जयशंकर से मिलेंगे रुबियो
भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से 20 अक्टूबर की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर मुंबई में बातचीत करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अलावा ऊर्जा सहयोग, रक्षा तथा महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों जैसे क्षेत्रों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब व्यापार समझौते को लेकर दोनों पक्षों की ओर से लगातार सकारात्मक बयान सामने आ रहे हैं। ऐसे में बातचीत के दौरान लंबित मुद्दों और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा हो सकती है। बैठक से यह संकेत जरूर मिल सकता है कि दोनों देश समझौते को किस समयसीमा में आगे बढ़ाना चाहते हैं और किन मुद्दों पर अभी बातचीत बाकी है।
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रूस से तेल खरीद का मुद्दा आखिर क्यों है अहम?
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के साथ रूस से तेल खरीद का विषय भी चर्चा में रहा है। अमेरिका ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित प्रतिबंधों और अतिरिक्त टैरिफ को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ऐसे में भारत के व्यापारिक हितों और ऊर्जा जरूरतों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
रुबियो ने अपने बयान में कहा कि रूस से तेल और गैस पर प्रतिबंधों से जुड़े फैसले लेते समय वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना पड़ता है। भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल की कीमतों में बड़ा बदलाव परिवहन लागत से लेकर उद्योगों और आम उपभोक्ताओं तक असर डाल सकता है। दूसरी ओर, अमेरिका रूस से जुड़े प्रतिबंधों और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं को भी महत्व देता है।





