जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूल हड़ताल के ऊपर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2011 में अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था तब तत्कालीन केंद्र सरकार ने उनसे बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की थी लेकिन आज सोनम वांगचुक कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है फिर भी केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही ।
उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि किसी भी लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति अपनी मांगों को लेकर लगातार उपवास कर रहा है और उसके स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक होती जा रही है तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संवाद के माध्यम से समाधान खोजने का प्रयास करें।
दरअसल सोनम बवांगचुक दिल्ली के जंतर मंतर पर पिछले कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं वह शिक्षा व्यवस्था में सुधार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और कथित पेपर लीक मामलों को लेकर सरकार से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग केंद्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की स्थिति और परीक्षा सुधार से जुड़ी बताई जा रही है।
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उमर अब्दुल्ला ने अपने बयान में अन्ना हजारे आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उसे समय मनमोहन सिंह सरकार ने आंदोलनकारियों से लगातार बातचीत की थी सरकार और आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की चर्चाएं हुई थी जिसे समाधान निकालने का प्रयास किया गया। उन्होंने सवाल उठाया की वर्तमान सरकार ऐसी पहन क्यों नहीं कर रही जबकि लोकतंत्र में संवाद ही सबसे प्रभावी रास्ता माना जा रहा है।
इस बीच सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है डॉक्टर के अनुसार उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक काम हो चुका है और यदि भूख हड़ताल लंबी चली रही तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। इसके बावजूद वांगचुक ने अपनी मांगे पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला दोहराया है।
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मामला अब अदालत तक भी पहुंच चुका है दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और यदि डॉक्टरों की सलाह के अनुसार आवश्यकता महसूस हो तो उचित चिकित्सा हस्तक्षेप किया जाए। हालांकि अदालत में यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी कदम का निर्णय पूरी तरह मेडिकल विशेषज्ञों की राय के आधार पर होना चाहिए।
सोनम वांगचुक के समर्थन में कई सामाजिक कार्यकर्ता छात्र संगठन और फिल्म जगत की हस्तियां भी सामने आई है अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने एक दिन का सांकेतिक उपवास रखकर सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील की है वहीं अन्य कलाकारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से चिंता जताते हुए संवाद की मांग की है।