थोक महंगाई 44 महीने के उच्चतम स्तर पर, जून में WPI बढ़कर 9.87% पहुंची; खाद्य वस्तुओं के दाम चढ़े, ईंधन में राहत

Palak Gupta

14 जुलाई 2026

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के साथ भारत में महंगाई भी बढ़ती जा रही है। देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और इसका असर अब आम लोगों की रसोई से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक साफ दिखाई देने लगा है। हाल में हुए सर्वे के मुताबिक सोमवार को इवैल्यूएशन जारी किया गया जिसमें देखने को मिला कि जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87 प्रतिसत पर पहुंच गई है।

पिछले महीने के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो पिछले महीने यह 9.68 प्रतिशत थी। बताया जा रहा है कि जून में महंगाई पिछले 44 महीनों में सबसे ज्यादा देखी गई है। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के माध्यम से लोगों को बढ़ती महंगाई का संकेत जारी किया जा रहा है। सितंबर 2022 में आखिरी बार अभी तक का सबसे बड़ा एलिवेशन देखा गया था। सितंबर में यह महंगाई 10.70 प्रतिशत पर पहुँच गयी थी।

यह भी पढ़ें: मेरठ की निकिता की सफलता की कहानी, नौकरी छोड़ शुरू किया अपना कारोबार, अब ‘लो जी खाओ’ को बना रहीं बड़ा ब्रांड

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि अमेरिका ईरान के बीच फरवरी से चल रहा यह बैर-द्वेष खत्म नहीं हुआ तो दामों में इसी प्रकार बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। अभी तक कल यानी 13 जुलाई तक के आंकड़े सामने आये है जिसमे रिटेल खरीदारी पर महंगाई के बारे में बताया गया है। रिटेल महंगाई भी लगातार छठे महीने बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार, खाद्य महंगाई 5.32 प्रतिशत दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मानसून की धीमी शुरुआत के कारण खाद्य और ईंधन की लागत बढ़ी है, जिसका असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

थोक महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारण

  • खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार तेजी
  • कच्चे तेल और ईंधन की बढ़ती कीमतें
  • वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव
  • आयात लागत में बढ़ोतरी
  • ट्रांस्पोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ना
  • कुछ क्षेत्रों में कमजोर आपूर्ति और अधिक मांग

यह भी पढ़ें: पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण पर सरकार का बयान, सुप्रीम कोर्ट में कहा- यह एक प्रयोग है, अगले साल तक सामने आएंगे नतीजे

महंगाई से आम आदमी की जेब ढीली

होलसले प्राइस में लगातार बढ़ोतरी के कारण प्रोडक्टिव सेक्टर पर इसका सबसे बड़ा असर पड़ता है। अगर थोक के सामान में ज्यादा देर तक महंगाई रहती है तो इसका सीधा असर प्रोड्यूसर की जेब पर पड़ता है जिसका खामियाजा आम आदमी यानि कंज्यूमर को भुगतना पढता है। महंगाई बढ़ने के कारण प्रोड्यूसर मुनाफा कंज्यूमर को सामान ज्यादा भाव में बेचकर कमाता है।

थोक के सामान पर महंगाई सिर्फ सरकार टैक्स के जरिये नियंत्रण में ला सकती है। जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कम कर सकती है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है।

यह भी पढ़ें: RBI का बड़ा एक्शन, Bank of Baroda पर ₹63.60 लाख का जुर्माना; जानिए क्या है मामला

रिटेल महंगाई से भी लोग परेशान

रोजमर्रा की जिंदगी में प्रयुक्त किए जाने वाले सामान जैसे आलू-प्याज़ और अन्य सब्जियों पर भी लगातार छठे महीने महंगाई दिख रही है। जून में यह 4.38 प्रतिशत पर पहुँच गई है। जनवरी में यह 2.74 प्रतिशत पर थी। वहीं एक महीने पहले मई में 3.93 प्रतिशत पहुँच गयी थी। यानी, यह लगातार छठा महीना है जब महंगाई बढ़ी है।

Leave a Comment