AI ऐप से डेटा लीक – 25 देशों में यूजर्स की जानकारी खतरे में, यूजर्स की फोटो, वीडियो और KYC डॉक्यूमेंट तक पहुंचे हैकर्स

AI आधारित फोटो और वीडियो एडिटिंग करने वाले कुछ मोबाइल ऐप्स से बड़ा डेटा लीक होने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 25 देशों के यूजर्स की फोटो, वीडियो और कुछ संवेदनशील दस्तावेज उजागर हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को ऐसे ऐप्स हटाने और अपने पासवर्ड तुरंत बदलने की सलाह दी है।
AI App Data Leak 25 Countries KYC Breach

डिजिटल दुनिया में एक और बड़ा डेटा लीक मामला सामने आया है, जिसने लाखों स्मार्टफोन यूजर्स की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार दो मोबाइल ऐप्स पर यूजर्स की निजी जानकारी सुरक्षित न रखने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि इन ऐप्स के जरिए करीब 25 देशों के लोगों का डेटा उजागर हो सकता है। लीक हुई जानकारी में फोटो, वीडियो और कुछ संवेदनशील दस्तावेज भी शामिल बताए जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक ये दोनों ऐप्स Google Play पर उपलब्ध थे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से फोटो और वीडियो एडिट करने की सुविधा देते थे। कई लोगों ने बेहतर एडिटिंग और नए फीचर्स के लिए इन ऐप्स को डाउनलोड किया और अपनी निजी फाइलें भी अपलोड कीं। लेकिन अब सामने आया है कि इन ऐप्स की सुरक्षा प्रणाली मजबूत नहीं थी।

साइबर सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्ट में कहा गया है कि कमजोर सिक्योरिटी के कारण हैकर्स ऐप्स के सर्वर तक पहुंच बनाने में सफल हो गए। इसके बाद बड़ी मात्रा में डेटा के लीक होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि कितने लोगों की जानकारी प्रभावित हुई है, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार कई देशों के यूजर्स इससे प्रभावित हो सकते हैं।

सबसे चिंता की बात यह है कि कुछ मामलों में केवाईसी से जुड़े दस्तावेज भी प्रभावित हो सकते हैं। अगर पहचान से जुड़ी जानकारी गलत लोगों के हाथ लग जाए तो उसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी अकाउंट बनाने जैसे मामलों का खतरा बढ़ जाता है।

साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर किसी ऐप को डाउनलोड करते समय उसकी सुरक्षा और प्राइवेसी पॉलिसी पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। कई ऐप्स यूजर्स से फोटो, वीडियो और अन्य दस्तावेज अपलोड करने की अनुमति मांगते हैं। अगर ऐसे ऐप्स सुरक्षित न हों तो निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है।

विशेषज्ञों ने यूजर्स को सतर्क रहने की सलाह दी है। अगर किसी ने ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल किया है तो उन्हें तुरंत अपने फोन से हटाना बेहतर होगा। साथ ही सभी जरूरी ऑनलाइन अकाउंट्स के पासवर्ड बदलना भी सुरक्षित कदम माना जा रहा है। इसके अलावा दो-स्तरीय सुरक्षा यानी टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी गई है।

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तकनीकी विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए लोगों को केवल भरोसेमंद ऐप्स ही डाउनलोड करने चाहिए। ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी रेटिंग, रिव्यू और डेवलपर की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ जोखिम भी मौजूद है। जैसे-जैसे लोग ऑनलाइन सेवाओं पर अधिक निर्भर हो रहे हैं, वैसे-वैसे डेटा सुरक्षा का मुद्दा भी और महत्वपूर्ण होता जा रहा है। इसलिए यूजर्स को अपनी निजी जानकारी साझा करते समय सावधान रहना बेहद जरूरी है।