Ganesh Durva Katha: भगवान गणेश को क्यों चढ़ाई जाती है दूर्वा? पढ़ें पौराणिक कथा

सिद्धिविनायक को 21 दूर्वा चढाने से होते हैं सारे कार्य सफल। आखिर क्या है सिके पीछे की कथा।

गणेश जी को सबसे पहले पूजन में सबसे पहले पूज्य योग्य माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने हेतु गणेश जी का नाम ही सबसे पहले लिया जाता है। उनकी पूजा में लड्डू, मोदक और लाल या गेंदे के फूल भी बहुत शुभकारी माने जाते हैं। इसके साथ ही, दूर्वा यानी घास भी बेहद खास मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं के अनुसार, दूर्वा केवल एक साधारण घास नहीं बल्कि आस्था, शांति और समर्पण का प्रतीक है।

क्या है इसके पीछे का कारण?

माना जाता है कि एक बार अनलासुर नामक एक राक्षस अपनी आग जैसी शक्ति से पूरे ब्रह्मांड में हाहाकार मचा रहा था। अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर वह सभी ऋषि-मुनियों को परेशान किया करता था I जब अनलासूर का आतंक बढ़ गया, तब सभी देवता और ऋषि भगवान शिव की शरण में पहुंचे। उन्होंने भगवान शिव से संसार की रक्षा करने की प्रार्थना की। तब भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश जी को दैत्य का अंत करने का आदेश दिया।

तब श्री गणेश ने उस दैत्य राक्षस से लड़ाई करके उसे हरा दिया। कहा जाता है कि श्री गणेश ने उसे ऐसे ही निगल लिया था। श्री गणेश ने उसके अंदर की सारी आग और तापन अपने अंदर समा ली जिसके कारण गणेश के शरीर से अत्यंत ताप और जलन उत्पन्न होने लगी। देवताओं ने इस ताप को शांत करने के लिए अन्य तरह के प्रयास किए।

उन्होंने चंद्रमा को मस्तक पर रखा ताकि गणेश को शीतलता प्राप्त हो। गंगा जल अर्पित किया, यहाँ तक कि कमल और अन्य शीतल वस्तुएँ चढ़ाई गईं, लेकिन फिर भी राहत न मिलने के कारण अंत में ऋषियों ने 21 दूर्वा घास गणेश जी को अर्पित की। जैसे ही दूर्वा उनके मस्तक पर रखी गई, उनका ताप तुरंत शांत हो गया।

इस घटना के बाद गणेश जी दूर्वा को सबसे प्रिय अर्पित किए जाने वाला पदार्थ माना जाने लगे। तभी से उन्हें दूर्वा चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

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दूर्वा चढ़ाने का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

दूर्वा चढ़ाने से शीतलता और शांति बनी रहती है। गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। यह दीर्घायु, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती है। पूजा में दूर्वा अर्पित करना सादगी और समर्पण को दर्शाता है। कहा जाता है कि 21 दूर्वा चढ़ाने से पूरे 21 तत्वों का अर्पण गणेश जी को किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार 21 दूर्वा चढ़ाना विशेष फलदायी माना जाता है। इसका प्रतीकात्मक अर्थ है:

  • 5 कर्मेंद्रियां
  • 5 ज्ञानेंद्रियां
  • 5 प्राण
  • 5 तत्व
  • 1 मन

किन दिनों में चढ़ाना सबसे शुभ?

दूर्वा को खास तौर पर बुधवार को चढ़ाना चाहिए, मान्यताओं के अनुसार बुधवार श्री गणेश जी को अर्पित है। इसी कारण इस दिन धुर्व चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा गणेश चतुर्थी को भी दूर्वा चढ़ाना लाभदायक माना जाता है।

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कहा जाता है कि दूर्वा चढ़ाने से सारे दुख दूर हो जाते हैं, और जीवन की बड़ी समस्याओं का समाधान हो जाता है जिसके कारण जीवन में संतुलन बना रहता है। गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने से न केवल एक परंपरा पूरी होती है बल्कि आस्था भी और मजबूत होती है।