रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिरसे चर्चा में आ रहे हैं, कारण न तो कोई विश्व चर्चा के ऊपर है, न ही युद्ध को लेकर कारण है उनकी बढ़ती हुई उम्र। रिपोर्ट्स के अनुसार रूस में चल रहा है एक महत्वाकांक्षी यानी एंटी एजिंग जो बढ़ती उम्र के साथ बुढ़ापा लाने वाले हार्मोन्स को कंट्रोल करने की प्रक्रिया को आजमाया जा रहा है।
कहा जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के लिए 26 अरब डॉलर नियुक्त किए गए हैं। यह प्रोजेक्ट पुतिन की बेटी क्रेमलिन का एंटी एजिंग इनिशिएटिव प्रोजेक्ट है।इस प्रोजेक्ट द्वारा दावा किया जा रहा है कि बढ़ती उम्र को उलटकर एक ताज़ा, जवान लुक दिया जाएगा। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने आपको फिट रखने की तकनीकों को सोशल मीडिया के पोस्ट से आम तौर पर बताते रहते हैं। कभी घुड़सवारी करें, कभी योगा, कभी आइस हॉकी के रूप में अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, छवि बनाए रखते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार पुतिन अब वैज्ञानिक विशेषताओं से बढ़ती उम्र को मात देने के लिए किए जाने वाले प्रयासों में भी दिलचस्पी रखने लगे हैं।
दरअसल बढ़ती उम्र को थामने और लंबा जीवन बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना दुनिया भर के वैज्ञानिकों का आकर्षित विषय बन गया है। वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करके, रूस ने “न्यू हेल्थ प्रिज़र्वेशन टेक्नोलॉजीज” नाम से प्रोजेक्ट को 2024 में शुरू किया, जिसमें वह एंटी एजिंग तकनीकों का इस्तेमाल कर बुढ़ापे को रोकने, शरीर के खराब भागों को बदलने और पूरी तरह से नया करने में मदद कर सके।
रूस ऐसे वैज्ञानिक कार्यक्रमों पर ज़ोर दे रहा है जिसमें विशेष तौर पर 2 तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है, जो कि मानव भविष्य को पूरी तरह से बदलकर नया जीवन देगी।इनमें से सबसे ज्यादा असर दिखाने वाली और सफल तकनीक है “बायोप्रिंटिंग”, यानी 3डी प्रिंटर की मदद से नए अंगों का निर्माण किया जाता है और नया जीवन दिया जाता है। वैज्ञानिक का दावा है कि उन्होंने ह्यूमन कार्टिलेज को बनाने की संरचनाएँ तैयार की जा रही हैं। दूसरी तकनीक है जीन संशोधित मिनी-पिग्स के अंदर मानव अंग विकसित करना, यह तकनीक भविष्य में मानव शरीर में ट्रांसप्लांट करने योग्य अंग उत्पन्न करेगी ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इसे रोगी के शरीर में इम्प्लांट किया जा सके।
रुक का दावा है कि 2030 तक वह पूर्ण रूप से ट्रांसप्लांट करने योग्य अंगों का निर्माण कर ले। दुनिया के कई देशों में पहले से ही उम्र को घटाने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है, अमेरिका, जापान, यूरोप के कई वैज्ञानिक इन पर काम कर रहे हैं। कुछ महीने पहले ही चीन में एक अवसर के दौरान रूस के राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई। मुलाकात में पुतिन ने कहा, “आने वाले सालों में मानव के खराब अंगों को ट्रांसप्लांट किया जा सकता है, जिससे उनके अंदर एंटी-एजिंग गतिविधियां लाई जा सकती हैं और उन्हें अमर भी किया जा सकता है”।इसी विषय पर शी जिनपिंग ने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो सदी के अंत तक लोगों की उम्र 150 साल तक हो जाएगी।
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इस कार्यक्रम की देखभाल करने के लिए पुतिन ने 2 लोगों को नियुक्त किया है, इनमें से एक उनकी बेटी मारिया वोरोंत्सोवा है, जो सरकारी कार्यक्रमों की निगरानी कर रही है और दूसरे हैं मिखाइल कोवाल्चुक, जिन्हें रूस की दीर्घायु रणनीति का प्रमुख वास्तुकार माना जाता है। फिलहाल पुतिन और रूस की यह एंटी एजिंग पहल पूरे देशभर में चर्चा का विषय बनती नजर आ रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या आने वाले सालों में यह होना संभव है कि उम्र को निखारने की तकनीकें आगे बढ़ेंगी या यह भी एक काल्पनिक सपना बन कर रह जाएगा।









