41°C गर्मी में यूरोप में क्यों जा रही लोगों की जान? वैज्ञानिकों ने बताया मौतों का असली जिम्मेदार

यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी ने बढ़ाई चिंता। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकेत है।

Palak Gupta

29 जून 2026

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41°C गर्मी में यूरोप में क्यों जा रही लोगों की जान? वैज्ञानिकों ने बताया मौतों का असली जिम्मेदार

यूरोप में भीषण गर्मी के कारण लोगों का जीना दुश्वार कर रखा है, पूरा यूरोप मानो गर्मी की वेव्स की चपेट में आ रखा है। पानी का तालाब गर्मी के कारण सूखता नजर आ रहा है जिसकी चपेट में मासूम मछलियां और जल जीव भी आ रहे है। यूरोप का दिन का तापमान 41 डिग्री तक पहुंच जा रहा है जिसने लोगों का रहना परेशान कर दिया है।

इस विषय को लेकर मौसम विभाग वाले भी हैरान है कि यूरोप जैसे महाद्वीप में इतनी गर्मी क्यों हो रही है। पहले यूरोप के लोग AC से परहेज करते थे, यूरोप की ठंड से तो वाकिफ थे और हीटर से भी लेकिन अब की बार की गर्मी को देखकर लोग AC इंस्टॉल कराने का प्लान कर रहे है। हाल इतना बुरा हो रखा है कि सड़कें पिघली जा रही हैं, रेलवे ट्रैक टेढ़े हो रहे हैं और गर्मी से लोगों की मौत हो रही है, वो सिर्फ 40 डिग्री के टेम्परेचर पर।

वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये गर्मी 50 साल पहले यानी 1976 में लगभग नामुमकिन थी। आज यह 20 साल पहले की तुलना में 200 गुना अधिक गर्मी पड़ रही है। यहाँ तक कि स्पेन, फ्रांस, इटली, पुर्तगाल और ग्रीस जैसे देशों में तापमान 40 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। कई जगहों पर तो इस हीट वेव के कारण स्कूल जाने का समय बदल दिया है।

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यूरोप में जंगलों पर आग लगने की आशंका बताई जा रही है और स्वस्थ एजेंसीज भी लोगों को अपने घरों में रहने की सलाह दे रहीं है।  30 यूरोपीय देशों के 850 शहरों में से 45 प्रतिशत शहरों में प्रचंड गर्मी का सागर देखा जा रहा है जो की रिकार्डेड स्तर से ऊपर पहुंचने को है।

WWA के वैज्ञानिकों ने इसे इस क्षेत्र की सबसे गंभीर गर्मी जैसी भीषण घटना के बारे में बताया है। वैज्ञानिकों ने कहा कि मौजूदा एल नीनो चक्र का इस गर्मी पर कोई खास असर नहीं है, मई में भी यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी पड़ी थी। आमतौर पर जुलाई-अगस्त में गर्मी चरम पर होती है, लेकिन इस बार जून में ही इतनी भयंकर गर्मी देखी जा रही है।

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वैज्ञानिकों की सलाह

कई मौसम विभाग और एक्सपर्ट्स ने रिपोर्ट्स को देखते हुए कहना है कि अब इस गर्मी की आदत डाल लेनी चाहिए। एक्सपर्ट्स ने सलाह देते हुए कहा कि “हमें पहले की चीजों पर निर्भर न होकर अपने घरों में कूलिंग सिस्टम इंस्टॉल करना होगा इसी के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार लाना होगा साथ ही इस हीटवेव के असली जड़ को दूर करना होगा। मशहूर रिसर्च एक्सपर्ट कीपिंग ने साफ कहा कि कार्बन उत्सर्जन कम करना होगा और कोयला, तेल, गैस का इस्तेमाल घटाना पड़ेगा।

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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन में तेजी से कमी नहीं लाई गई, तो आने वाले वर्षों में यूरोप सहित दुनिया के कई हिस्सों में हीटवेव और भी अधिक खतरनाक हो सकती हैं। इसलिए सिर्फ अपने बारे में नहीं सोचना बल्कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए भी कई नीतियों को अपनाना होगा।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.