मॉरीशस ने मालदीव के साथ रातों-रात तोड़े सारे कूटनीतिक रिश्ते – चागोस द्वीप पर विवाद

चागोस द्वीप समूह को लेकर बढ़े विवाद के बीच मॉरीशस ने मालदीव के साथ अपने सभी राजनयिक संबंध निलंबित कर दिए हैं। मॉरीशस का कहना है कि यह कदम उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है।
Mauritius Maldives Diplomatic Break Chagos Dispute
चागोस द्वीप विवाद के बीच मॉरीशस ने मालदीव के साथ कूटनीतिक संबंध समाप्त करने की घोषणा की।

मॉरीशस सरकार ने 27 फरवरी को एक अहम निर्णय लेते हुए मॉरीशस और मालदीव के बीच सभी कूटनीतिक रिश्ते तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं। यह फैसला चागोस द्वीप समूह (Chagos Archipelago) को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण लिया गया है।

मालदीव ने हाल ही में चागोस पर मॉरीशस के संप्रभुता दावे को मान्यता नहीं दी है और ब्रिटेन के साथ मॉरीशस के बीच इस विवादित द्वीप समूह पर हुए समझौते के खिलाफ आपत्ति जताई है। इसी के चलते मॉरीशस ने अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता के संरक्षण के लिए यह सख्त कदम उठाया है।

मॉरीशस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह निर्णय राष्ट्रीय हितों की रक्षा, संप्रभुता का सम्मान, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप लिया गया है। देश ने शांति और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थित 60 से अधिक द्वीपों का समूह है। यह ऐतिहासिक रूप से मॉरीशस का हिस्सा माना जाता रहा है, लेकिन 1960 के दशक में ब्रितानी शासन के दौरान इसे मॉरीशस से अलग कर दिया गया था। इसका सबसे बड़ा द्वीप डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन का सामरिक सैन्य केंद्र बन गया, जो आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

चागोस विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से जारी है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) और संयुक्त राष्ट्र महासभा दोनों ने ब्रितानी नियंत्रण को गैरकानूनी बताया है और मॉरीशस को द्वीप पर संप्रभुता देने की सिफारिश की है, लेकिन इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इस विवाद में अब मालदीव की नई भूमिका ने कूटनीतिक रिश्तों को और जटिल बना दिया है।

मालदीव सरकार की तरफ से प्रतिकिया अभी तक स्पष्ट नहीं आई है, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने मॉरीशस के इस कदम को “चिंताजनक” बताया है और कहा है कि दोनों देशों को बातचीत से समाधान निकालना चाहिए।

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यह विवाद हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत को भी उजागर करता है, जहां छोटे देशों के बीच भू-राजनीतिक हित, समुद्री सीमाएं और सैन्य महत्व कई बड़े मुद्दों को जन्म देते हैं। इस फैसले का क्षेत्रीय राजनीति और द्विपक्षीय संबंधों पर असर भी देखने को मिल सकता है।