पाकिस्तान में सियासी हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान खान की आंखों की रोशनी को लेकर चौंकाने वाली बातें सुप्रीम कोर्ट में रखी गई हैं। उनके वकील ने दावा किया है कि खान की दाहिनी आंख की लगभग 85 प्रतिशत दृष्टि जा चुकी है और अब उन्हें बहुत कम दिखाई देता है।
इमरान खान के वकील सलमान सफदर ने अदालत में सात पन्नों की रिपोर्ट पेश की। इसमें कहा गया कि स्वास्थ्य सुविधाओं में लापरवाही 2025 के आखिर से शुरू हुई। अक्टूबर 2025 तक उनकी नजर सामान्य थी, लेकिन इसके बाद उन्होंने लगातार धुंधला दिखने की शिकायत की। आरोप है कि कई महीनों तक विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाने की मांग को टाल दिया गया और सिर्फ साधारण आई ड्रॉप्स दिए गए, जिनसे कोई फायदा नहीं हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, देरी के कारण हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार दाहिनी आंख की रोशनी लगभग चली गई। जब स्थिति ज्यादा खराब हो गई, तब पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. मुहम्मद आरिफ को जांच के लिए बुलाया गया। जांच में आंख की नस में खून का थक्का जमने जैसी गंभीर समस्या सामने आई। जनवरी 2026 के आखिर में आपात इंजेक्शन दिया गया, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। अदालत को बताया गया कि अब उस आंख से बहुत सीमित दिखाई देता है।
वकील ने यह भी कहा कि यह सिर्फ आंख का मामला नहीं है। 73 वर्षीय इमरान खान को नियमित ब्लड टेस्ट, दांतों के इलाज और उम्र से जुड़ी जरूरी देखभाल भी ठीक से नहीं मिल पाई। बार बार अनुरोध के बावजूद व्यवस्थाएं नहीं की गईं, जिससे उनकी सेहत को लेकर और चिंता बढ़ी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस याह्या अफरीदी की अध्यक्षता वाली पीठ ने तुरंत एक स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया। यह बोर्ड उनकी पूरी जांच करेगा और इलाज को लेकर सिफारिश देगा। साथ ही अदालत ने उन्हें विदेश में मौजूद अपने बेटों से बात करने की अनुमति भी दी है।
कुछ सूत्रों ने इसे एक बड़े पैटर्न से जोड़ते हुए आरोप लगाया है कि राजनीतिक विरोधियों को धीरे धीरे स्वास्थ्य संकट में धकेला जाता है। हालांकि इन दावों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इमरान खान आज भी बड़ी जनसमर्थन वाली शख्सियत हैं, इसलिए उनकी सेहत से जुड़ी खबरें देश की राजनीति पर सीधा असर डाल सकती हैं। अब सबकी नजर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर टिकी है।










