भारत अपनी रक्षा कूटनीति को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है और देश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। इसी क्रम में महाराष्ट्र के पुणे में पहली बार अफ्रीकी सेना प्रमुखों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत और अफ्रीकी देशों के बीच रक्षा सहयोग मजबूत करना है सैन्य प्रशिक्षण को बढ़ावा देना और भारतीय रक्षा उद्योग की पहुंच को अफ्रीका तक विस्तार देना है।
यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ दुनिया के प्रमुख लक्षण निर्यातक देश में अपनी जगह मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सम्मेलन में अफ्रीका के बीस से अधिक देशों के सैन्य प्रमुख और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भाग लेंगे इसके अलावा भारतीय सेना रक्षा मंत्रालय और रक्षा उद्योग से जुड़े कहीं वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।
सम्मेलन के दौरान आधुनिक युद्ध तकनीक आतंकवाद से मुकाबला समुद्री सुरक्षा साइबर सुरक्षा संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा उपकरणों में सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विस्तार से चर्चा होगी। भारत लंबे समय से अफ्रीकी देशों के साथ महत्वपूर्ण मित्रता बनाए हुए हैं संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारतीय सेवा और कहीं अफ्रीकी देशों की सेनाएं साथ काम करती हैं।
सम्मेलन दोनों पक्ष के बीच विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर बनेगा। इस सम्मेलन का सबसे बड़ा उद्देश्य भारत के रक्षा उद्योग को अफ्रीका देश तक पहुंचना है पिछले कुछ वर्षों में भारत में मिसाइल प्रणाली, रडार, ड्रोन निगरानी उपकरण, गोला बारूद और अन्य सैन्य उपकरणों के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति की है।
सरकार की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहले के तहत विकसित रक्षा उत्पादन अब वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं भारत चाहता है कि अफ्रीकी देश अपनी रक्षा जरूरत के लिए भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दें। सम्मेलन के दौरान भारतीय रक्षा कंपनी द्वारा निर्मित आधुनिक सैन्य उपकरणों और तकनीक की प्रदर्शन भी किया जाएगा प्रतिनिधि मंडलों को यह बताया जाएगा कि भारत कम लागत उच्च गुणवत्ता और विश्वास करने के साथ रक्षा समाधान उपलब्ध करा सकता है इससे भारतीय रक्षा निर्यात को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अफ्रीका आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र का एक बड़ा बाजार बन सकता है कहीं अफ्रीकी देश अपने सेनन का आधुनिकरण कर रहे हैं और उन्हें आधुनिक हथियारों संचारों प्रणालियों तथा निगरानी तकनीकी आवश्यकता है। ऐसे में भारत उनके लिए एक भरोसेमंद और के फायदे साझेदार बन सकता है।
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रक्षा सहयोग के अलावा सम्मेलन में सैनिक शिक्षा क्षमता निर्माण संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता जैसे विषयों पर भी विचार विमर्श होगा इससे दोनों पक्ष के बीच सहयोग का नया ढांचा तैयार होने की संभावना है। भारत की विदेश नीति में अफ्रीका का महत्व लगातार बढ़ रहा है पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अफ्रीकी देशों के साथ व्यापार निवेश शास्त्र शिक्षा ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया है। अब रक्षा क्षेत्र में यह पहला दोनों क्षेत्रों के संबंधों को और अधिक व्यापक बनाएगी।
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विशेषज्ञ के अनुसार यह सम्मेलन सेवा रक्षा उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर भी भारत और अफ्रीका देश के बीच बेहतर सामान्य स्थापित करेगा इससे भारत की वैश्वीकरण नीति भूमिका और मजबूत होगी।