LPG सप्लाई पर संकट के बादल -ईरान की धमकी एक बूंद भी बाहर नहीं जाने देंगे, खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। और इसका सीधे असर दुनिया भर की तेल और रसोई गैस यानी LPG सप्लाई पर पड़ने का खतरा मंडरा रहा है। ईरान ने साफ़ धमकी दी है की अगर हालात बिगड़े तो वह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ से होने वाली सप्लाई को पूरी तरह रोक सकता है।
ईरान की क्रांतिकारी गार्ड फोर्स ने जहाजों को इस जल मार्ग के पास न आने की चेतावनी भी दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की तेल और गैस सप्लाई का मुख्य रास्ता है। इसलिए इसके बंद होने की आशंका मात्र से ही बाज़ार में हलचल मच गई है।
दरअसल यह तनाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी और क्षेत्र में जारी सैन्य कार्यवाहियों से जुड़ा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है की अमेरिका अगर हमला करता है तो उसका करारा जवाब दिया जाएगा। और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य सिर्फ़ ईरान की अपनी शर्तों पर ही खुला रहेगा। दूसरी तरफ़ अमेरिका का कहना है की जल मार्ग पर आवाजाही अभी सामान्य बनी हुई है और स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।

भारत के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि देश अपनी तेल और एलपीजी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा लंबे समय से खाड़ी देशों से इसी रास्ते के ज़रिए माँगता रहा है। अगर स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ सच में बंद होता है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की किल्लत होने की अशंक जतायी जा रही है।हालांकि सरकार का कहना है की इस बार भारत ने पहले से ही मज़बूत तैयारी कर रखी है।
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पेट्रोलियम मंत्री प्रदीप सिंह पुरी के मुताबिक़ भारत ने अपनी तेल आपूर्ति करने वाले देशों की संख्या बढ़ाकर 41 कर दी है। अब भारत इराक़, रूस, सऊदी अरब और यूएई के अलावा अंगोला, नाइजीरिया और कई अन्य देशों से भी तेल ख़रीद रहा है। इससे अगर किसी एक इलाके में संकट आता है तो बाक़ी देशों से सप्लाई जारी रह सके। इसके साथ ही भारत ने अमेरिका से LPG की लंबी अवधि की डील भी की है, जिससे रसोई गैस की सप्लाई पर निर्भरता कम होगी।
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इसके अलावा संयुक्त अरब, अमीरात, अबू धाबी क्रूड आयल पाइपलाइन तेल को सीधे फुजैरा बंदरगाह तक पहुचाती है। जो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है। इससे भारतीय जहाजों को इस संवेदनशील समुद्र रास्ते से गुज़रने की ज़रूरत काफ़ी कम हो गई है। इंडियन आयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों ने भी पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ मिलकर आपूर्ति सुरक्षित रखने की योजना बना रखी है।
कुल मिलाकर ईरान की धमकी से वैश्विक स्तर पर सप्लाई संकट की आशंका जरूर बनी हुई है। लेकिन भारत ने अपनी आयात स्रोत बढ़ाकर और वैकल्पिक रास्ते तैयार करके इस खतरे से निपटने की कोशिश की है