रूस और यूक्रेन के बीच जंग एक बाद फिर भयानक रूप से मोड़ ले चुकी है। रविवार रात को रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाके पर बड़ा हमला किया, जिसमे कम से कम 23 लोगो की जान गई। यह पिछले एक हफ़्ते मैं कीव पर हुआ दूसरा बड़ा हमला है। इस हमले में कई लोग घायल हुए है, जिनमे बच्चे भी शामिल है।
यूक्रेन की एयरफोर्स का कहना है की इंस्पेक्टर मिसाइल्स की भारी कमी की वजह से रूस की दागी गई 23 बैलिस्टिक मिसाइलो में से एक को मार गिराया ना जा सका। रूस ने इस हमले में कुल 68 मिसाइल और 351 ड्रोन इस्तेमाल किए थे। यूक्रेनी सेना क्रूज मिसाइलो और ड्रोन को रोकने में तो कामयाब रही, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल के सामने बेबस नज़र आई, क्युकी इन्हें रोकने के लिए जरूरी पेट्रियट इंस्पेक्टर मिसाइल उनके पास नहीं बची।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इस हमले के बाद नाटो देशों से मदद मी माँग की है। उन्होंने कहा की इस हफ़्ते तुर्की की अंकारा में होने वाली नाटो समिट में सहयोगी देशों के गोदामों में पड़ी रहेंगी, तब तक रूस इसी तरह रिहाइशी इलाको को निशाना बनाता रहेगा।

हमले में कीव के पॉडिल्स्की इलाके में एक नौ मंजिला रिहाइशी इमारत की ऊपरी मंज़िल पूरी तरह तबाह हो गई। इसके अलावा ओबोलोंस्की और होलोसिविस्की इलाको में भी कई इमारतों को नुक़सान पहुचा । कीव शहर मैं क़रीब 16 लोगो की मौत हुई, और 90 से ज़्यादा लोग घायल हुए। कीव के पास बसे व्यिष्णेव कस्बे में भी सात लोगो की जान गई, और करीब 600 लोगो की असुरक्षित हालत देखते हुए वहाँ से हटाया गया।
बचाव दल में मलबे में फंसे लोगो को निकालने के लिए लगातार काम कर रहे है। अधिकारियों को आशंका है की अब भी कुछ लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते है। स्थानीय लोगो ने बताया की धमाके की आवाज इतनी तेज थी की आसपास की इमारतों की खिड़किया तक टूट गई और चारो तरफ़ धुआं फेल गया।
रूस की तरफ़ से कहा गया कि यह हमला हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियो और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को निशाना बनकार किया गया था।हालाकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, इस युद्ध में अब तक 16 हज़ार से ज़्यादा आम नागरिक की जान जा चुकी है।
बता दे की यह हमला ऐसे समाये हुआ है जब मिडल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से दुनिया भर में पेट्रियट इंस्पेक्टर मिसाइल की सप्लाई पहले से कम हो गई है। इसी वजह से यूक्रेन को इनकी भारी किल्लत झेलनी पड़ रही है। अब सबकी नज़र इस बात पर है की नाटो समिट में यूकेरीन को कितनी मदद मिल पाती है।