रक्षाबंधन के त्यौहार से पहले ही चीनी के रेट आसमान छू रहे है। चीनी के दामों में निरंतर बढ़ोतरी होते देख विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कीमतों में करीब 40 फीसदी उछाल का दावा करते हुए सरकार से तीन सवाल पूछे हैं। मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए पूछा कि भारत चीनी के उत्पादन में सबसे प्रमुख माना जाता है तब भी भारत में स्टॉक नौ साल के निचले स्तर पर कैसे पहुंच गया और इसी के साथ कीमतों में इतनी तेजी कैसे बढ़ी है।
दूसरी तरफ चीनी के रेट आसमान छूते देख लोगों ने सवाल किया कि क्या सरकार सारी चीनी की मात्रा एथेनॉल बनाने में लगा रहे है इसलिए चीनी के दाम बढ़ते नजर आ रहे हैं ? इस सवाल पर टिप्पणी देते हुए सरकार ने साफ किया है कि चीनी महंगी होने की वजह एथेनॉल के लिए गन्ने का इस्तेमाल नहीं, बल्कि कम उत्पादन, मौसम की मार और बढ़ी मांग है।
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क्या थे मल्लिकार्जुन खरगे के सवाल ?
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा “पहले चीनी उत्पादन में गिरावट आई, फिर स्टॉक 9 सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, अब हम विदेशों से चीनी आयात कर रहे हैं और दूसरी ओर, हम गन्ने को इथेनॉल में मिलाकर पेट्रोल में मिला रहे हैं।”कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चीनी की बढ़ती कीमतों और घटते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार से तीन सीधे सवाल किए हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में चीनी करीब 40 प्रतिशत महंगी हुई है और त्योहारों से पहले इसका बोझ आम लोगों पर पड़ रहा है।
- चीनी का स्टॉक इतना कम क्यों हुआ? खरगे ने पूछा कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का स्टॉक नौ साल के निचले स्तर पर कैसे पहुंच गया और सरकार को 10 लाख टन चीनी का शुल्क-मुक्त आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी?
- महंगाई की जिम्मेदारी किसकी है? उन्होंने सवाल किया कि जब तीन महीने में चीनी करीब 40 प्रतिशत महंगी हो गई है, तो त्योहारों से पहले आम जनता पर पड़ रही इस महंगाई की मार की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- एथेनॉल नीति की समीक्षा क्यों नहीं? खरगे ने पूछा कि जब घरेलू बाजार में चीनी की कमी बताई जा रही है और सरकार विदेश से चीनी मंगा रही है, तो पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के लिए गन्ने और अनाज के इस्तेमाल की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है।
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पिछले 10 साल में चीनी के भाव
| वर्ष | औसत खुदरा भाव (₹/किलो) |
|---|---|
| 2016 | ₹38.62 |
| 2017 | ₹42.63 |
| 2018 | ₹38.97 |
| 2019 | ₹39.68 |
| 2020 | ₹39.58 |
| 2021 | ₹41.71 |
| 2022 | ₹42.40 |
| 2023 | ₹44.50 |
| 2024 | ₹45.40 |
| 2025 | ₹45.54 |
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चीनी की बढ़ोतरी पर सरकार का बयान
केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि चीनी की कीमतों में हालिया तेजी कई वजहों का नतीजा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के मुताबिक, खुदरा चीनी का औसत भाव 20 जुलाई को 48.18 रुपये प्रति किलो था, जो 20 अगस्त को बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गया। यानी करीब एक महीने में कीमत में लगभग 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
सरकार के मुताबिक इस साल चीनी उत्पादन में अनुमानित कमी का बड़ा कारण गन्ने की पैदावार पर पड़ा मौसम का असर है। खराब मानसून और गन्ने की खेती प्रभावित होने से उत्पादन पर दबाव आया है। ऐसे में घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं।





