10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और दिल्ली पुलिस के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इस प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। प्रदर्शन से पहले CJP के कुछ प्रमुख नेताओं ने अपनी गिरफ्तारी की आशंका जताई है। हालांकि, इन नेताओं की गिरफ्तारी की फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
CJP के सौरव दास ने दावा किया है कि सरकार उनके साथ-साथ पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका को गिरफ्तार करने की योजना बना रही है। दास ने 10 अक्टूबर से बड़े आंदोलन का आह्वान भी किया है। उनके इस दावे के बाद अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी।
20 जुलाई के प्रदर्शन की जांच भी जारी
बता दें कि 10 अक्टूबर के आंदोलन से पहले 20 जुलाई को हुए CJP प्रदर्शन का मामला भी अहम हो गया है। उस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने घटना से जुड़े मामलों की जांच क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल को सौंपने का फैसला किया था।
पुलिस की जांच में प्रदर्शन के दौरान मौजूद वीडियो फुटेज, सीसीटीवी और दूसरे उपलब्ध सबूतों के आधार पर घटनाक्रम को समझने और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। इसी पुराने मामले के कारण 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पुलिस की तैयारी पर भी नजर है।
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आखिर क्यों हो रहा है 10 अक्टूबर का आंदोलन?
CJP का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। पार्टी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है। CJP का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पार्टी ने इसी मुद्दे को लेकर पहले भी प्रदर्शन किए हैं और अब 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े आंदोलन की तैयारी की है। दूसरी ओर, CJP के आरोपों और राजनीतिक दावों को उनके पक्ष के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर क्या तैयारी?
CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठाएगी।
7 अक्टूबर को सौरव दास ने बताया कि CJP ने दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन के संबंध में औपचारिक पत्र दिया है। उनके मुताबिक पुलिस को इसकी रिसीविंग भी मिली है और बातचीत के दौरान पार्टी से एक अंडरटेकिंग ली गई है। दास ने कहा कि पार्टी ने अपनी ओर से जरूरी प्रक्रिया पूरी कर दी है और उसे उम्मीद है कि पुलिस सहयोग करेगी।
यानी एक तरफ पार्टी प्रदर्शन की तैयारी में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
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अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि देशभर से लोग इस आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली आएंगे।
दीपके ने यह भी कहा है कि अगर दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर जाने से रोकती है तो जहां उन्हें रोका जाएगा, वहीं प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण बताते हुए इसे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने का प्रयास बताया है।
इसी बीच महाराष्ट्र के चंद्रपुर में CJP समर्थकों को पुलिस नोटिस दिए जाने का मामला भी सामने आया है। अभिजीत दीपके ने दावा किया कि कुछ समर्थकों से दिल्ली जाने और प्रदर्शन के खर्च से जुड़े सवाल पूछे गए। पुलिस की ओर से इसे निवारक कार्रवाई के तौर पर देखा गया है, जिसका उद्देश्य संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकना बताया गया है।
सौरव दास और आशुतोष रांका ने जताई गिरफ्तारी की आशंका
प्रदर्शन से कुछ दिन पहले सौरव दास ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि उन्हें, अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका समेत पार्टी के कुछ नेताओं को गिरफ्तार किया जा सकता है। आशुतोष रांका ने भी इस दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें गिरफ्तारी की आशंका की जानकारी मिली है।
बता दें कि दिल्ली पुलिस या केंद्र सरकार की ओर से इन नेताओं को गिरफ्तार करने की किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे खबर में आरोप या आशंका के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका ने गिरफ्तारी की आशंका जताई है, लेकिन उनकी गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं 7 अक्टूबर को सौरव दास की ओर से दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन की औपचारिक सूचना दिए जाने की बात सामने आई है।





