भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो की इकाइयों के लिए भूमि चिह्नित की गई है। ककरहवा, खुनुआ, बढ़नी और डुमरियागंज में कार्यालय व आवास के लिए भूमि प्रस्तावित है। ककरहवा के भाटिनपार और खुनुआ 0.3000-0.3000 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई है। डुमरियागंज के रूदौलिया बुजुर्ग में भी 0.3000 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित है।
इससे सीमा क्षेत्र में खुफिया सूचनाओं को जुटाने और अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सिद्धार्थनगर की सीमा नेपाल से लगी हुई है और यहां एसएसबी के साथ पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी करती हैं।
हाल के महीनों में सीमा पर सीसीटीवी, चेक पोस्ट और संयुक्त गश्त जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है। ककरहवा समेत कई सीमा क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था बढ़ाई गई है। ऐसे में IB के लिए स्थायी व्यवस्था की पहल को सीमा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ेगी खुफिया निगरानी
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी चल रही है। जिले में इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी आईबी के लिए चार स्थानों पर जमीन प्रस्तावित किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रस्तावित जमीन पर आईबी से जुड़ी व्यवस्था विकसित होने के बाद सीमा क्षेत्र में खुफिया सूचनाओं पर काम करने और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सिद्धार्थनगर की सीमा नेपाल से लगी होने के कारण यहां सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार निगरानी महत्वपूर्ण रहती है। सीमा क्षेत्र में एसएसबी के अलावा स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय रहती हैं। सितंबर 2026 में बढ़नी बॉर्डर के निरीक्षण के दौरान पुलिस, SSB, IB , कस्टम और अन्य अधिकारियों के बीच सीमा पार आवाजाही, निगरानी और सूचनाओं के आदान-प्रदान को लेकर चर्चा हुई थी।
चार स्थानों पर जमीन प्रस्तावित किए जाने से क्या होगा?
IB के लिए जमीन उपलब्ध होने पर सीमा क्षेत्र से जुड़ी खुफिया जानकारी को स्थानीय स्तर पर जुटाने और उसका विश्लेषण करने के लिए स्थायी आधारभूत व्यवस्था विकसित की जा सकती है। सीमा से जुड़े मामलों में स्थानीय पुलिस, एसएसबी, कस्टम और दूसरी एजेंसियों के साथ सूचनाओं का बेहतर आदान-प्रदान भी हो सकता है।
सिद्धार्थनगर में सीमा सुरक्षा को लेकर पिछले कुछ समय में कई स्तरों पर काम हुआ है। मई 2026 में ककरहवा अंतरराष्ट्रीय गेट के पास आधुनिक CCTV कैमरे और स्थायी चेक पोस्ट से जुड़ी सुविधाओं का उद्घाटन किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक सीमा क्षेत्र के कुल नौ स्थानों पर आधुनिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं, जिनसे 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा SSB ने सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए स्थायी चेक पोस्ट की योजना पर भी काम किया है। अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नया ब्लूप्रिंट तैयार किया गया था।
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बढ़नी बॉर्डर पर पहले भी सामने आए आतंकी कनेक्शन
बढ़नी बॉर्डर का नाम पहले भी कई सुरक्षा मामलों में सामने आ चुका है। साल 1993 में भारत-नेपाल सीमा के बढ़नी इलाके से अजमेर सिंह और भाग सिंह नाम के दो उग्रवादियों को पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद भी यह इलाका सुरक्षा एजेंसियों की नजर में बना रहा।
बता दें कि साल 2010 में एटीएस ने बढ़नी बॉर्डर के पास से इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े सलमान उर्फ छोटू को गिरफ्तार किया था। उस पर आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप थे और उसकी गिरफ्तारी के बाद सीमा के रास्तों से होने वाली आवाजाही को लेकर भी जांच की गई थी।
साल 2013 में इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े अब्दुल करीम टुंडा को बिहार के रक्सौल से पकड़ा गया था। पूछताछ के दौरान उसके नेपाल में रहने और भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़े होने की बातें सामने आने की रिपोर्टें थीं। इसी संगठन से जुड़े यासीन भटकल की गिरफ्तारी का मामला भी सामने आया था। इसके अलावा पड़ोसी महराजगंज जिले से हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नासिर नाम के आरोपी को पकड़े जाने का भी उल्लेख मिलता है। बब्बर खालसा से जुड़े माखन सिंह की गिरफ्तारी का मामला भी बढ़नी से जोड़ा जाता रहा है।
इन घटनाओं के चलते बढ़नी और आसपास का भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार संवेदनशील रहा है। सीमा खुली होने की वजह से यहां आने-जाने वालों पर नजर रखना और अन्य गतिविधियों की जानकारी समय पर जुटाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती रहती है।





