ऑपरेशन सिंदूर के बाद ₹10 लाख करोड़ की डिफेंस डील, लंबी जंग की तैयारी तेज

सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबको के आधार पर करीब 52 हज़ार करोड़ रुपए के आधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणाली की ख़रीद को मंज़ूरी दी है। इसमें एयर डिफेंस, एंटी ड्रोन निगरानी उपग्रह और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई प्रोजेक्ट शामिल हैं। इस पूरी पहल में स्वदेश तकनीक और घरेलू उत्पादन को खास प्राथमिकता दी गई है।

Shakshi Chauhan

14 जुलाई 2026

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद ₹10 लाख करोड़ की डिफेंस डील, लंबी जंग की तैयारी तेज

भारत की रक्षा ख़रीद परिणीति बहुस्तरीय युद्ध के लिए बड़ा आधुनिकीकरण। भारत सरकार ने अपनी सेनाओं को भविष्य के युद्ध के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा ख़रीद परिषद यानी डी ए सी की बैठक में लगभग 52 हज़ार करोड़ रुपए के आधुनिक हथियारों और सैन्य प्रणाली की ख़रीद को मंज़ूरी दी गई है। यह फ़ैसला थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों के लिए लिया गया है।

यह मंज़ूरी दरअसल ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबको बाद भारत की बदलती युद्ध नीति का हिस्सा है। इस ऑपरेशन के दौरान दुश्मन की तरफ़ ड्रोन, मिसाइल और लोइटरिंग हथियार का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल देखा गया था। साथ ही पूर्वी लद्दाख में चाइना के साथ लंबे समय से चल रहे सैन्य तनाव ने भी भारत को अपनी नीति बदलने को मजबूर किया है। अब सरकार को ध्यान सिर्फ़ लड़ाकू विमान टैंक या युद्धपोत ख़रीदने पर नहीं बल्कि एसी तकनीकों पर है जो दुश्मन की हरकतों पर लगा तार नज़र रख सके और हवाई हमलों को समय रहते ना काम कर सके।

इस पैकेज में अलग अलग दूरी पर काम करने वाले एयर डिफेंस सिस्टम शामिल किए गए हैं, ताकि देश की सुरक्षा कई परतों में मज़बूत हो सके । इसके आलवा वायु सेना को एक ऐसो हाई अल्टीट्यूड प्रणाली भी मिलेगी जो अंतरिक्ष की निचले कक्षा से सीमा पार की गतिविधियों पर 24 hours नज़र रख सकेगी। नौ सेना के लिए समुद्री निगरानी करने वाले मानवरहित सिस्टम और माइन वारफेयर क्षमता बढ़ाने वाले कारणों को भी मंज़ूरी दी गई है। जिससे हिन्द महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री ताक़त और बढ़ेगी।

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रक्षा मंत्रालय के अनुसार डी ए सी की यह मंज़ूरी दरअसल ख़रीद प्रक्रिया के पहेले औपचारिकता कदम है, जिसे तकनीकी भाषा में इसे एक्सपेंस ऑफ़ नेसेसिटी भी कहा जाता है। इसका मतलब है की सरकार ने सेना की ज़रूरत को स्वीकार कर लिया है। अब इसके बाद टेंडर जारी करने, तकनीकी जांच करने और अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर करने जैसी प्रक्रिया शुरू होंगी। यानी हतियार तुरंत सेना तक नहीं पहुंचेगी।

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रक्षा मंत्रालय ने इन सभी कि ख़रीद योजनाओं में स्वदेशी तकनीक और घरेलू उद्योग की भागीदारी पर खास जोर दिया है। इसे भारत की रक्षा अनुसंधान संस्थान के साथ साथ सरकारी और निजी कंपनियों को भी नई परियोजनाएँ मिलेगी।

साथ ही विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम होगी और आत्म निर्भर भारत अभियान को भी बाल मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है की इतनी बड़ी राशि को मंज़ूरी से ना सिर्फ़ भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन मज़बूत होगा बल्कि दुनिया भर में भारत की सैन्य ताक़त और रणनीति स्वतंत्रता भी बढ़ेगी।

Shakshi Chauhan
लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way