15 अगस्त तक नहीं मानीं 5 मांगें तो Zomato-Swiggy की फूड डिलीवरी हो सकती है ठप

देशभर के कई रेस्टोरेंट मालिकों ने दोनों फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि अगर 15 अगस्त तक उनकी पांच प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनी, तो वे ऑनलाइन ऑर्डर लेना बंद कर सकते हैं। इस विवाद का असर लाखों ग्राहकों, हजारों रेस्टोरेंट और पूरे फूड डिलीवरी कारोबार पर पड़ने की आशंका है।

Palak Gupta

30 जुलाई 2026

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15 अगस्त तक नहीं मानीं 5 मांगें तो Zomato-Swiggy की फूड डिलीवरी हो सकती है ठप

अगर आप स्विग्गी या जोमाटो फ़ूड डिलीवरी ऐप से ज्यादातर या हर वीकेंड पर डिलीवरी कराते है तो आपके लिए एक जरूरी खबर सामने आई है। बता दें कि इन फ़ूड डिलीवरी ऐप्स से खरीदारी करने वाले लोगों को आने वाले समय में कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

अब होटल और रेस्टोरेंट मालिकों ने इन दोनों फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि अगर 15 अगस्त तक उनकी पांच प्रमुख मांगों पर कोई समाधान नहीं निकला, तो वे दोनों प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन फूड डिलीवरी बंद कर सकते हैं। रेस्टोरेंट मालिकों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में फूड डिलीवरी कंपनियों की नीतियां लगातार उनके लिए महंगी होती गई हैं।

इसके अलावा पिछले कुछ समय से सभी रेस्टोरेंट वालों ने बताया कि यह ऐप्स ज्यादा कमीशन, मनमानी कटौती और बिना पूछे डिस्काउंट जैसे मुद्दों को लेकर शिकायत की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। अगर इनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो जल्द ही बेंगलुरु के अधिकतम रेस्टोरेंट  इन ऐप्स के जरिए ऑर्डर लेना बंद कर सकते हैं।

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रुहत बेंगलुरु होटल्स एसोसिएशन (BBHA) और अन्य होटल संगठनों ने कहा है कि उन्होंने Swiggy और Zomato को अपनी मांगों की लिस्ट भेजने का फैसला किया है और लिखित जवाब मांगा है। यह फैसला रेस्टोरेंट मैनेजर और ओनर ने 15 अगस्त तक लिखित में मांगा है यदि 15 अगस्त तक कोई जवाब नहीं आया तो इन दोनों फ़ूड डिलीवरी ऐप्स को बॉयकॉट कर देंगे। इसी के तहत इन फ़ूड डिलीवरी ऐप्स के सामने 5 शर्तें रखी गई है।

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क्या हैं रेस्टोरेंट मालिकों की 5 बड़ी मांगें?

  • कमीशन और प्लेटफॉर्म फीस में कटौती।
  • भारी डिस्काउंट देने का दबाव खत्म किया जाए।
  • ऑर्डर और ग्राहक डेटा में पारदर्शिता लाई जाए।
  • भुगतान समय पर और स्पष्ट नियमों के तहत किया जाए।
  • छोटे और स्थानीय रेस्टोरेंट के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।

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रेस्टोरेंट मालिक क्यों हैं नाराज?

रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि ऑनलाइन फूड डिलीवरी ने ग्राहकों तक पहुंच आसान जरूर बनाई है, लेकिन इसके बदले प्लेटफॉर्म पर उनकी निर्भरता भी काफी बढ़ गई है। उनका दावा है कि कई मामलों में 8 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक कमीशन, अलग-अलग प्रमोशनल चार्ज और मार्केटिंग फीस जोड़ने के बाद उनका मुनाफा काफी कम हो जाता है।

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छोटे कारोबारियों का कहना है कि बढ़ती लागत के बीच इतने बड़े शुल्क के साथ टिके रहना आसान नहीं है। उनका दावा है कि अगर किसी रेस्टोरेंट को सभी कटौतियों के बाद 100 रुपये की कमाई करनी हो, तो उसे मेन्यू की कीमत करीब 43% तक बढ़ानी पड़ सकती है। इससे कारोबार पर भी असर पड़ता है और ग्राहक भी महंगी कीमत चुकाते हैं।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.