ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग में काम करने वाले हज़ारों मनरेगा कर्मचारी अपनी मांगो को पूरा करने के लिए मोहाली के विकास भवन पर पहुँचकर जोरों से नारेबाजी और प्रदर्शन करने लगे। इसी बीच उन्होंने धरना देने की भी ठानी। अपनी मांगों को स्पष्ट व्यक्त करते हुए बुधवार को 2:00 बजे करीब कर्मचारी एकत्रित हुए।
कर्मचारियों की भीड़ को बढ़ता देख पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया। पुलिस के हटाने पर जब लोग जबरदस्ती विकास भवन में घुसने लगे तब पुलिस ने दोनों मुख्य गेट को बंद कर दिया जिसके बाद कर्मचारी गेट पर ही इकट्ठे हो कर प्रदर्शन करने लगे।
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बता दें कि प्रदर्शन में आदमियों से ज्यादा संख्या महिलाओं की देखने को मिल रही थी। इसके बाद यूनियन नेताओं ने गेट पर से ही कर्मचारियों को संबोधित किया। मनरेगा कर्मचारी यूनियन पंजाब के नेताओं ने कहा कि मनरेगा कर्मचारी पिछले लंबे समय से मुश्किल और असुरक्षित हालात में काम कर रहे है।
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कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न तो स्थायी कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही समान काम के बदले समान राशि। उनका आरोप है कि कई बार सरकार और विभागीय अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखने के बावजूद कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वह अपनी जगह से नहीं हिलेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि पक्की नौकरी न होने के कारण उनको लगातार मानसिक पीड़ा मिलती है और पैसों की तंगी रहने लगी है।
मनरेगा कर्मचारी यूनियन प्रधान गुरसेवक सिंह ने कहा कि मनरेगा कर्मचारियों को अलग-अलग जिलों में अलग-अलग सैलरी दी जा रही है और नियमों में भी असमानता है। मनरेगा कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ‘समान काम, समान वेतन’ का सिद्धांत सभी कर्मचारियों पर लागू होना चाहिए।
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आखिर क्या थी कर्मचारियों की मांगे ?
प्रदर्शनकारियों ने यह मांग भी रखी कि जल्द ही कर्मचारियों के लाभ के लिए पंजाब यानी स्टेट लेवल पर तुरंत एक जैसी सैलरी पॉलिसी और कॉमन सर्विस रूल्स लागू किए जाएं। इसके अलावा कर्मचारियों को रूरल डेवलपमेंट और पंचायत डिपार्टमेंट में मर्ज करके रेगुलराइज़ करने की फ़ाइल तुरंत आगे बढ़ाई जाए। इसके साथ ही पे स्केल, पे प्रोटेक्शन और पंजाब सिविल सर्विस रूल्स लागू किए जाएं।
इसके अलावा यूनियन नेताओं ने कहा कि मनरेगा कर्मचारियों का सर्विस कॉन्ट्रैक्ट 58 साल की उम्र तक या स्कीम लागू होने तक पक्का किया जाए। प्रदर्शन को आगे बढ़ाते हुए आम कर्मचारियों की आवाज़ बनकर यूनियन नेताओं ने प्रशासन से मांगे पूरी करने की अपील की और धरने पर मौजूद रहकर कर्मचारियों को समर्थन दिया।





