लोकसभा में राहुल गांधी पर सत्ता पक्ष के तीखे हमलों के बीच समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव जिस तरह उनके बचाव में सामने आए जिसने एकजुटता की तस्वीर पेश की है। पेपर लीक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में बुधवार को नेता विपक्ष के सवालों पर बुरी तरह से फंस गए थे। तभी समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव उनकी ढाल बनकर विपक्ष को करारा जवाब देते नजर आये।
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क्या है पूरा मामला ?
बता दें कि संसद मानसून सत्र के सेशन के दौरान सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। आज के सेशन में कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता राहुल गांधी को विपक्ष ने तीखे सवालों के संग घेरा। विपक्ष ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधा जब राहुल गांधी ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह के आदेश पर आंदोलन कर रहे GEN-Z छात्रों पर पैलेट गन से फायरिंग की गई है। राहुल गांधी की ओर से यह आरोप लगाते ही पूरा सत्तापक्ष हत्थे से उखड़ पड़ा।
इसी बात पर संसद के कार्यकर्त्ता मंत्री किरण रिजिजू गुस्से से अपनी सीट से उठे और कहा कि राहुल गांधी बिना किसी तथ्य के किसी पर भी आरोप नहीं लगा सकते। उन्होंने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष इतने दृढ़ता से आरोप लगा रहे हैं तो इसका साबुत भी सामने पेश करें।
साथ ही उन्होंने कहा कि अगर सबूत नहीं है तो सभी से माफी मांगे इसके अलावा रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोप को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग करने लगे। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को नसीहत देने लगे।
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राहुल गांधी के घिरने पर संग खड़े अखिलेश
सेशन में राहुल गांधी के साथ कई अन्य पार्टी के नेता भी थे। राहुल गांधी संग जब लोकसभा के कार्यकर्ता बहस कर रहे थे उसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव सदन में राहुल गांधी के लिए ढाल बनकर अपनी सीट से उठे। कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष कोई गंभीर आरोप लगा रहे हैं तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जांच कराए कि किसने छात्रों पर पैलेट गन से फायरिंग करने की इजाजत दी इसकी जांच होनी चाहिए।
इसी बात के बीच संसदीय मंत्री रिजिजू ने कहा “अखिलेश जी आप बिल्कुल अलग बात कह रहे है , जबकि प्रतिपक्ष नेता ग्रह मंत्री पर बिना किसी सबूत के आरोप लगा रहे हैं। इस बेहेस के बाद जब राहुल गांधी ने माफ़ी मांगने से इंकार कर दिया तब स्पीकर ओम बिरला ने सदन को ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। बता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था और भाजपा को कड़ी चुनौती दी थी। पेपर लीक के प्रदर्शन में राहुल गांधी जब प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे थे तब भी अखिलेश यादव प्रमुखता से उनका साथ देते दिखे थे।
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लोकसभा में साथ, लेकिन गठबंधन नहीं
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था और भाजपा को कड़ी चुनौती दी थी। लेकिन अब जब 2027 के विधानसभा चुनाव की चर्चा तेज हो रही है, तो दोनों दलों के नेताओं के बयान अलग-अलग संकेत दे रहे हैं। हाल ही में अखिलेश यादव ने साफ कहा कि लोकसभा का गठबंधन अपनी जगह था, जबकि विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं और उस पर फैसला समय आने पर होगा।
2027 में भी माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन में ही उतरेगी, जिस पर काफी चर्चा देखने को मिली। कई मौकों पर राहुल गांधी के साथ अखिलेश यादव की जुगलबंदी देखकर लोगों को लग रहा था कि सपा-कांग्रेस गठबंधन तय है, लेकिन अब इसमें असमंजस जैसे हालात दिख रहे हैं। पहले अखिलेश यादव ने कांग्रेस की ओर से मांगी जा रही 200 सीटों के दावों पर कहा कि सीट शेयरिंग केवल जीत को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
इसके अलावा कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपना संगठन दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि समाजवादी पार्टी खुद को राज्य में भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्ष मानती है। ऐसे में सीटों का फार्मूला तय करना दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।





