पुलवामा अटैक के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की जिसमें पाकिस्तान को काफी हद तक सैन्य हानि पहुंची थी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान जुलुस का इंतजार कर रहा था। बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर से मिली चोट के बाद पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में आतंक का नया खेल रच रहा है।
PoK में भारत द्वारा जबरदस्त मात के बाद अब पाकिस्तान एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में बड़ी साजिश रच रहा है। पाकिस्तान का यह नया रणनीतिक कदम काफी खतरनाक माना जा रहा है जिसने भारत के लिए चिंताएं दोगुनी कर बढ़ा दी है।
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आखिर क्या है पाकिस्तान की रणनीति ?
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार पाकिस्तान बड़े आतंकी कैंपों के बजाय छोटे-छोटे नेटवर्क तैयार किए जा रहे हैं, आतंकियों को दोबारा संगठित किया जा रहा है और सीमा के करीब नए ठिकाने खड़े करने की कोशिश की जा रही है। पाकिस्तान के इस कदम को देखते हुए भारत ने PoK इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।
बता दें कि अगस्त 2026 में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला होने की स्थिति में बाकी देश उसके साथ खड़े होंगे। ऐसे में पाकिस्तान-तुर्की की नजदीकी को सीधे “आतंक की नई फौज” तैयार करने से जोड़ना अभी सही नहीं होगा। हां, भारत के लिए चिंता की बात यह है कि तुर्की से मिलने वाली सैन्य तकनीक और ड्रोन जैसी क्षमताएं पाकिस्तान की सैन्य ताकत को बढ़ा सकती हैं। इसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा।
इसके अलावा खबर आई है कि पाकिस्तान नवंबर से दिसंबर के महीने में जम्मू-कश्मीर में किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की साजिश रच रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस ढांचे पर भारत ने हमला किया था पाकिस्तान उससे दोबारा खड़ा करने की प्लानिंग कर रहा है।
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नवंबर तक आतंक का नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश
हाल ही में खुफिया एजेंसियों ने बताया है कि पाकिस्तान का मकसद अपनी एजेंसियों को पूरे तरीके से सक्रिय करने का है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि आतंकी हमले के जरिए पाकिस्तान एक साथ कई मकसद हासिल करना चाहता है। पहला, आतंकियों का मनोबल बढ़ाना है और दूसरा, जम्मू-कश्मीर में डर का माहौल पैदा करना और तीसरा, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के खिलाफ फिर से आतंक का दबाव बनाने की कोशिश करना है।
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पाकिस्तान को तुर्की से क्या मिल रहा है?
पाकिस्तान की सैन्य क्षमता बढ़ाने में तुर्की की रक्षा तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है। खास तौर पर ड्रोन, वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग बढ़ रहा है। अगस्त में तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौता किया, जिसमें तीनों देशों ने सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। समझौते में संयुक्त सैन्य अभ्यास, वायु और समुद्री सुरक्षा, मानवरहित प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बात कही गई है।
भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी नजर पाकिस्तान की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। वहीं नवंबर और दिसंबर को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि अभी किसी तरह के हमले की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन आगे आशंकाएं जताई जा रही है।





