प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान दौरे के लिए शनिवार को तैयार हो गए हैं। 29 अगस्त को रवाना होकर प्रधानमंत्री 31 अगस्त को किर्गिस्तान का भी दौरा करेंगे। नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर ताशकंद के लिए रवाना हुए है।
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प्रधानमंत्री का यह दौरा 29 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगा। सबसे पहले पीएम मोदी उज्बेकिस्तान पहुंचेंगे, जहां 29 और 30 अगस्त को उनका कार्यक्रम है। यहां वह राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ बातचीत करेंगे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात का मकसद रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाएंगे, जहां SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा कई द्विपक्षीय बैठकों में शामिल होने की संभावना है।
बता दें कि इस दौरे की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्वीट करके दी है। पोस्ट के दौरान उन्होंने बताया है कि वह किन-किन विषयों पर चर्चा करेंगे और किन जगहों का दौरा करेंगे।
किन विषयों पर होगी चर्चा ?
अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति शौकत से कई विषयों पर चर्चा करेंगे। दौरे के दौरान वह दोनों देशों के व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर भी गौर देंगे।
इसके अलावा पीएम मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी केंद्र भी जाएंगे। भारत सरकार के मुताबिक, उज्बेकिस्तान की यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देना है।
बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी का यह उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा होगा इससे पहले वह वर्ष 2015 में उज्बेकिस्तान और मध्य एशिया के अन्य देशों की यात्रा कर चुके हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री 2016 और 2022 में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलनों में हिस्सा लेने के लिए भी उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस बार की यात्रा को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 पर भी नजर
भारत और उज्बेकिस्तान अपने देश के विकास को लेकर भी दृढ़संकल्प लेने के लिए बात करेंगे। अपने देश के बीच एक-दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बातचीत के दौरान भारत के ‘विकसित भारत 2047’ और उज्बेकिस्तान के ‘उज्बेकिस्तान-2030’ से जुड़े साझा विकास लक्ष्यों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होने की उम्मीद है।
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SCO में क्या होगा ?
बता दें कि प्रधानमंत्री का विदेश भ्रमण सिर्फ दौरे तक ही सीमित नहीं है। किर्गिस्तान पहुंचने के बाद पीएम मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह संगठन भारत के लिए इसलिए अहम है क्योंकि इसके जरिए उसे रूस, चीन और मध्य एशिया के कई देशों के साथ एक ही मंच पर बातचीत का मौका मिलेगा।
इसके अलावा इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात अलग अलग मध्य पूर्व देशों के नेताओं से होगी जो व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर सीधे बात करने का मौका देगी।





