छत्तीसगढ़ में NEET UG 2026 की मेरिट लिस्ट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मेरिट लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर NSUI ने रायपुर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खाली प्लेट लेकर स्वास्थ्य मंत्री के बंगले की ओर मार्च किया। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए जारी मेरिट लिस्ट में पारदर्शिता और सही दस्तावेजों की जांच जरूरी है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ की NEET UG 2026 प्रथम चरण की मेरिट लिस्ट में कुछ ऐसे नाम सामने आने का दावा किया गया है, जिनके नाम दूसरे राज्यों की मेरिट या काउंसलिंग सूचियों में भी दिखाई दे रहे हैं। NSUI ने इस मामले को गंभीर बताते हुए उम्मीदवारों के दस्तावेजों की दोबारा जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि अगर डोमिसाइल और जाति प्रमाणपत्रों का सही तरीके से सत्यापन नहीं किया गया, तो अपात्र उम्मीदवारों को राज्य कोटे का लाभ मिल सकता है।
NSUI के प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने खाली प्लेटों के जरिए सरकार का ध्यान छात्रों की समस्याओं की ओर खींचने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मेडिकल सीटें छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं, इसलिए मेरिट लिस्ट तैयार करने में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। छात्रों की मांग है कि पूरी सूची की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए और यदि किसी उम्मीदवार के दस्तावेजों में गड़बड़ी मिलती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
विवाद का एक प्रमुख कारण कुछ उम्मीदवारों के नाम एक से अधिक राज्यों की सूचियों में होने का दावा है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में डोमिसाइल, जाति श्रेणी और पहचान से जुड़ी जानकारियों में भी अंतर सामने आया है। एक मामले में उम्मीदवार की श्रेणी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए NSUI ने सभी उम्मीदवारों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग रखी है।
संगठन की ओर से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपकर संशोधित मेरिट लिस्ट जारी करने की मांग भी की गई है। NSUI का कहना है कि जब तक दस्तावेजों की पूरी तरह से जांच नहीं हो जाती, तब तक मेरिट लिस्ट को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान नहीं होगा। छात्रों के अनुसार, इस तरह की गड़बड़ियों से मेहनत करने वाले योग्य उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है।
NEET UG देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर साल लाखों विद्यार्थी मेडिकल कॉलेजों में MBBS और अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के लिए इस परीक्षा में शामिल होते हैं। इसलिए परीक्षा परिणाम और काउंसलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है। 2026 में भी NEET UG के बाद अलग-अलग राज्यों में काउंसलिंग और सीट आवंटन की प्रक्रिया चल रही है।
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रायपुर में हुए इस प्रदर्शन के बाद अब छात्रों की नजर सरकार और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर है। यदि मेरिट लिस्ट में वास्तव में किसी प्रकार की गलती या दस्तावेजों से जुड़ी अनियमितता सामने आती है, तो उसमें सुधार करना जरूरी होगा। वहीं, अधिकारियों के लिए यह भी जरूरी है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो और योग्य उम्मीदवारों के हितों को नुकसान न पहुंचे।
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कुल मिलाकर, NEET UG मेरिट लिस्ट को लेकर उठे विवाद ने मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और दस्तावेजों के सही सत्यापन की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। NSUI के प्रदर्शन के जरिए छात्रों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इन शिकायतों की जांच किस तरह करते हैं और क्या संशोधित मेरिट लिस्ट जारी की जाती है। छात्रों को उम्मीद है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी और मेडिकल दाखिले की प्रक्रिया योग्य उम्मीदवारों के हित में आगे बढ़ेगी।





