पश्चिम एशिया के हालात और हाल ही में ईरानी मीडिया द्वारा डोनाल्ड ट्रंप के बेटे को दी गई धमकी को देखते हुए सभी देशों में परेशानियाँ बढ़ गई है। बता दें कि हाल ही में मिडिल ईस्ट में दबदबा कायम रखने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य ताकत को सहारा दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने दो बड़े विमानवाहक जहाज समूहों को वहां तैनात करने से अमेरिकी नौसेना की ताकत कहीं और कमजोर हो गई है। यह बात खुद अमेरिकी नेवी के पूर्व कमांडर ने कही है। इसी के साथ अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में दो कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेजे हैं जिनकी ताकत और विपक्ष सैन्य कार्रवाई को परास्त करने की क्षमता सबसे अधिक है। इन जहाजों में सैकड़ों विमान और हजारों सैनिक एक बार में समा सकते हैं।
यह भी पढ़ें: अमेरिका में नौकरी का सपना पड़ सकता है और महंगा, H-1B वीजा फीस $100,000 करने की तैयारी
बता दें कि अमेरिका ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह से कब्जा करने के लिए अपने सिर से एड़ी तक का जोर लगा रहा है जिसके कारण अमेरिका के अन्य क्षेत्रों पर प्रभाव दिखाई दे रहा है। यहाँ तक कि अमेरिका की मिडिल ईस्ट पर यह तैनाती सेअन्य इलाकों में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी कम कर दी है।
यह भी पढ़ें: 25 अगस्त की बड़ी खबरें: देश-दुनिया से लेकर खेल और मनोरंजन तक, हर अहम अपडेट एक नजर में
अमेरिका के पास कुल 11 विमानवाहक जहाज
ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए मिडिल ईस्ट में मजबूत सैन्य मौजूदगी जरूरी मानी जा रही है, लेकिन इसके लिए लगातार लंबे मिशन चलाने पड़ रहे हैं। हाल ही एक इंटरव्यू में पूर्व अमेरिकी नौसेना कमांडर वाइस एडमिरल जॉन मिलर ने अल जजीरा के कार्यक्रम में कहा कि एक ही जगह पर दो कैरियर स्ट्राइक तैनात करने पर बाद में अमेरिका को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास 11 विमानवाहक जहाज हैं जिनमें से कुछ की तैनाती हो रखी है और कुछ मरम्मत या परीक्षण के लिए गए हुए हैं और असल में एक बार में सिर्फ दो या तीन जहाज ही एक साथ पानी में उतरे जा सकते हैं। जब दो ग्रुप मध्य पूर्व में लगा दिए जाते हैं तो बाकी जगहों पर कमी साफ दिखती है।
यह भी पढ़ें: ट्रंप परिवार पर ईरान की सीधी धमकी, बेटे बैरन पर ₹95 करोड़ के इनाम का दावा
मिडिल ईस्ट की तैनाती से पैसिफिक क्षेत्र को हो गया खाली
बता दें कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिमी पैसिफिक से भी अपना एक प्रमुख विमानवाहक जहाज मिडिल ईस्ट में भेज दिया है। जापान में तैनात यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन को मिडिल ईस्ट भेजे जाने के बाद पश्चिमी पैसिफिक में अमेरिकी विमानवाहक पोत की मौजूदगी कम हो गई है।
यह अमेरिका के लिए इसलिए अहम है क्योंकि जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और दक्षिण चीन सागर के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने में विमानवाहक जहाजों की बड़ी भूमिका रहती है। इसके अलावा कुछ जहाजों की तैनाती बहुत लंबी हो गई है। एक जहाज तो 250 दिनों से भी ज्यादा समय से समुद्र में है। इससे चालक दल थक जाते हैं। खाने-पीने और मरम्मत की समस्याएं भी खड़ी हो जाती हैं।





