उत्तर प्रदेश के मेरठ में अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले को ‘दुर्लभतम में दुर्लभ’ श्रेणी का मानते हुए यह फैसला दिया। सजा सुनाते समय अदालत की टिप्पणी में पत्नी के अर्धांगिनी होने और पौराणिक पात्र सावित्री का भी जिक्र आया। इस मामले में अमित की हत्या करने के बाद उसकी मौत को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की गई थी।
जज ने सावित्री का क्यों किया जिक्र?
16 अक्टूबर 2026 को मेरठ की अदालत ने रविता और अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई। सुनवाई के दौरान पत्नी को पति की अर्धांगिनी बताते हुए सावित्री का उदाहरण दिया गया। पौराणिक कथा में सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण बचाने के लिए यमराज से संघर्ष करती हैं। अदालत की टिप्पणी में इस उदाहरण का उल्लेख किया गया।
अदालत ने दोनों को अमित की हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई। इससे पहले 7 अक्टूबर को दोनों को दोषी करार दिया गया था। इसके बाद सजा के सवाल पर सुनवाई हुई और 16 अक्टूबर को मृत्युदंड का फैसला सुनाया गया।
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12 अप्रैल की रात हुई थी अमित की हत्या
यह मामला मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। अमित कश्यप उर्फ मिक्की कश्यप की 12 अप्रैल 2025 की रात हत्या कर दी गई थी। अगले दिन यानी 13 अप्रैल की सुबह उसका शव घर में बिस्तर पर मिला। शव के पास एक जिंदा सांप भी मिला था।
शुरुआत में परिवार को बताया गया कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई है। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आई। जांच में गला दबाकर हत्या किए जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच हत्या के एंगल से शुरू की।
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हत्या को सर्पदंश दिखाने की कोशिश
जांच के अनुसार, रविता और अमरदीप के बीच प्रेम संबंध थे। पुलिस का आरोप था कि अमित को उनके रिश्ते की जानकारी हो गई थी और वह इसका विरोध कर रहा था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, इसी के चलते दोनों ने अमित की हत्या की साजिश रची।
आरोप था कि हत्या के बाद घटना को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने के लिए शव के पास जिंदा सांप छोड़ा गया। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दूसरे साक्ष्यों ने मामले को नया मोड़ दिया। पुलिस ने जांच के दौरान फोन रिकॉर्ड और गवाहों के बयान सहित कई साक्ष्य जुटाए।
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12 गवाहों के बयान बने अहम आधार
मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने 26 जून 2025 को अदालत में आरोप-पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए। इनमें अमित के परिवार के सदस्य, चिकित्सक और मामले की जांच से जुड़े लोग शामिल थे।
अदालत ने पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद रविता और अमरदीप को दोषी माना। इसके बाद दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।
फैसले के बाद परिवार ने जताई संतुष्टि
अदालत के फैसले के बाद अमित की मां ने संतुष्टि जताई। परिवार की ओर से मामले में कड़ी सजा की मांग की गई थी। इस फैसले के साथ मेरठ का यह हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि किसी अपराध को छिपाने की कोशिश के बावजूद वैज्ञानिक जांच और कानूनी प्रक्रिया किस तरह मामले की सच्चाई सामने लाने में मदद कर सकती है।





