आते ही घर की सफाई, सजावट और पुताई की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। कोई अपने घर को नया रंग देता है, तो कोई दीवारों पर पेंट करवाने के साथ दरवाजों और खिड़कियों की पॉलिश भी कराता है। लेकिन इस दौरान अक्सर लोग पेंट के रंग और कीमत पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन उसकी सुरक्षा और उससे होने वाले संभावित नुकसान को नजरअंदाज कर देते हैं।
पेंट में मौजूद कुछ रसायन और उससे निकलने वाली वाष्प आंखों में जलन, सिरदर्द, चक्कर, त्वचा में परेशानी और सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकती हैं। पुराने पेंट की परतों में लेड यानी सीसा भी मौजूद हो सकता है, जो खासकर बच्चों के लिए नुकसानदेह है। इसलिए पुताई कराने से पहले सही पेंट चुनना और काम के दौरान सावधानी बरतना जरूरी है।
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पेंट में लेड होना क्यों खतरनाक है?
लेड एक जहरीली धातु है। शरीर में इसकी मात्रा बढ़ने से दिमाग, नर्वस सिस्टम और दूसरे अंगों पर असर पड़ सकता है। छोटे बच्चों में लेड का संपर्क उनके मानसिक विकास और सीखने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है। गर्भावस्था के दौरान भी लेड का संपर्क मां और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
पुराने घरों की दीवारों पर लगा पेंट अगर उखड़ रहा हो या उसे रगड़कर हटाया जा रहा हो, तो उससे निकलने वाली धूल में लेड हो सकता है। ऐसी धूल हाथों, कपड़ों और खाने-पीने की चीजों के जरिए शरीर में पहुंच सकती है। इसलिए पुरानी पेंट की परत हटाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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लेड-फ्री पेंट कैसे चुनें?
पेंट खरीदते समय केवल रंग, चमक और कीमत न देखें। पैकेट या डिब्बे पर दी गई जानकारी ध्यान से पढ़ें। ऐसा पेंट चुनें जिस पर लेड-फ्री होने का स्पष्ट उल्लेख हो और जो संबंधित सुरक्षा मानकों का पालन करता हो। जरूरत पड़ने पर निर्माता से इसकी जानकारी मांगें।
कम गंध वाले या लो-वीओसी (Low-VOC) पेंट भी एक विकल्प हो सकते हैं। वीओसी यानी वाष्पशील कार्बनिक यौगिक कुछ पेंट से निकलने वाले ऐसे रसायन हैं, जो हवा की गुणवत्ता प्रभावित कर सकते हैं।

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दिवाली पर घर की पुताई कराते समय बरतें ये 19 सावधानियां
| क्र. | सावधानी | क्या करें और क्यों जरूरी है? |
|---|---|---|
| 1 | लेड-फ्री पेंट चुनें | पेंट खरीदने से पहले लेबल देखें और सुनिश्चित करें कि उत्पाद में लेड न होने की जानकारी स्पष्ट हो। |
| 2 | कम वीओसी वाला पेंट चुनें | जहां संभव हो, कम वीओसी वाले पेंट को प्राथमिकता दें। इससे पेंट से निकलने वाले कुछ हानिकारक रसायनों का संपर्क कम करने में मदद मिल सकती है। |
| 3 | पेंट के निर्देश पढ़ें | इस्तेमाल से पहले डिब्बे पर लिखी सावधानियां, लगाने का तरीका, सूखने का समय और सुरक्षा संबंधी निर्देश पढ़ें। |
| 4 | घर में हवा का आवागमन रखें | पुताई के दौरान खिड़कियां और दरवाजे खोलें, ताकि ताजी हवा आती रहे और पेंट की वाष्प बाहर निकल सके। |
| 5 | बच्चों को पुताई वाली जगह से दूर रखें | बच्चों को गीली दीवारों, पेंट के डिब्बों, ब्रश और उखड़े हुए पेंट की धूल से दूर रखें। |
| 6 | गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा का ध्यान रखें | गर्भवती महिलाओं को पेंट की तेज गंध और धूल के संपर्क से बचना चाहिए। जरूरत हो तो पुताई के दौरान दूसरी जगह रहना बेहतर है। |
| 7 | बुजुर्गों और सांस के मरीजों को दूर रखें | अस्थमा या सांस की अन्य समस्या वाले लोगों को पेंट की गंध और धूल से परेशानी बढ़ सकती है। उन्हें पुताई वाले कमरे से दूर रखें। |
| 8 | पुताई के दौरान कमरे में न सोएं | ताजा पेंट किए कमरे में तब तक न सोएं, जब तक पेंट सूख न जाए और पर्याप्त हवा का आवागमन न हो जाए। उत्पाद के निर्देशों का पालन करें। |
| 9 | पुराने पेंट को सावधानी से हटाएं | पुरानी दीवारों की पपड़ी या पेंट को सूखा रगड़कर हटाने से धूल फैल सकती है। लेड होने की आशंका हो तो खुद से खुरचने या घिसने के बजाय प्रशिक्षित पेशेवर की मदद लें। |
| 10 | काम करने वाला व्यक्ति सुरक्षा उपकरण पहने | पुताई करने वाला व्यक्ति जरूरत के अनुसार दस्ताने, आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा और उपयुक्त सुरक्षा उपकरण इस्तेमाल करे। |
| 11 | साधारण मास्क को हर समस्या का समाधान न मानें | कपड़े या साधारण सर्जिकल मास्क कई तरह की रासायनिक वाष्प से सुरक्षा नहीं देते। किस तरह का सुरक्षा उपकरण जरूरी है, यह पेंट और काम की प्रकृति पर निर्भर करता है। |
| 12 | खाने-पीने की चीजें ढककर रखें | पुताई वाले कमरे में खुला खाना, पानी, बर्तन और बच्चों की खाने-पीने की चीजें न रखें। |
| 13 | फर्श और फर्नीचर को ढकें | पुताई शुरू होने से पहले फर्नीचर और फर्श को ढक दें, ताकि उन पर पेंट की बूंदें और धूल जमा न हो। |
| 14 | पेंट के डिब्बे बंद रखें | इस्तेमाल के बाद डिब्बों के ढक्कन ठीक से बंद करें। पेंट को बच्चों की पहुंच से दूर रखें। |
| 15 | पेंट को नाली में न बहाएं | बचे हुए पेंट और रसायनों को नाली या खुले स्थान पर न फेंकें। स्थानीय नियमों के अनुसार उनका सुरक्षित निपटान करें। |
| 16 | पेंट की गंध छिपाने के लिए खुशबू का इस्तेमाल न करें | रूम फ्रेशनर या अगरबत्ती से गंध दबाने के बजाय ताजी हवा का इंतजाम करें। अतिरिक्त सुगंध भी कुछ लोगों में जलन या सांस की परेशानी बढ़ा सकती है। |
| 17 | गीले पेंट को हाथ न लगाएं | बच्चों और पालतू जानवरों को गीली दीवारों से दूर रखें। त्वचा पर पेंट लग जाए तो उत्पाद के निर्देशों के अनुसार साफ करें। |
| 18 | बिजली और आग से जुड़ी सावधानी रखें | ज्वलनशील सॉल्वेंट वाले पेंट के पास धूम्रपान, खुली लौ या चिंगारी से बचें। बिजली के उपकरणों और तारों के आसपास पुताई सावधानी से कराएं। |
| 19 | लक्षण दिखें तो तुरंत जगह छोड़ें | पेंट की गंध से सिरदर्द, चक्कर, आंखों में तेज जलन या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत ताजी हवा में जाएं। गंभीर या लगातार लक्षण होने पर चिकित्सकीय मदद लें। |
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पुताई के बाद घर में कब लौटना सुरक्षित है?
पेंट सूखने का समय उसके प्रकार, कमरे के तापमान, नमी और हवा के आवागमन पर निर्भर करता है। इसलिए सभी पेंट के लिए एक ही समय तय नहीं किया जा सकता। डिब्बे पर दिए गए निर्देशों का पालन करें और कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखें।
सिर्फ दीवार छूने पर सूखी लगने का मतलब यह नहीं है कि पेंट से निकलने वाली सभी वाष्प खत्म हो गई हैं। पेंट की गंध बनी हुई हो तो कमरे में हवा का आवागमन बढ़ाएं और वहां लंबे समय तक रहने या सोने से बचें। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और सांस की बीमारी वाले लोगों के मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतें।

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पेंट की गंध से परेशानी हो तो क्या करें?
पेंट की गंध के संपर्क में आने के बाद कुछ लोगों को सिरदर्द, आंखों या गले में जलन, मतली और चक्कर जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में सबसे पहले उस जगह से बाहर निकलकर ताजी हवा में जाएं। आंखों या त्वचा पर पेंट लग गया हो, तो उत्पाद के निर्देशों के अनुसार प्रभावित हिस्से को साफ करें।
अगर सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, भ्रम या गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण हल्के होने के बावजूद लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लें। दिवाली पर साफ-सुथरा और नया दिखने वाला घर हर किसी को अच्छा लगता है, लेकिन सजावट के चक्कर में परिवार की सेहत को जोखिम में डालना ठीक नहीं है।
सही पेंट चुनना, घर में हवा का आवागमन बनाए रखना और बच्चों व बुजुर्गों को पुताई वाली जगह से दूर रखना जैसी छोटी सावधानियां काफी मददगार हो सकती हैं।





