ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार की उम्मीदों पर संकट? गाजा और ईरान की जंग बनी बड़ी चुनौती

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में खुद को दुनिया के संघर्ष खत्म कराने वाले नेता के तौर पर पेश किया है, लेकिन गाजा और ईरान में जारी संकट उनकी इस छवि पर सवाल खड़े कर रहा है। 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार पाने की उनकी कोशिश के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये संघर्ष उनकी दावेदारी को कमजोर कर सकते हैं।

Palak Gupta

22 अगस्त 2026

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ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार की उम्मीदों पर संकट? गाजा और ईरान की जंग बनी बड़ी चुनौती

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार पाने के बेहद इच्छुक हैं, वही पुरस्कार जो उनके धुर विरोधी बराक ओबामा को मिला था। ट्रंप को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाए यह उनका सबसे बड़ा सपना है।

जब 2025 में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को यह पुरस्कार मिला, तो उन्होंने इसे ट्रंप को देने की पेशकश की, जिसे ट्रंप ने सहर्ष स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन वह इस पुरस्कार को आधारिक रूप से पाना चाहते थे। अमेरिकी सांसद एना पॉलिना लूना ने गाजा में इजरायल और हमास के बीच संघर्ष खत्म कराने में ट्रंप की भूमिका का हवाला देते हुए उनका नाम नोबेल समिति के सामने रखा था।

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ट्रंप को ऐसा लगा था कि अगर वह रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध विराम के माध्यम से समझौता करा देंगे तो उन्हें यह नोबल प्राइस मिल जायेगा लेकिन यूक्रेन और रूस के बीच लड़ाई लम्बी खींचती चली गई। इसके अलावा हाल के वैश्विक तनाव को देख ट्रंप को यह पुरस्कार पाना और भी ज्यादा मुश्किल लग रहा है, क्योंकि वह अब खुद ईरान के साथ शत्रुता निभाने में जुट गए हैं।

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गाजा में शांति योजना अब भी अटकी हुई

गाजा ट्रंप की शांति नीति के लिए सबसे बड़ी परीक्षा बना हुआ है। अमेरिकी प्रशासन ने गाजा में युद्ध खत्म कराने के लिए एक विस्तृत योजना आगे बढ़ाई है। इसका अहम हिस्सा हमास का हथियार छोड़ना और उसके बाद इजरायली सेना की वापसी से जुड़ा है। जुलाई में ट्रंप ने दावा किया था कि उनके ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के जरिए गाजा में हमास और इजरायल में शांति समझौता हो गया है। लेकिन जमीन पर स्थिति अभी पूरी तरह नहीं बदली है।

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अगस्त में ट्रंप के दूत और उनके दामाद जेरेड कुशनर ने इजरायल और हमास के नेताओं के साथ बातचीत की, मगर कोई बड़ा समझौता नहीं हो सका। इजरायल की मांग है कि हमास पहले पूरी तरह हथियार छोड़े, जबकि हमास चाहता है कि इजरायल पहले हमले रोके और अपनी सेना पीछे हटाए।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप एक समय पर एक ऐसे व्यक्ति थे जो युद्ध से काफी दूर भागते थे और उन्होंने युद्ध में न फसने का भी वादा किया था लेकिन वहीं आज तीन ऐसे संघर्षों में फंसे हुए है। उन्हें लगा कि इसका सबसे अच्छा तरीका यह होगा कि गाजा के 20 लाख लोगों को किसी अरब देश में सुरक्षित रूप से बसा दिया जाए और गाजा पट्टी को फ्रांस के ‘रिविएरा’ की तर्ज पर अमीरों के लिए एक हॉलिडे रिसॉर्ट में बदल दिया जाए।

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ईरान का मामला ट्रंप के लिए गाजा से भी ज्यादा पेचीदा हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, सैन्य कार्रवाई और बातचीत की कोशिशों के बीच लगातार उतार-चढ़ाव रहा है। कभी बातचीत की उम्मीद दिखाई देती है तो कुछ ही समय बाद सैन्य तनाव फिर बढ़ जाता है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने भी 17 अगस्त को ट्रंप से ईरान के साथ बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की थी। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद की पेशकश भी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस बातचीत मकसद गाजा और पास के क्षेत्रीय इलाकों की सुरक्षा से जुड़ा था।

लेकिन इस बार भी लगता है कि ट्रंप ईरान, इजरायल और अमेरिका के हितों के बारे में ही सोचते रह जायेंगे। यहीं ट्रंप की सबसे बड़ी मुश्किल है। 2025 में भी नोबेल पुरस्कार को लेकर ट्रंप की दावेदारी चर्चा में रही थी, लेकिन उस साल पुरस्कार उन्हें नहीं मिला।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.

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