मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का पलटवार सामने आया है। हाल ही में जहां युद्ध को टालने की बात हो रही थी उसी के बीच एक बार फिर से तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
बता दें कि ईरान द्वारा किया गया हमला अमेरिका के ईरान के लारक द्वीप पर किए गए हमले के बाद किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के इस हमले को पलटवार बताया जा रहा है। दरअसल यह हमला ईरान ने सूझ-बूझ और प्लानिंग के साथ किया है। पहले ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों का पता लगाया फिर बैलिस्टिक मिसाइल दागी। हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई आठ मिसाइलों को रोक लिया। ईरान ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी लगातार क्षेत्र में अपने सैनिकों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा रहे हैं।
यह भी पढ़ें: नेपाल पर फिर मंडराया भीषण बाढ़ का खतरा, वैज्ञानिकों ने दूसरे ‘जलप्रलय’ को लेकर किया आगाह
यह भी पढ़ें: पिछली चेतावनी नहीं माने थे पुतिन, अब CIA चीफ की अचानक मॉस्को यात्रा ने बढ़ाया सस्पेंस
ईरानी मीडिया ने किया दावा
जॉर्डन के सैन्य ठिकाने पर हुए हमले की पुष्टि ईरान के सरकारी मीडिया ने की उन्होंने बताया कि हाल ही में हुए अमेरिकी हमले के कारण ईरान के नागरिकों को और ईरानी लड़ाकों को काफी नुकसान पंहुचा है। इस बात का बदला लेने के लिए ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार की है।
इसके अलावा फॉक्स न्यूज के पत्रकार ट्रे यिंगस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हो रहे हमलों को अमेरिका बेहद गंभीरता से ले रहा है। अमेरिकी सैनिकों की सतर्कता दोगुनी हो गई है और आर्मी आगे होने वाले खतरों को लेकर एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर रही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एयर डिफेंस संभाल रहे सैनिकों पर भरोसा जताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के बाद अमेरिकी जवानों के लिए दुआ करने की अपील की है।
यह भी पढ़ें: पीएम मोदी SCO समिट में होंगे शामिल, उज्बेकिस्तान-किर्गिस्तान दौरे में क्या होगा खास?
ईरान के लारक द्वीप पर अमेरिका ने हमला क्यों किया?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य से हुई। यह समुद्री रास्ता ईरान और ओमान के बीच है और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और दूसरी ऊर्जा सामग्री दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचती है। पिछले कई महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
अमेरिका के मुताबिक, उसकी सेना ने हाल में इस रास्ते में मौजूद समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाया था, ताकि व्यापारिक जहाज सुरक्षित तरीके से गुजर सकें। इसके बाद अमेरिकी सेना को जानकारी मिली कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड फिर से ऐसे रॉकेट इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है जिनके जरिए समुद्र में बारूदी सुरंगें पहुंचाई जा सकती हैं। अमेरिका ने इसी खतरे को रोकने के लिए लारक द्वीप पर मौजूद दो लॉन्चरों को निशाना बनाया।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि होर्मुज पर हुए हमले का कारण किसी तरह की कार्रवाई या किसी को नुकसान पहुंचना नहीं था बल्कि आने वाले बड़े खतरे को रोकने के लिए था। हालांकि ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए बयान को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और अपनी तरफ से कहा कि अमेरिकी हमले में उसके सैनिकों और नागरिकों के मारे जाने तथा घायल होने की खबर है।





