नेपाल में एक बार फिर जलप्रलय की आशंका जताई जा रही है। मूसलाधार बारिश और भीषण बाढ़ की चपेट में आया कई है कठिन परिस्थितियों से है गुज़र रहा है। हाल ही में नेपाल की भोटे कोशी नदी का जल स्तर अपनी सीमा से ऊंचे स्तर पर बह रहा है। उफान पर आई नदी के कारण अचानक से बाढ़ आ गई जिसने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया है।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए वैज्ञानिकों ने नेपाल में दूसरी बाढ़ की चेतावनी दी है जिसमें कहा गया है कि ऊपरी हिस्से में अब भी एक वाटर ब्लॉकेज मौजूद है। बता दें कि इस फ्लड के कारण कई लोगों की जानें भी चली गई है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि नेपाल-चीन बॉर्डर के पास ऊपरी इलाके में अभी भी रुकावट बनी हुई है, जिससे फिर से जलप्रलय आ सकता है।
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अभी तक 150 लोगो की चली गई है जान
नेपाल के रसुवा क्षेत्र में बोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ के कारण करीब 165 लोगों की जानें चली गई हैं और 750 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों से यातायात और संपर्क का साधन भी टूट चुका है। सरकारी आकड़ों के अनुसार अभी तक 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बह गए है।
प्रभावित क्षेत्रों पर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया है कि भोटेकोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और सहायता सामग्री पहुंचाने का अभियान तेज कर दिया गया है। सुबह 6:30 बजे से हेलीकॉप्टर उड़ानें शुरू हुईं और अब तक 15 से ज्यादा उड़ानें हो चुकी हैं। नेपाली सेना ने रसुवा के टिमुरे से 116 लोगों को सुरक्षित निकाला, जिनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं। एक सुरंग में फंसे 7 नेपाली नागरिकों को भी बाहर निकाला गया। प्रभावित इलाकों में जनरेटर, मोबाइल टावर, चिकित्सा सामग्री, टेंट और मशीनें भेजी जा रही हैं।
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वैज्ञानिकों ने क्यों दी चेतावनी-खतरा टला नहीं है
नेपाल में भीषण प्रलय की चेतावनी ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट’ (ICIMOD) ने दी है। काठमांडू में स्थित यह अंतर-सरकारी संस्था हिंदू-कुश हिमालय क्षेत्र के आठ देशों – भारत, नेपाल, भूटान, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और अफगानिस्तान- के लिए काम करती है। संस्था ने एक विस्तृत बयान जारी करते हुए बताया कि 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ की वजह तलाशने के लिए अधिकारी और वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश में जुट गए कि इस आपदा का कारण क्या था और क्या आगे और भी खतरा हो सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बाढ़ की स्थिति बुधवार सुबह 9 बजे शुरू हुई जब भोटेकोशी नदी का स्तर सीमा से पार हो गया इसके बाद बाढ़ का पानी भोटे कोशी से निकलकर त्रिशूली नदी में जा मिला। बताया जा रहा है कि मात्र आधे घंटे में त्रिशूली नदी का बहाव 9 मीटर तक बढ़ गया। इसके अलावा मालेखु नदी का भी स्तर सात मीटर अधिक बढ़ गया था। पानी का स्तर इतनी तेज़ी से बढ़ना इस बात का संकेत है कि ऊपर की ओर से भारी मात्रा में पानी और मलबा अचानक नीचे आया था।
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ICIMOD में आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ शाश्वत सान्याल ने कहा, “लेंदे खोला में चौदह महीनों में दो बार बाढ़ आई है।बर्फ के हिमस्खलन के कारण नदी का बहाव रुका और अचानक नीचे की ओर पानी का तेज बहाव हुआ। अभी इसकी पुष्टि होनी बाकी है।”





