समुद्र के नीचे तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार मौजूद है जैसे-जैसे जमीन पर आसानी से मिलने वाले तेल के भंडार काम हो रहे हैं वैसे-वैसे दुनिया के कई देश समुद्र के नीचे तेल और गैस की खोज में जोर दे रहे हैं।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल सामने आता है कि अगर किसी देश के समुद्री क्षेत्र के नीचे तेलिया गैस मिल जाए तो उसे पर अधिकार किसका होता है क्या समुद्र के नीचे मौजूद हर संसाधन उसे देश का होता है जिसके पास समुद्र का तट है इसका जवाब अंतरराष्ट्रीय समुद्र कानून से मिलता है।
करोड़ों साल में बनता है तेल और गैस
कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस अचानक नहीं बांटे उनके बनाने की प्रक्रिया करोड़ों साल पुरानी होती है समुद्र में रहने वाले छोटे जीव शैवाल और दूसरे जैविक पदार्थ करने के बाद समुद्र की तलहटी में जमा हो जाते हैं जिनके ऊपर मिट्टी और चट्टानों के कई परते बनती है।
लंबे समय तक दबाव और गर्मी के कारण इन जैविक पदार्थ में रासायनिक बदलाव हुए और धीरे-धीरे तेल तथा गैस का निर्माण हुआ। आम लोगों के बीच यह धारणा है कि पेट्रोलियम डायनासोर के अवशेषों से बना है लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह सही नहीं माना जाता तेल और गैस के निर्माण में मुख्य भूमिका समुद्री सूक्ष्म जीवों और दूसरे जैविक पदार्थ की रही है।
समुद्र में तेल कैसे खोजा जाता है?
समुद्र के नीचे तेल और गैस खोजने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है सबसे पहले वैज्ञानिक समुद्र की सतह और उसके नीचे मौजूद चट्टानों की संरचना का अध्ययन करते हैं इसके लिए सर्वे जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है इसे यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि समुद्र के नीचे किस तरह की किस तरीके की संरचना रचनाएं नीचे मौजूद है और वहां तेल या गैस मिलने की संभावना कितनी है।
इसके बाद संभावित क्षेत्र में ड्रिलिंग की जाती है समुद्र में ड्रिलिंग जमीन की तुलना में काफी कठिन और महंगी होती है। गहरी समुद्र में काम करने के लिए आध्यात्मिक तकनीक और बड़ी लागत की जरूरत होती है।
EEZ क्या होता है?
समुद्र के नीचे तेल और गैस के अधिकार को समझने के लिए महत्वपूर्ण शब्द है एक्सक्लूसिव इकोनामिक जोन संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून यानी इसके अनुसार तटीय देशों को अपनी बेसलाइन से 200 नॉटिकल मील तक के विशेष आर्थिक क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों की खोज और उनके इस्तेमाल पर संप्रभु अधिकार प्राप्त होते हैं।
200 नॉटिकल मील करीब 370 किलोमीटर के बराबर होता है इसका मतलब यह है कि देश के इकोनामिक एक्सक्लूसिव जोन में समुद्री पानी समुद्र की तलहटी और उसके नीचे मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के आर्थिक इस्तेमाल पर उसे तथ्य देश के विदेश कानून के मुताबिक उनका अधिकार होता है।
क्या अधिकार 200 नॉटिकल मील के बाद खत्म हो जाता है?
हर मामले में ऐसा नहीं होता समुद्र की तलहटी से जुड़े अधिकारों के लिए महाद्वीप शेल्फ का नियम भी महत्वपूर्ण है इसके तहत किसी तटीय देश का महाद्वीप शेल्फ कम से कम 200 नॉटिकल मील तक हो सकता है और कुछ भौगोलिक परिस्थितियों में इसके बाहरी सीमा 200 नॉटिकल मील के आगे भी निर्धारित की जा सकती है इसके लिए निर्धारित वैज्ञानिकों को कानून मां को को पूरा करना पड़ता है।
महाद्वीपीय सेल्फ पर 30 देश को समुद्र की तलहटी और उसके नीचे मौजूद प्राकृतिक संसाधनों की खोज तथा उनका दोहन करने के विशेष अधिकार मिलते हैं। यहां तक कि यदि देश खुद इन संसाधनों को नहीं निकलता तब भी कोई दूसरा देश इसकी अनुमति के बिना वहां ड्रिलिंग नहीं कर सकता।
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अगर समुद्र अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में हो तो?
200 नॉटिकल मील से आगे समुद्र का हर हिस्सा अपने आप किसी देश का नहीं हो सकता खुले समुद्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री तल क्षेत्र में खनिज संसाधनों से जुड़ी गतिविधियों को इंटरनेशनल सी बेड अथॉरिटी यानी ISA के अंतरराष्ट्रीय ढांचे के तहत नियंत्रित किया जाता है।
इसलिए समुद्र के नीचे तेल या गैस मिलने का मतलब यह नहीं की जो देश सबसे पहले उसे खोज लगा वही उसका मालिक बन जाएगा असली अधिकार इस बात पर निर्भर करता है कि संसाधन समुद्र के किस क्षेत्र में स्थित है और उसे क्षेत्र पर अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार किस देश के अधिकार लागू होते हैं।
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भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है समुद्र का तेल?
भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देश के लिए समुद्र के नीचे तेल और गैस की खोज काफी महत्वपूर्ण हो सकती है यदि देश के समुद्री क्षेत्र में बड़े और व्यावसायिक रूप से उपयोगी भंडार मिलते हैं और उनका उत्पादन का पूर्वक किया जाता है तो इससे घरेलू ऊर्जा आपूर्ति बढ़ सकती है और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि समुद्र से तेल और गैस निकलना आसान नहीं है गहरे पानी में ड्रिलिंग के लिए महंगी तकनीक विशेषज्ञ और पर्यावरण सुरक्षा उपयोग की जरूरत होती है इसलिए किसी संभावित भंडार की खोज और उसके व्यावसायिक उत्पादन के बीच काफी अंतर हो सकता है।





