बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर सियासी हलचल तेज होती दिख रही है। बताया जा रहा है कि तख्तापलट, निर्वासन, मौत की सजा और राजनीतिक प्रतिबंधों के बावजूद शेख हसीना ने साफ कर दिया है कि वह बांग्लादेश लौटेंगी।
पिछले कुछ सालों में तख्तापलट के कारण हसीना से उनकी सत्ता छिन गई, उन्हें अपना देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा यहां तक कि उन्हें कानून ने मौत की सजा तक सुना दी थी लेकिन तब भी शेख हसीना दो साल बाद वापसी क्यों लौट रही है ? यह सवाल कई लोगों के दिमाग में चल रहा होगा।
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बता दें कि शेख हसीना का वापस आने का संकल्प इतने पक्षपात के बाद भी नहीं कमजोर पड़ा। 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया के कार्यक्रम में ऑडियो संदेश के जरिए पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, “मैं अपने लोगों के पास वापस लौटूंगी। मैं पहले भी कई बार गिरफ्तार हो चुकी हूं, मैं पहले भी वापस लौटी हूं। मेरा लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्ष परंपरा में अटूट भरोसा है। ”
बताया जा रहा है कि शेख हसीना इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के खत्म होते ही बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय पहुंची और बयान जारी करते हुए ठेस पहुंचाने वाले शब्दों का प्रयोग किया जिससे यह साफ साबित होता है कि शेख हसीना की निश्चित वापसी की खबर सुनकर बीएनपी अब पूरी तरह घबरा गई है।
शेख हसीना ने अपने विरोधियों को ऐसे शब्द कहे जिससे उन्हें सीधी मानहानि महसूस हुई। उन्होंने कहा कि वे मुझे मनगढ़ंत मामलों में फंसाने की साजिश कर सकते हैं, लेकिन डर मेरे लोगों के प्रति मेरे फर्ज, मेरी जिंदगी या उससे आगे के बारे में फैसला नहीं कर सकता। इस बयान के तहत यह साफ दिख रहा था कि शेख हसीना को किसी प्रकार का भय नहीं है।
पिछले दो सालों में शेख हसीना पर लगातार कानूनी कार्रवाई की गई यहां तक कि उनकी लोकप्रिय पार्टी अवामी लीग पर असंवैधानिक बैन लगाया गया इसके बाद भी उनकी बांग्लादेश वापसी की हठ यह साफ बताता है कि कोई भी ताकत शेख हसीना को बांग्लादेश की राजनीति से अप्रासंगिक नहीं बना सकती।
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आखिर क्यों कर दिया था उन्हें बॉयकॉट
शेख हसीना के सार्वजनिक और राजनीतिक बहिष्कार (बॉयकॉट) की शुरुआत 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद हुई। सरकारी नौकरियों में कोटा के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन ने जल्द ही सरकार विरोधी रूप ले लिया। आंदोलन को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई, जिसके बाद देशभर में सरकार के खिलाफ गुस्सा फैल गया।
बढ़ते विरोध के बीच 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर भारत आना पड़ा। इसके बाद बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनी, आवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई और शेख हसीना के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध समेत कई मामलों की जांच शुरू हुई।
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क्या पूरी तरह खत्म हो गया उनका प्रभाव?
प्रतिबंधों के बावजूद शेख हसीना और उनकी पार्टी आवामी लीग का एक बड़ा समर्थक वर्ग अब भी मौजूद है जो उन्हें खुले दिन से स्वीकार करता है। हाल ही में उन्होंने भारत से कहा कि उनकी पार्टी पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए और उन्होंने बांग्लादेश लौटने की इच्छा भी जताई।
हसीना के भारत आने के बाद से बांग्लादेश में पिछले लगभग दो वर्षों तक पूरी तरह अराजकता और अव्यवस्था का माहौल रहा। इसमें से करीब अठारह महीने तक जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश जैसा कट्टरपंथी संगठन पूरी तरह सत्ता के केंद्र में रहा।
बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल अभी भी संवेदनशील बना हुआ है। यदि आने वाले समय में आम चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो शेख हसीना और अवामी लीग की भूमिका एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकती है।





