दशहरे का मेला हो और डीजे, ढोल-नगाड़ों या लाउडस्पीकर की आवाज न हो, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। लोग दोस्तों और परिवार के साथ घूमने निकलते हैं, स्टेज के पास रुककर कार्यक्रम देखते हैं और तेज संगीत का आनंद लेते हैं। लेकिन इस दौरान एक बात अक्सर नजरअंदाज हो जाती है आवाज कितनी तेज है और हम कितनी देर तक उसके संपर्क में हैं।
बहुत तेज आवाज में कुछ समय बिताने के बाद कानों में सीटी या घंटी जैसी आवाज सुनाई देना, कान बंद-से लगना या बातचीत साफ सुनने में परेशानी होना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। लगातार या बार-बार तेज शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंच सकता है। अच्छी बात यह है कि कुछ छोटी सावधानियां अपनाकर इस खतरे को कम किया जा सकता है।
साल 2025 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, लाउडस्पीकर की तेज आवाज से हाई BP, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। ऐसे में लाउडस्पीकर से जुड़ी सावधानियों को समझना जरूरी है।
| साल | जगह | घटना |
|---|---|---|
| मई 2022 | उज्जैन, मध्य प्रदेश | बारात में डीजे के पास नाचते युवक की मौत। |
| मार्च 2023 | सीतामढ़ी, बिहार | वरमाला के बाद दूल्हे की मौत। |
| सितंबर 2023 | सांगली, महाराष्ट्र | गणेश विसर्जन के दौरान दो युवकों की मौत। |
| फरवरी 2024 | राजरकेला, ओडिशा | विसर्जन के दौरान 50 वर्षीय प्रौढ़ की मौत। |
| अक्टूबर 2024 | भोपाल, मध्य प्रदेश | डीजे पर नाचते हुए 13 वर्षीय किशोर की मौत। |
| जून 2025 | शिवहर, बिहार | शादी में तेज डीजे की आवाज से 14 वर्षीय किशोरी की मौत। |
| दिसंबर 2025 | मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश | डीजे की आवाज से 15 वर्षीय छात्रा की मौत। |
| जून 2026 | बलांगीर, ओडिशा | 47 वर्षीय महिला की मौत। |
| सितंबर 2026 | बलरामपुर, उत्तर प्रदेश | जुलूस में डीजे की आवाज से 7 वर्षीय बच्ची की मौत। |
डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली के मुताबिक, तेज आवाज का लंबे समय तक संपर्क में रहना न केवल सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है, बल्कि तनाव, सिरदर्द और नींद से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ा सकता है।

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तेज आवाज कानों को कैसे नुकसान पहुंचाती है?
हमारे कान के अंदर बेहद बारीक संवेदी कोशिकाएं होती हैं, जो आवाज को पहचानने और उसे दिमाग तक पहुंचाने की प्रक्रिया में मदद करती हैं। बहुत तेज आवाज इन कोशिकाओं और सुनने से जुड़ी संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। एक बार गंभीर नुकसान हो जाए, तो सुनने की क्षमता पूरी तरह वापस आना मुश्किल हो सकता है।
आवाज का असर उसकी तीव्रता और उसके संपर्क में बिताए गए समय पर निर्भर करता है। आवाज जितनी तेज होगी, सुरक्षित रहने का समय उतना ही कम हो सकता है। इसलिए मेले में केवल कुछ मिनट के लिए लाउडस्पीकर के बिल्कुल पास खड़े रहना भी जोखिम बढ़ा सकता है, खासकर अगर आवाज बहुत तेज हो।
कानों को सुरक्षित रखने के 7 आसान टिप्स
- लाउडस्पीकर से दूरी बनाकर रखें
मेले में अगर डीजे या लाउडस्पीकर बहुत तेज बज रहा है, तो उसके ठीक सामने या बिल्कुल पास खड़े होने से बचें। संभव हो तो मंच और स्पीकर से दूर ऐसी जगह खड़े हों, जहां आवाज अपेक्षाकृत कम हो। दूरी बढ़ाने से कानों तक पहुंचने वाली आवाज का स्तर कम हो सकता है।
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- तेज आवाज के बीच लंबे समय तक न रहें
मेले में घूमते समय लगातार तेज संगीत के बीच खड़े रहने के बजाय बीच-बीच में शांत जगह पर चले जाएं। इससे कानों को शोर से दूर रहने का समय मिलेगा। अगर आवाज इतनी तेज है कि पास खड़े व्यक्ति से बात करने के लिए चिल्लाना पड़ रहा है, तो इसे वहां से दूर जाने का संकेत मानें।
- जरूरत पड़ने पर ईयरप्लग इस्तेमाल करें
अगर आपको किसी ऐसे कार्यक्रम में रहना है, जहां आवाज बहुत तेज है, तो अच्छी गुणवत्ता वाले ईयरप्लग इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये कानों तक पहुंचने वाली आवाज को कम करने में मदद करते हैं। ध्यान रखें कि सामान्य ईयरफोन लगाकर संगीत सुनना शोर से बचाव का विकल्प नहीं है। ईयरप्लग का इस्तेमाल भी लाउडस्पीकर के बिल्कुल पास खड़े रहने की भरपाई नहीं करता।
- बच्चों को स्पीकर के पास न जाने दें
बच्चों को मेले में तेज संगीत और डीजे के पास खड़ा करने से बचें। उनका ध्यान अक्सर आवाज की तीव्रता पर नहीं जाता और वे लंबे समय तक उसी जगह रुके रह सकते हैं। बच्चों को स्पीकर से दूर रखें और जरूरत हो तो उनके लिए सही आकार के ईयरमफ या अन्य उपयुक्त श्रवण सुरक्षा का इस्तेमाल करें।
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- कानों में घंटी बजे तो शोर से दूर हो जाएं
तेज आवाज के बाद कानों में सीटी, घंटी या भनभनाहट सुनाई देना टिनिटस कहलाता है। अगर ऐसा महसूस हो, तो तुरंत शांत जगह पर चले जाएं और कानों को तेज आवाज से आराम दें। इसे सामान्य मानकर दोबारा तेज संगीत के बीच न लौटें। यदि आवाज बनी रहती है या बार-बार ऐसा होता है, तो ईएनटी विशेषज्ञ से सलाह लें।
- तेज आवाज में ईयरफोन लगाकर संगीत न सुनें
मेले में आसपास का शोर दबाने के लिए ईयरफोन की आवाज बढ़ाना कानों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। तेज लाउडस्पीकर के बीच ईयरफोन लगाकर संगीत सुनने से बचें। अगर फोन पर बात करनी जरूरी हो, तो संभव हो तो शांत जगह पर जाकर बात करें।
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- सुनने में परेशानी हो तो इसे नजरअंदाज न करें
अगर मेले से लौटने के बाद कान बंद लगें, आवाज धीमी सुनाई दे या बातचीत समझने में परेशानी हो, तो इसे केवल थकान समझकर नजरअंदाज न करें। अचानक सुनाई कम देना, खासकर एक कान में, तुरंत चिकित्सकीय जांच की जरूरत वाला लक्षण है। ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द ईएनटी विशेषज्ञ या आपात चिकित्सा सेवा से संपर्क करें।
तेज संगीत और लाउडस्पीकर से पूरी तरह बचना हर जगह संभव नहीं होता, लेकिन उनके पास खड़े रहने से बचना, शोर के बीच समय कम करना और जरूरत पड़ने पर ईयरप्लग इस्तेमाल करना जोखिम घटा सकता है।





