क्या आप जानते हैं कि शरीर प्लेटलेट्स को लगातार बनाता रहता है, क्योंकि एक प्लेटलेट की औसत उम्र सिर्फ करीब 7 से 10 दिन होती है? ये छोटे-से रक्त कण शरीर में चोट लगने पर खून का थक्का बनाने और ज्यादा ब्लीडिंग रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं। प्लेटलेट्स कम होने के पीछे सिर्फ डेंगू ही जिम्मेदार नहीं होता।
विटामिन बी12 या फोलेट की कमी, कुछ दवाएं, संक्रमण, लिवर की बीमारी, बोन मैरो की समस्या और शरीर का प्लेटलेट्स को जरूरत से ज्यादा नष्ट करना भी इसकी वजह हो सकता है। यही कारण है कि प्लेटलेट्स कम होने पर केवल कोई खास फल या घरेलू नुस्खा खाने के बजाय पहले यह पता लगाना जरूरी है कि कमी की असली वजह क्या है।
जिस प्रकार गाडी को चलने के लिए तेल की जरूरत होती है और उससे ज्यादा गाडी को बिना किसी रुकावट से चलने के लिए इंजन ऑइल की जरूरत होती है उसी प्रकार हमारे शरीर में खून के अंदर प्लेटलेट्स की मात्रा का सही संतुलन होना हमारे शरीर को चलाने के लिए जरूरी होता है।
बता दें कि पश्चिम बंगाल में 18 सितंबर तक डेंगू के 5,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। वहीं, दिल्ली में डेंगू के मरीजों की संख्या 432 पर पहुंच चुकी है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई इलाकों से भी लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं। डेंगू के साथ जिस चीज का सबसे ज्यादा जिक्र होता है, वह है प्लेटलेट्स।
डेंगू इतना खतरनाक इसीलिए हैं क्योंकि इसमें प्लेटलेट्स की संख्या अचानक कम हो जाती है। यह संख्या अगर 20,000 से नीचे पहुंच जाए तो ब्लीडिंग शुरू हो सकती है और यहां तक कि मौत भी हो सकती है। इसी कारण प्लेटलेट्स काम होते ही डॉक्टर सबसे पहले अपना खान-पान बदलने को कहते है।
प्लेटलेट्स कम होते ही खाने पर ध्यान क्यों जरूरी है?
प्लेटलेट्स हमारे खून का एक जरूरी हिस्सा हैं। चोट लगने पर ये आपस में चिपककर खून बहना रोकने में मदद करते हैं। आम तौर पर वयस्कों में प्लेटलेट्स की संख्या 1.5 लाख से 4.5 लाख प्रति माइक्रोलिटर के बीच मानी जाती है। इससे कम संख्या को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया कहा जाता है। हालांकि सिर्फ रिपोर्ट में प्लेटलेट्स कम आने का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को एक जैसी समस्या या इलाज की जरूरत होगी। इसका कारण और व्यक्ति की स्थिति देखना जरूरी है।

प्लेटलेट्स और ब्लड हेल्थ के लिए डाइट में शामिल कर सकते हैं ये 10 फूड
- अनार
अनार को अक्सर प्लेटलेट्स बढ़ाने वाला फल बताया जाता है, लेकिन इसे प्लेटलेट्स बढ़ाने की दवा समझना सही नहीं है। फिर भी यह फल संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है। इसमें कई पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। बीमारी के दौरान अगर भूख कम हो तो थोड़ी मात्रा में ताजा अनार खाना आसान विकल्प हो सकता है।

- पपीता
पपीते में विटामिन और दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे सामान्य स्वस्थ डाइट में शामिल किया जा सकता है। हालांकि पपीते के पत्ते का रस पीने या पपीता खाने से प्लेटलेट्स निश्चित रूप से बढ़ेंगे, ऐसा दावा मजबूत मेडिकल इलाज का विकल्प नहीं है। अगर प्लेटलेट्स बहुत कम हैं या डेंगू है, तो डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।

- संतरा और दूसरे खट्टे फल
संतरा, मौसमी, नींबू जैसे फलों से विटामिन सी मिलता है। विटामिन सी शरीर में आयरन के अवशोषण में मदद करता है। इसलिए आयरन वाले खाने के साथ विटामिन सी से भरपूर फल लेना एक अच्छी डाइट आदत हो सकती है।

- आंवला
आंवला भी विटामिन सी का अच्छा स्रोत है और इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसे ताजा फल, कम चीनी वाले रूप या खाने के साथ लिया जा सकता है। बहुत ज्यादा चीनी वाला आंवला मुरब्बा रोजाना लेने से बचना बेहतर है।

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- पालक और हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियों से फोलेट, विटामिन और मिनरल मिलते हैं। फोलेट शरीर में नई कोशिकाएं बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए हरी सब्जियों को रोज के खाने में शामिल करना ब्लड हेल्थ के लिए अच्छा विकल्प है।

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- दाल और चना
मसूर, मूंग, चना, राजमा जैसी दालें प्रोटीन के साथ कई जरूरी पोषक तत्व देती हैं। बीमारी के दौरान शरीर को पर्याप्त पोषण देने के लिए दालों को हल्के और आसानी से पचने वाले तरीके से खाया जा सकता है।
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- अंडा
अंडा प्रोटीन और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्वों का स्रोत है। अगर आपको अंडे से कोई एलर्जी नहीं है और डॉक्टर ने इसे खाने से मना नहीं किया है, तो इसे संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है।
- दूध और दही
दूध और दही से प्रोटीन, कैल्शियम और कुछ दूसरे जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। अगर बीमारी के दौरान इन्हें आसानी से पचा पा रहे हैं, तो डाइट में शामिल किया जा सकता है। बहुत ज्यादा मीठे फ्लेवर्ड डेयरी उत्पादों की जगह सादा दही या सामान्य दूध बेहतर विकल्प हो सकता है।

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- मछली या चिकन
नॉन-वेज खाने वालों के लिए मछली और चिकन प्रोटीन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं। बीमारी के दौरान इन्हें बहुत ज्यादा तेल-मसाले में बनाने के बजाय हल्के तरीके से पकाकर खाना आसान रहता है।
- आयरन वाले फूड्स
आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी है। दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, चना और मांस जैसे खाद्य पदार्थ डाइट में आयरन देने में मदद कर सकते हैं। लेकिन बिना जांच के आयरन की गोलियां शुरू करना सही नहीं है, क्योंकि हर कम प्लेटलेट की वजह आयरन की कमी नहीं होती।
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इन लक्षणों में सिर्फ खाना बदलने पर निर्भर न रहें
अगर प्लेटलेट्स कम हैं और नाक या मसूड़ों से खून आ रहा है, शरीर पर लाल दाने या खून के निशान दिख रहे हैं, खून की उल्टी हो रही है, मल काला हो रहा है, लगातार उल्टी हो रही है या पेट में तेज दर्द है, तो तुरंत मेडिकल मदद लें। डेंगू में ये गंभीर स्थिति के चेतावनी संकेत हो सकते हैं।
सबसे जरूरी बात यही है कि प्लेटलेट्स की रिपोर्ट देखकर घबराने के बजाय उसके कारण को समझें। अच्छी डाइट शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद करती है, लेकिन कोई एक फल या घरेलू नुस्खा प्लेटलेट्स बढ़ाने का पक्का इलाज नहीं है।





