क्या आपको पता है इस पूरी दुनिया में 200 करोड़ से ज्यादा लोग चाय के बेशुमार लवर हैं। कुछ लोगों को तो खाने के बदले चाय दे दो तो वह उनसे भी खुश हैं। और सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि 100 करोड़ लोग कॉफी के दीवाने है। अब आप खुद ही सोचिए कि ठंडी का समय है और आपको चाय या गरम गरम कॉफी पीने का बहुत मन है तो आप कहीं टपरी पर गाड़ी रोककर गरम गरम चाय के लिए आर्डर देते हैं और आपको गरम चाय डिस्पोजेबल पेपर कप में दी जाती है। आपको लगता है कि पेपर कप तो सेफ और इकोफ्रेंडली है।
यह भी पढ़ें: रात में ईयरबड्स लगाकर सोने की आदत छोड़ें, जानें कानों को होने वाले नुकसान और 10 आसान उपाय
लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसे कप में गर्म चाय-कॉफी पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? पेपर कप में गर्म ड्रिंक डालने पर क्या होता है, इसे लेकर वैज्ञानिकों ने रिसर्च भी की है। क्या आपको पता है कि साल 2021 में ‘जर्नल ऑफ हेजार्डस मैटेरियल्स’ में प्रकाशित एक स्टडी में पेपर कप को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। रिसर्चर्स ने अलग-अलग कंपनियों के 5 पेपर कप लिए और उनमें गर्म पानी भरकर करीब 15 मिनट तक रखा।
जांच में पाया गया कि 100 मिलीलीटर गर्म पानी में औसतन करीब 25,000 माइक्रोप्लास्टिक कण पहुंच गए। इसके अलावा, कप की अंदरूनी प्लास्टिक परत में लेड, क्रोमियम और कैडमियम जैसी भारी धातुओं की मौजूदगी भी पाई गई। इससे यह सवाल उठता है कि लंबे समय तक गर्म चाय-कॉफी के लिए डिस्पोजेबल पेपर कप का लगातार इस्तेमाल कितना सुरक्षित है।
यह भी पढ़ें: बाराबंकी की फेमस मावे की मिठाई, स्वाद ऐसा कि बड़े-बड़े मिठाई प्रेमी भी हो जाएं दीवाने
आजकल पेपर कप क्यों बढ़ गए हैं?
पहले चाय-कॉफी के लिए ज्यादातर लोग कांच, स्टील या सिरेमिक के कप इस्तेमाल करते थे। लेकिन बाहर चाय-कॉफी बेचने वाले दुकानदारों, ऑफिस और फूड डिलीवरी के बढ़ते चलन के साथ डिस्पोजेबल कप का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। इन कपों को इस्तेमाल करने के बाद फेंक देना आसान होता है और सफाई की जरूरत भी नहीं पड़ती।
समस्या यह है कि पेपर कप को ऐसा बनाया जाता है कि उसमें गर्म चाय या कॉफी रखने के बावजूद कप गीले होकर जल्दी खराब न हो। इसके लिए कागज की अंदरूनी सतह पर एक पतली प्लास्टिक फिल्म लगाई जाती है। यही परत कप को पानी रोकने में मदद करती है। लेकिन जब इसी कप में बहुत गर्म पेय लंबे समय तक रखा जाता है, तो गर्मी और तरल के संपर्क से इस परत से कुछ पदार्थ निकलने की संभावना पर वैज्ञानिकों ने सवाल उठाए हैं।
| रिसर्च में क्या देखा गया | क्या सामने आया |
|---|---|
| पेपर कप | 5 अलग-अलग कंपनियों के कप की जांच की गई |
| गर्म पानी का तापमान | करीब 85–90 डिग्री सेल्सियस |
| पानी को कप में रखने का समय | 15 मिनट |
| पानी की मात्रा | 100 मिलीलीटर |
| माइक्रोप्लास्टिक | करीब 25,000 माइक्रोन आकार के कण पाए गए |
| दूसरे छोटे कण | सब-माइक्रोन कणों की मौजूदगी भी मिली |
| भारी धातुएं | सीसा, क्रोमियम और कैडमियम की मौजूदगी दर्ज हुई |
| अन्य पदार्थ | फ्लोराइड, क्लोराइड, सल्फेट और नाइट्रेट जैसे आयन भी पाए गए |
| जरूरी बात | इससे सीधे गंभीर बीमारी होने का दावा अभी साबित नहीं है |

यह भी पढ़ें: बात-बात पर गुस्सा, चीजें पटकना और परिवार का डरना, जानें गुस्सा कंट्रोल करने के सही तरीके
रोज-रोज पेपर कप से चाय पीने के नुकसान
1. माइक्रोप्लास्टिक का शरीर में जाना
गर्म चाय, कॉफी या सूप के संपर्क में आने पर कप की प्लास्टिक परत से माइक्रोप्लास्टिक निकल सकते हैं। इन्हें बार-बार निगलने से शरीर में इनके संपर्क की मात्रा बढ़ सकती है, हालांकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर अभी शोध जारी है।
2. प्लास्टिक की परत से रसायनों का रिसाव
गर्मी के कारण कप की अंदरूनी प्लास्टिक परत की संरचना प्रभावित हो सकती है। शोध में गर्म पानी में फ्लोराइड, क्लोराइड, सल्फेट और नाइट्रेट जैसे आयनों के पहुंचने की बात सामने आई।
3. भारी धातुओं का संपर्क
कुछ पेपर कप की अंदरूनी परत में सीसा, क्रोमियम और कैडमियम जैसी धातुएं पाई गईं। अध्ययन में गर्म पानी के संपर्क के दौरान इनके स्थानांतरित होने की संभावना देखी गई।
4. बहुत छोटे प्लास्टिक कणों का सेवन
अध्ययन में माइक्रोन आकार के कणों के अलावा उससे भी छोटे सब-माइक्रोन कणों के निकलने के संकेत मिले। हालांकि, ऐसे कणों के शरीर में जाने के बाद वास्तविक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर अभी पर्याप्त मानव अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं।
यह भी पढ़ें: बच्चे की लंबाई बढ़ाने के लिए सिर्फ दूध काफी नहीं! डॉक्टर से जानें पूरी डाइट और किन चीजों से बचें
5. लंबे समय तक बार-बार सेवन की चिंता
अगर कोई व्यक्ति रोजाना कई बार गर्म पेय डिस्पोजेबल पेपर कप में पीता है, तो माइक्रोप्लास्टिक और अन्य पदार्थों के बार-बार संपर्क की संभावना रहती है। 2023 के अध्ययन ने ऐसे सेवन से माइक्रोप्लास्टिक के दैनिक और जीवनभर के संभावित सेवन का अनुमान लगाया, लेकिन शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि वास्तविक स्वास्थ्य जोखिम को अभी निश्चित रूप से तय नहीं किया जा सकता।
6. गर्म तापमान से कप की अंदरूनी परत प्रभावित हो सकती है
पेपर कप में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक लाइनिंग गर्म पानी के संपर्क में अपनी सतह और संरचना में बदलाव दिखा सकती है। यही वजह है कि बहुत गर्म पेय के लिए लंबे समय तक डिस्पोजेबल कप का इस्तेमाल करना चिंता का विषय बना हुआ है।
7. माइक्रोप्लास्टिक के साथ दूसरे पदार्थों का संपर्क
माइक्रोप्लास्टिक अकेले ही चिंता का विषय नहीं हैं। प्लास्टिक सामग्री में मौजूद कुछ रसायन या दूसरे पदार्थ भी गर्म पेय में पहुंच सकते हैं। हालांकि इनके कारण इंसानों में कितनी बीमारी या नुकसान होता है, इसे लेकर अभी पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
यह भी पढ़ें: बच्चों के लिए खोज रहे हैं यूनिक और संस्कारी नाम? बेटे-बेटी के ये नाम आ सकते हैं पसंद
तो क्या पेपर कप में चाय-कॉफी बिल्कुल न पिएं?
कभी-कभार पेपर कप में चाय या कॉफी पी लेने से गंभीर बीमारी होने का दावा मौजूदा वैज्ञानिक प्रमाणों से नहीं किया जा सकता। लेकिन अगर रोजाना गर्म पेय पीने की आदत है, तो लंबे समय के लिए कांच, स्टील या अन्य सुरक्षित और दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले कप को प्राथमिकता देना एक आसान सावधानी हो सकती है।





