आज के समय में कमर दर्द एक मामूली समस्या बन गया है। बच्चों से लेकर वृद्ध तक सभी में कमर दर्द एक आम बीमारी बन गई है। लोग सोचते है कि आज ज्यादा काम कर लिया या ज्यादा देर खड़े रह गए इसी कारण दर्द हो रहा होगा लेकिन यहाँ बात सिर्फ दर्द की नहीं है लेकिन दर्द न जाने की है। कई बार हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं यह समझ कर कि यह दर्द हाल ही का है थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा।
बता दें कि अगर दर्द थोड़ी देर के लिए है तो वह मसल पेन हो सकता है लेकिन अगर यह दर्द बार-बार हो रहा है और कई महीनों से बना हुआ है तो यह एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (AS) हो सकता है। यह एक क्रॉनिक इंफ्लेमेटरी बीमारी है। इसमें रीढ़ और जोड़ों में लंबे समय तक सूजन बनी रहती है, जिससे दर्द और जकड़न की समस्या होती है।
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क्या है एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस ?
एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की रीढ़ की हड्डी और उसके आसपास के जोड़ों में सूजन पैदा करने लगती है। आसान भाषा में कहें तो इसमें लंबे समय तक कमर और कूल्हों में दर्द व अकड़न रह सकती है। यह समस्या अक्सर कम उम्र में शुरू होती है और समय के साथ रीढ़ की लचक को प्रभावित कर सकती है।
इसमें कमर दर्द की एक खास बात यह होती है कि आराम करने या लंबे समय तक बैठे रहने पर दर्द और अकड़न बढ़ सकती है, जबकि चलने-फिरने या हल्की गतिविधि से कुछ राहत मिल सकती है। सुबह उठने के बाद ज्यादा देर तक कमर में जकड़न रहना भी इसका एक संकेत हो सकता है। इसके अलावा कूल्हों, घुटनों या एड़ियों में दर्द, थकान और कुछ मामलों में आंखों में सूजन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
हेल्थकेयर डेटा और एनालिटिक्स फर्म ग्लोबलडेटा के अनुमान के मुताबिक, भारत में एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से प्रभावित मरीजों की संख्या करीब 16.5 लाख है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में इस बीमारी के मामलों में हर साल लगभग 2.95 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। चिंता की बात यह है कि कई लोग कमर दर्द और शरीर में होने वाली अकड़न को सामान्य समस्या समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करते रहते हैं।
बीमारी के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होने और शुरुआती लक्षणों को पहचान न पाने की वजह से कई मरीजों में समय पर सही जांच और इलाज शुरू नहीं हो पाता। ऐसे में लगातार बने रहने वाले कमर दर्द और सुबह की अकड़न को हल्के में न लेना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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क्या है एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण ?

एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस की शुरुआत कई बार धीरे-धीरे होती है, इसलिए लोग इसके शुरुआती लक्षणों को सामान्य कमर दर्द या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। खासतौर पर युवाओं में लगातार रहने वाला कमर दर्द अगर आराम करने से कम होने के बजाय बढ़ता है, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। इस बीमारी में सबसे ज्यादा असर रीढ़ और उसके आसपास के हिस्से पर पड़ता है, लेकिन इसके लक्षण शरीर के दूसरे जोड़ों और कुछ अन्य अंगों में भी दिखाई दे सकते हैं।
1. लंबे समय तक कमर में दर्द और अकड़न
इस बीमारी का सबसे आम संकेत कमर के निचले हिस्से और कूल्हों के आसपास दर्द और जकड़न होना है। दर्द कुछ दिनों तक रहकर ठीक होने के बजाय बार-बार वापस आ सकता है। कई लोगों में यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है और महीनों या वर्षों तक बीच-बीच में परेशान कर सकती है।
2. सुबह उठने पर कमर ज्यादा जकड़ी महसूस होना
अगर सुबह बिस्तर से उठते समय कमर को सीधा करने में परेशानी हो या काफी देर तक अकड़न बनी रहे, तो इसे सिर्फ सोने की गलत पोजीशन समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में सुबह और रात के समय कमर का दर्द और अकड़न ज्यादा महसूस हो सकती है।
3. आराम करने पर दर्द बढ़ना
इस बीमारी के कमर दर्द की एक खास बात यह है कि लंबे समय तक बैठे रहने या आराम करने के बाद दर्द और अकड़न बढ़ सकती है। इसके उलट, चलने-फिरने या हल्की शारीरिक गतिविधि से कई लोगों को कुछ राहत मिलती है। यही वजह है कि लगातार बैठने के बाद कमर दर्द बढ़ना भी एक संकेत हो सकता है।
4. रात में दर्द से नींद खुलना
कुछ लोगों को रात में कमर या कूल्हों में दर्द इतना महसूस होता है कि उनकी नींद खुल जाती है। खासकर रात के दूसरे हिस्से में दर्द और अकड़न ज्यादा परेशान कर सकती है। अगर ऐसा लगातार हो रहा है और साथ में सुबह उठने पर भी कमर जकड़ी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
5. कूल्हों, घुटनों और दूसरे जोड़ों में दर्द
एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस केवल रीढ़ की बीमारी नहीं है। इसमें कूल्हे, घुटने, कंधे, पैर और शरीर के दूसरे जोड़ भी प्रभावित हो सकते हैं। इन जगहों पर दर्द, सूजन या चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।
6. एड़ी में दर्द या सूजन
कुछ मरीजों को एड़ी के पीछे या नीचे दर्द होता है। ऐसा उन जगहों पर सूजन के कारण हो सकता है जहां टेंडन या लिगामेंट हड्डी से जुड़ते हैं। इसे एन्थेसाइटिस कहा जाता है। यह भी बीमारी का एक संकेत हो सकता है।
7. गहरी सांस लेने में परेशानी
अगर रीढ़ और पसलियों के बीच के जोड़ प्रभावित होते हैं, तो छाती को पूरी तरह फैलाने में परेशानी हो सकती है। ऐसे में गहरी सांस लेते समय सीने में दर्द या जकड़न महसूस हो सकती है।
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8. लगातार थकान महसूस होना
इस बीमारी में शरीर के अंदर लंबे समय तक सूजन रहने के कारण कुछ लोगों को बिना ज्यादा काम किए भी थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। यानी पर्याप्त आराम के बाद भी अगर शरीर में लगातार ऊर्जा की कमी महसूस हो रही है, तो इसे दूसरे लक्षणों के साथ जोड़कर देखना जरूरी है।
9. आंखों में लालिमा और दर्द
एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का असर आंखों पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों में आंख के अंदर सूजन हो सकती है, जिसे यूवाइटिस कहा जाता है। इसमें आंख लाल होना, दर्द होना या नजर से जुड़ी परेशानी हो सकती है। ऐसे लक्षण होने पर आंखों के डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है।
10. त्वचा और पेट से जुड़ी परेशानियां
कुछ मरीजों में सोरायसिस जैसी त्वचा संबंधी समस्या या आंतों में सूजन से जुड़ी बीमारी भी साथ में हो सकती है। पेट में दर्द, बार-बार दस्त या वजन कम होना जैसे लक्षण भी कुछ लोगों में दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, हर मरीज में ये समस्याएं हों, ऐसा जरूरी नहीं है।
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क्या है इसका इलाज ?
इलाज की बात करें तो एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का अभी कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और बीमारी की गति को धीमा करने में मदद मिल सकती है। इलाज में डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं, नियमित व्यायाम और फिजियोथेरेपी शामिल हो सकती है। व्यायाम का उद्देश्य शरीर की लचक बनाए रखना, मांसपेशियों को मजबूत करना और पॉश्चर को बेहतर रखना होता है। कौन-सा व्यायाम करना है, यह मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से समझना चाहिए।





