बांग्लादेश की ‘इस्लामिक NATO’ में एंट्री की तैयारी? भारत की पूर्वी सीमा पर बदल सकते हैं रणनीतिक समीकरण

बांग्लादेश ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच बने नए रक्षा समझौते में शामिल होने का रास्ता खुला रखा है। इसे लेकर दक्षिण एशिया में नई रणनीतिक हलचल शुरू हो गई है। अगर ढाका इस गठजोड़ का हिस्सा बनता है तो भारत के लिए पूर्वी सीमा, बंगाल की खाड़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

Palak Gupta

24 अगस्त 2026

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बांग्लादेश की ‘इस्लामिक NATO’ में एंट्री की तैयारी? भारत की पूर्वी सीमा पर बदल सकते हैं रणनीतिक समीकरण

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट ने एशिया में हलचल मचा दी है। बता दें कि अब बांग्लादेश भी इस ‘इस्लामिक नाटो’ जैसे गठबंधन में शामिल होने पर विचार कर रहा है। चीन और पाकिस्तान से बढ़ती उसकी दोस्ती भारत के लिए नया संकट पैदा कर सकती है।

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 बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार ने संकेत दिया है कि वह इस ढांचे में शामिल होने के विकल्प पर विचार कर सकता है। 22 अगस्त को बांग्लादेश के मंत्री हुमायूं कबीर और शमा उबैद इस्लाम ने कॉन्फ्रेंस में बात करते हुए यह मीडिया को अनुमान दिया है कि ढाका ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ में शामिल होने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा यह वही समझौता है जिससे कई लोग इस्लामिक NATO के नाम से जानते हैं।

दरअसल बांग्लादेश के मंत्री ने इससे पहले भी कई बार इस्लामिक NATO पर चर्चा की है। भारत देश के लिए आने वाले दिन जोखिम भरे रहने वाले है क्योंकि बांग्लादेश के इस्लामिक NATO में नाम जुड़ने से भारत को सिर्फ कूटनीतिक ही नहीं बल्कि सुरक्षा पर भी बुरा झटका लगेगा।

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आखिर क्या है ‘इस्लामिक नाटो’ वाला मामला?

दरअसल, ‘इस्लामिक नाटो’ नए रक्षा समझौते को समझाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। 7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसकी सबसे अहम बात यह है कि अगर तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे बाकी देशों पर हमला माना जाएगा। यही वजह है कि इसकी तुलना नाटो के सामूहिक रक्षा से की जा रही है।

इस गठबंधन को बनाने के पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और ईरान की बढ़ती सैन्य रुख को मुख्य वजह माना जा रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बिगड़ते रिश्तों ने सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को हवा दी है। इस्लामिक NATO में अगर बांग्लादेश की एंट्री होगी तो बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्की के बीच संबंध और भी मजबूत हो जाएंगे।

पाकिस्तान पहले से ही इस समझौते का हिस्सा है और तुर्की के साथ उसके सैन्य संबंध भी मजबूत हैं। बांग्लादेश और तुर्की के बीच भी रक्षा सहयोग पहले से मौजूद है। दोनों देशों के बीच सैन्य सामान और रक्षा तकनीक को लेकर सहयोग बढ़ा है।

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भारत पर किस तरह से पड़ेगा असर ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक बताया जा रहा है कि फिलहाल तो भारत को किसी प्रकार का सैन्य दबाव या खतरा महसूस करने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर बांग्लादेश भी NATO में जुड़ जाता है भारत पर कई संकट आ सकते हैं जैसे नाटो के जरिये बांग्लादेश पाकिस्तान को एक ऐसे सुरक्षा ढांचे में लाएगा जिसमें भारत की सीमा से सटा एक और देश शामिल होगा जिससे पाकितान को रणनीतिक फायदा मिलेगा। इसी के साथ भारत की रणनीतिक सुरक्षा पर भी प्रभाव दिखेगा  बांग्लादेश-पाकिस्तान सुरक्षा संबंध भारत की पूर्वी सुरक्षा समीकरणों को जटिल बना सकते हैं।


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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.

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