बांग्लादेश अपनी मजबूती बढ़ाने के निरंतर प्रयास में लगा हुआ है। हाल ही में खबर आई है कि ढाका इस्लामाबाद के साथ भी संबंध मजबूत कर रहा है खासकर व्यापार और लोगों के बीच आपसी संपर्क के मामले में कबीर ने इसे सामान्य राजनयिक जुड़ाव बताया है।
इसी के साथ बांग्लादेश के विदेश मामलों पर सलाह देने वाले हुमायूं कबीर ने गुरुवार को एक इंटरव्यू में बयान दिया है कि बांग्लादेश ‘अपने हितों और ग्लोबल इकॉनमी और व्यापार में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए मक्का समझौते में शामिल होने पर विचार कर सकता है।’ इस बयान से बांग्लादेश ने भारत और खुद के बीच चल रहे तनाव को एक कठिन परिस्थिति में डाल दिया है।
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बता दें कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने इस महीने की 7 तारीख को मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें उन्होंने एकता दिखाते हुए कहा था कि अगर तीनों में से किसी एक देश पर भी हमला होता है तो वह हमले को तीनों देशों पर हमला मानेंगे। इसके अलावा बांग्लादेश के सलाहकार ने कहा कि अभी तारीक रहमान के भारत दौरे का समय उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि फिलहाल राष्ट्रीय हित की तरफ ध्यान देने का समय है ऐसे में उच्च-स्तरीय यात्रा की जल्दबाजी करना ठीक नहीं है।
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पाकिस्तान से भी बढ़ रहा संपर्क
बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्तों में पिछले कुछ समय से बदलाव देखने को मिल रहा है। बता दें कि ढाका इस्लामाबाद से संबंध मजबूत करने में जुट गया है ढाका ने व्यापार के संभंद मजबूत करना शुरू कर दिया है। कबीर ने इस संबंध को राजनयिक जुड़ाव बताया है। वहीं उन्होंने कहा कि चीन के साथ संबंध कई मुश्किलों का समाधान करेंगे। इसी के साथ उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भू-राजनीतिक दबाव से बचते हुए बीजिंग के साथ गहरे संबंध बनाना चाहता है।
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मुस्लिम नाटो की चर्चा कहां से आई?
मुस्लिम देशों के बीच नाटो जैसी व्यवस्था की चर्चा पाकिस्तान की तरफ से सामने आई है। मक्का में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए रक्षा समझौते के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि इसे दूसरे इस्लामी देशों के लिए भी खुला रखा जाना चाहिए। इसी बयान के बाद इस संभावित व्यवस्था को लेकर अलग-अलग अटकलें शुरू हुईं। बांग्लादेश का नाम इस चर्चा में इसलिए जुड़ रहा है क्योंकि ढाका के पाकिस्तान के साथ रिश्ते पहले की तुलना में बेहतर हुए हैं और चीन के साथ भी उसकी नजदीकी बढ़ी है।





