जोधपुर की दो बहनों का कमाल, तैराकी और कराटे में जीते कई मेडल

जोधपुर की बहनें शिवांजना और मनुश्री ने तैराकी और कराटे में शानदार प्रदर्शन कर अपनी अलग पहचान बनाई है। राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल समेत कई उपलब्धियां हासिल करने वाली दोनों बहनों की सफलता के पीछे कड़ी मेहनत, अनुशासन और परिवार का सहयोग है। उनकी कहानी पढ़ाई के साथ खेलों में आगे बढ़ने वाली बेटियों के लिए प्रेरणा है।

Shakshi Chauhan

18 अगस्त 2026

1 min read
जोधपुर की दो बहनों का कमाल, तैराकी और कराटे में जीते कई मेडल

राजस्थान के जोधपुर की दो बहनें शिवांजना और मनुश्री इन दिनों अपनी मेहनत और उपलब्धियों के कारण चर्चा में हैं। दोनों बहनों ने खेल के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने तैराकी और कराटे जैसी अलग-अलग विधाओं में शानदार प्रदर्शन किया है। उनकी कहानी यह बताती है कि अगर बचपन से ही सही दिशा में मेहनत की जाए तो छोटी उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

शिवांजना और मनुश्री की खास बात यह है कि दोनों ने केवल एक खेल तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने तैराकी के साथ कराटे को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाया। तैराकी में बेहतर प्रदर्शन के लिए नियमित अभ्यास, फिटनेस और अनुशासन की जरूरत होती है। वहीं कराटे उन्हें आत्मरक्षा के साथ आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती भी देता है। दोनों बहनों ने इन दोनों क्षेत्रों में मेहनत कर कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पदक अपने नाम किए।

इन बहनों की सफलता के पीछे लगातार अभ्यास और परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। किसी भी खिलाड़ी के लिए प्रतियोगिता में उतरने से पहले लंबे समय तक तैयारी करनी पड़ती है। जीत केवल मैदान में प्रदर्शन से नहीं मिलती, बल्कि इसके पीछे रोजाना की मेहनत, समय की पाबंदी और अपनी गलतियों से सीखने की आदत होती है। शिवांजना और मनुश्री ने भी इसी तरह अपने खेल को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया।

तैराकी में राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल हासिल करना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रतिभाशाली खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। ऐसे मुकाबले में पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए गर्व की बात होती है। इन दोनों बहनों की उपलब्धियां यह भी दिखाती हैं कि राजस्थान जैसे प्रदेश से निकलकर बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।

कराटे को सीखने का एक और बड़ा फायदा आत्मरक्षा से जुड़ा है। आज के समय में लड़कियों के लिए आत्मरक्षा का प्रशिक्षण काफी उपयोगी माना जाता है। कराटे केवल मुकाबला करना नहीं सिखाता, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में खुद को संभालने, आत्मविश्वास बनाए रखने और अनुशासन में रहने की सीख भी देता है। शिवांजना और मनुश्री ने खेल के साथ इस पहलू को भी अपनाया है।

दोनों बहनों की कहानी दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। अक्सर बच्चों को पढ़ाई के अलावा खेलों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। लेकिन अगर परिवार और बच्चे मिलकर समय का सही प्रबंधन करें तो पढ़ाई और खेल दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है। इन बहनों ने यही साबित करने की कोशिश की है कि मेहनत और अनुशासन के साथ कई क्षेत्रों में आगे बढ़ना संभव है।

यह भी पढ़ें: भारत दौरे पर आ सकते हैं शी जिनपिंग, PM मोदी-पुतिन मुलाकात की भी चर्चा

शिवांजना और मनुश्री की सफलता सिर्फ उनके जीते हुए मेडल तक सीमित नहीं है। उनकी उपलब्धि उन माता-पिता के लिए भी संदेश है जो अपनी बेटियों को खेलों में आगे बढ़ाना चाहते हैं। बेटियों को अगर सही प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और अवसर मिले तो वे राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकती हैं।

यह भी पढ़ें: मिनरल बिल पर हेमंत सरकार की बड़ी तैयारी, बुलाया जा सकता है झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र

जोधपुर की इन दोनों बहनों की कहानी मेहनत, आत्मविश्वास और लगन की कहानी है। तैराकी में पदक और कराटे में उपलब्धियां हासिल कर उन्होंने यह दिखाया है कि सफलता के लिए उम्र नहीं, बल्कि लगातार प्रयास और सही मार्गदर्शन जरूरी है। आने वाले समय में अगर दोनों इसी तरह मेहनत जारी रखती हैं, तो वे खेल के क्षेत्र में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

Shakshi Chauhan
लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way