रांची केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड में सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संकेत दिया है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। सोमवार को प्रोजेक्ट भवन में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएमडीआर एक्ट में किए गए बदलावों को लेकर जल्द ही विस्तृत चर्चा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है।
खनिज राजस्व को लेकर राज्य सरकार की चिंता
झारखंड सरकार की सबसे बड़ी चिंता खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व को लेकर है। राज्य सरकार का तर्क है कि झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्य में खनन से मिलने वाला राजस्व विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य के खनन विभाग से 18,730.91 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इसमें मिनरल बेयरिंग लैंड सेस से मिलने वाली 7,487.91 करोड़ रुपये की राशि भी शामिल है।
सरकार का मानना है कि यदि राज्यों की खनिज अधिकारों और खनिज-धारक भूमि पर शुल्क या सेस लगाने की शक्ति प्रभावित होती है, तो भविष्य में राज्य के राजस्व पर बड़ा असर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने की अपील भी की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर विधेयक को लेकर राज्य की चिंताओं से अवगत कराया है।
विकास योजनाओं पर पड़ सकता है असर
झारखंड सरकार इस मामले को सिर्फ खनन से जुड़े राजस्व के तौर पर नहीं देख रही है। सरकार का कहना है कि खनिज क्षेत्र से मिलने वाली आय का इस्तेमाल राज्य की विभिन्न सामाजिक और कल्याणकारी योजनाओं में किया जाता है। ऐसे में राजस्व के स्रोत पर असर पड़ने का सीधा प्रभाव विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की वित्तीय क्षमता पर पड़ सकता है। राज्य सरकार इस मुद्दे को वित्तीय स्वायत्तता और राज्यों के अधिकारों से भी जोड़ रही है।
विशेष सत्र में प्रस्ताव लाने की तैयारी
झारखंड सरकार के मंत्री दीपक बिरुआ पहले ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर चुके हैं। उनका कहना है कि राज्य को इस मामले में केवल आपत्ति दर्ज कराने के बजाय संवैधानिक, कानूनी और राजनीतिक स्तर पर व्यापक चुनौती देनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से विशेष सत्र बुलाकर केंद्र के विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की अपील की है।
बिरुआ ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों को भी ऐसे प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उनके मुताबिक, इससे यह साफ होगा कि राज्य के खनिज संसाधनों और राजस्व से जुड़े अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर कौन-कौन से दल सरकार के साथ खड़े हैं। उन्होंने 2024 के सुप्रीम कोर्ट के नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए राज्यों के खनिज और खनिज-धारक भूमि पर कर लगाने के अधिकार की बात कही।
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केंद्र और राज्य के बीच बढ़ सकता है टकराव
खनिज संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड और केंद्र के बीच राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। संसद से विधेयक पारित होने के बाद झारखंड सरकार ने इसके खिलाफ अपनी आपत्ति तेज कर दी है। मुख्यमंत्री सोरेन का कहना है कि खनिज संसाधनों से जुड़े फैसलों का असर सीधे राज्य की अर्थव्यवस्था और लोगों पर पड़ता है।
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ऐसे में यदि झारखंड सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाती है, तो यह मुद्दा सदन में व्यापक राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है। सरकार की कोशिश राज्य के वित्तीय और संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने की होगी। फिलहाल सरकार ने विशेष सत्र बुलाने की अंतिम तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन मुख्यमंत्री के बयान से संकेत मिल रहा है कि इस विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।





