Indian vs Foreign Parenting: क्या है बड़ा अंतर? एक्सपर्ट ने बताई ये 1 बड़ी गलती

Indian और Foreign Parenting में क्या अंतर है? बच्चों की परवरिश, पढ़ाई, फैसले और आजादी को लेकर दोनों तरीकों में बड़ा फर्क देखने को मिलता है। जानिए एक्सपर्ट की राय और माता-पिता की सबसे बड़ी गलती।

Palak Gupta

9 अगस्त 2026

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Indian vs Foreign Parenting: क्या है बड़ा अंतर? एक्सपर्ट ने बताई ये 1 बड़ी गलती

घर के चिराग की अहमियत ही कुछ अलग होती है और कई युगों से यही कहा जाता है कि बच्चों की अगर उनकी परवरिश अच्छी हो तो उनका व्यवहार, उनके गुण और उनकी पहचान तीनों निखरती है। बच्चों की परवरिश का तरीका हर परिवार और संस्कृति में अलग हो सकता है।

कई एक्सपर्ट भारतीय और विदेशी पेरेंटिंग के बीच के अंतर को सामने रखते हैं। इसी क्रम में हैप्पी माइंड्स की फाउंडर और एनएलपी मास्टर कोच श्वेता गांधी ने भी भारतीय और विदेशी पेरेंटिंग के बीच एक बड़ा फर्क बताया है। भारतीय परिवारों में जहां परिवार की भागीदारी, अनुशासन और पढ़ाई पर जोर ज्यादा देखने को मिलता है, वहीं कई पश्चिमी देशों में बच्चों को कम उम्र से अपनी पसंद और फैसलों की जिम्मेदारी देने पर जोर दिया जाता है।

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माता-पिता का बच्चों की जिंदगी में एक अहम किरदार होता है। कहा जाता है कि माता-पिता वो कुम्हार हैं जो मिट्टी को सींचकर उससे और निखारते हैं, उसे उचित परवरिश देते हैं। बच्चे की परवरिश सिर्फ उसे पढ़ाने-लिखाने या उसकी जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं होती। उसके साथ किस तरह बात की जाती है, उसे कितनी आजादी दी जाती है, गलतियों पर माता-पिता का रवैया कैसा रहता है और परिवार बच्चे के फैसलों में कितना दखल देता है, ये सभी बातें उसकी पर्सनालिटी पर असर डालती हैं।

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इसी वजह से फॉरेन पेरेंटिंग और इंडियन पेरेंटिंग के बीच अंतर की चर्चा होती है और कई एक्सपर्ट्स की इस विषय पर अलग-अलग राय होती है। हैप्‍पी माइंड्स की फाउंडर और एनएलपी मास्‍टर कोच श्वेता गांधी सोशल मीड‍िया पर एक वीडियो शेयर करती हैं, जिसमें व‍िदेशी पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ एक्सरसाइज करते नजर आ रहे हैं। वीडियो दिखाने के बाद वह कहती हैं, ‘क्या आपने देखा? इसे कहते हैं रियल पेरेंटिंग।’ फॉरेन में बच्चे वीकेंड पर अपने माता-पिता के साथ रनिंग, हाइकिंग, साइकिलिंग, ट्रैकिंग या कोई दूसरी फिजिकल एक्टिविटी करते हुए नेचर के करीब समय बिता रहे हैं। लेकिन भारत में अक्सर तस्वीर इससे बिल्कुल उलट नजर आती है।

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इंडियन और फॉरेन पेरेंटिंग में क्या अंतर है?

पहलूIndian ParentingForeign/Western Parenting
परिवार की भूमिकादादा-दादी, नाना-नानी और दूसरे रिश्तेदार भी पेरेंटिंग में शामिल हो सकते हैंअक्सर मुख्य जिम्मेदारी माता-पिता की होती है
फैसले लेनामाता-पिता बच्चे के फैसलों में ज्यादा भूमिका निभाते हैंबच्चे को उम्र के साथ अपनी पसंद और फैसले लेने की अधिक स्वतंत्रता दी जाती है
पढ़ाईपढ़ाई, नंबर और करियर पर अपेक्षाकृत ज्यादा जोरपढ़ाई के साथ स्किल्स, हॉबीज और पर्सनल इंटरेस्ट पर भी जोर
अनुशासननियम और पैरेंटल अथॉरिटी को ज्यादा महत्व दिया जाता हैकई परिवार बातचीत के जरिए अनुशासन करते हैं
आजादीबच्चे की फ्रीडम अक्सर उम्र और परिवार की सोच के हिसाब से तय होती हैबच्चों को कम उम्र से अपने पैरों पर खड़े होने की नसीहत दी जाती है
करियर का चुनावमाता-पिता की पसंद या सलाह का प्रभाव ज्यादा हो सकता हैबच्चे की पर्सनल इंटरेस्ट को ज्यादा महत्व देने की प्रवृत्ति
खाने की आदतेंघर के खाने और पारंपरिक भोजन को प्राथमिकता देने की परंपरा मजबूतबच्चे की खाने की पसंद को ज्यादा महत्व देने की प्रवृत्ति
परिवार से जुड़ावपरिवार और रिश्तेदारों से मजबूत रिश्तों पर जोरछोटी फैमिली और प्राइवेट स्पेस पर ज्यादा जोर
बच्चे की गलतीकई बार माता-पिता तुरंत समझाने या सुधारने की कोशिश करते हैंकई परिवार बच्चे को परिणाम समझकर खुद सीखने का मौका देते हैं
पेरेंटिंग का तरीका ज्यादा प्रोटेक्टिवस्वतंत्र

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अब आप सभी के मन में यह सवाल आ रहा होगा अगर फॉरेन पेरेंटिंग के तरीके में बच्चों को आजादी दी जाती है उनकी प्रिऑरिटीज़ देखी जाती है तो क्या फॉरेन पेरेंटिंग का तरीका अपनाना सही है ? आज सोशल मीडिया पर फॉरेन पेरेंटिंग के कई वीडियो वायरल होते हैं। बच्चे को कितनी आजादी देनी चाहिए, किस उम्र में उसे खुद फैसले लेने चाहिए या पेरेंट्स को कितना ठोस होना चाहिए इन विषयों पर खूब चर्चा होती है।

लेकिन एक्सपर्ट्स की यह राय है कि परवरिश में सबसे जरूरी कोई एक ही पेरेंटिंग फार्मूला नहीं होता बल्कि बच्चों के हिसाब से पेरेंट्स को खुद को बच्चों की जरूरतों के अनुसार ढालना पड़ता है और ऐसी स्ट्रैटेजी अपनानी होती है जिससे उसकी परवरिश अच्छी हो। एक पुराने इंटरव्यू में पेरेंटिंग पर बात करते हुए कॉमेडियन अमित टंडन ने भी कहा था कि आज माता-पिता के सामने बहुत ज्यादा पेरेंटिंग एडवाइस और फॉर्मूला उपलब्ध हैं और हर सलाह को अपनाने के बजाय बच्चे को नैचुरली ग्रो करने की जगह देना जरूरी है।

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लेखक परिचय
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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.