हरियाली तीज पर कुंवारी लड़कियां क्यों रखती हैं व्रत? जानें मनचाहा जीवनसाथी पाने की मान्यता

हरियाली तीज 2026 का पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा। जानिए क्या कुंवारी लड़कियां हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं, इसका धार्मिक महत्व क्या है और अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए शिव-पार्वती की पूजा कैसे की जाती है।

Shakshi Chauhan

16 अगस्त 2026

1 min read
हरियाली तीज पर कुंवारी लड़कियां क्यों रखती हैं व्रत? जानें मनचाहा जीवनसाथी पाने की मान्यता

हरियाली तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। यह त्योहार खासतौर पर सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंवारी लड़कियां भी हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं। इस व्रत के जरिए अविवाहित लड़कियां अच्छे और योग्य जीवनसाथी की कामना करती हैं। साल 2026 में हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त को मनाया जाएगा।

कुंवारी लड़कियों के लिए क्यों खास है हरियाली तीज?

धार्मिक मान्यता के अनुसार हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम, समर्पण और पवित्र मिलन का प्रतीक है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।

इसी पौराणिक कथा के कारण हरियाली तीज का व्रत अविवाहित लड़कियों के लिए भी विशेष माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से मनचाहे और योग्य वर की प्राप्ति की कामना पूरी हो सकती है। हालांकि, इससे जुड़ी बातें धार्मिक आस्था और मान्यताओं पर आधारित हैं।

अच्छे जीवनसाथी के लिए करती हैं प्रार्थना

कुंवारी लड़कियां हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती से अपने भविष्य के लिए प्रार्थना करती हैं। इस दौरान वे योग्य जीवनसाथी, अच्छे विवाह योग और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। कई परिवारों में इस दिन लड़कियां व्रत रखने के साथ शिव-पार्वती की विधि-विधान से पूजा भी करती हैं।

हरियाली तीज केवल व्रत रखने का पर्व नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, प्रेम और पारिवारिक सुख की कामना से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस दिन पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण विशेष महत्व रखता है।

कैसे रखा जाता है व्रत?

हरियाली तीज का व्रत कई स्थानों पर कठिन माना जाता है। कुछ परंपराओं में महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, यानी पूरे दिन भोजन और पानी का सेवन नहीं करतीं। हालांकि, व्रत रखने वाली कुंवारी लड़कियों को अपनी श्रद्धा के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए।

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना, उनकी कथा सुनना और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मन से अपनी इच्छा भगवान के सामने रखकर सुखी और अच्छे वैवाहिक जीवन की प्रार्थना की जाती है।

शिव-पार्वती की पूजा का महत्व

हरियाली तीज में शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव को आदर्श पति और माता पार्वती को समर्पण और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसलिए अविवाहित लड़कियां भी इस पर्व पर माता पार्वती से अपने लिए अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं।

इस दिन पूजा के साथ मन में सकारात्मक विचार रखना और भगवान के प्रति श्रद्धा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हरियाली तीज का पर्व महिलाओं को अपनी इच्छाओं और भविष्य के सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करने का अवसर देता है।

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आस्था के साथ रखें व्रत

हरियाली तीज का व्रत धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसे अपनी क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए। खासतौर पर निर्जला व्रत रखने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। व्रत का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा और भगवान शिव-पार्वती का स्मरण है।

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इस तरह हरियाली तीज केवल सुहागिन महिलाओं का पर्व नहीं, बल्कि धार्मिक मान्यता के अनुसार कुंवारी लड़कियों के लिए भी खास अवसर है। जो लड़कियां अपने लिए योग्य जीवनसाथी और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, वे इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं।

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लेखक परिचय
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Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way