सावन सोमवार व्रत के जरूरी नियम, भूलकर भी न करें ये गलतियां, तभी मिलेगा भगवान शिव का आशीर्वाद

सावन का सोमवार सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति आस्था, संयम और श्रद्धा का पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा और व्रत शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन कुछ ऐसे नियम भी हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है?

Palak Gupta

2 अगस्त 2026

1 min read
सावन सोमवार व्रत के जरूरी नियम, भूलकर भी न करें ये गलतियां, तभी मिलेगा भगवान शिव का आशीर्वाद

सावन का महीना अन्य महीनों से भिन्न और पवित्र माना जाता है। शिव आराधना करने वाले भक्तों के लिए यह माह अत्यधिक शुभ होता है। इस महीने में भगवान शिव की असीम कृपा भक्तों पर बरसती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा शिव पूजा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

श्रवण के पहले सोमवार से आखिरी सोमवार तक अपनी मनोकामना पूर्ण करने हेतु और भगवान शिव की असीम कृपा पाने के लिए विधिपूर्वक व्रत रखते हैं। व्रत की शुरुआत भक्त जलाभिषेक करते हैं और भोलेनाथ से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। श्रावण मास का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को है। आइए जानते हैं कि सावन सोमवार के दिन क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए।

यह भी पढ़ें: Shani Vakri 2026: 27 जुलाई से शनि की उल्टी चाल, इन 3 राशियों को होगा लाभ

सावन सोमवार व्रत के जरूरी नियम

नियमक्या करें?
सुबह जल्दी उठेंब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ या हल्के रंग के वस्त्र पहनें।
जलाभिषेक करेंशिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक करें।
मंत्र जाप करेंपूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
सात्विक भोजन करेंव्रत में फल, दूध, साबूदाना, मखाना और अन्य सात्विक आहार का सेवन करें।
शिव परिवार की पूजा करेंभगवान शिव के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी महाराज की भी पूजा करें।
दान-पुण्य करेंजरूरतमंद लोगों को अन्न, फल, वस्त्र या अपनी क्षमता अनुसार दान दें।
मन को शांत रखेंपूरे दिन क्रोध, ईर्ष्या, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करें।
बेलपत्र सही चढ़ाएंतीन पत्तियों वाला साफ और बिना टूटा हुआ बेलपत्र ही भगवान शिव को अर्पित करें।

यह भी पढ़ें: Yogini Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी के बाद कब है योगिनी एकादशी? जानें तिथि, महत्व और पूजा का महत्व

सावन सोमवार के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां

गलतीक्यों नहीं करनी चाहिए?
मांस, शराब या तामसिक भोजन करनाधार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे व्रत की पवित्रता भंग होती है और पूजा का पूरा फल नहीं मिल पाता।
झूठ बोलनासावन सोमवार के दिन सत्य बोलने का विशेष महत्व माना गया है। झूठ बोलने से व्रत का पुण्य कम हो सकता है।
क्रोध या विवाद करनाभगवान शिव को शांत स्वभाव का देव माना जाता है। इसलिए इस दिन गुस्सा और विवाद से बचना चाहिए।
शिवलिंग पर हल्दी चढ़ानाशिव पूजा में हल्दी अर्पित नहीं की जाती, क्योंकि इसे सौभाग्य और स्त्री श्रृंगार से जोड़ा जाता है।
केतकी का फूल अर्पित करनापौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने केतकी के फूल को पूजा में स्वीकार न करने का वरदान दिया था।
किसी का अपमान करनाव्रत के दिन कटु वचन बोलना या किसी का दिल दुखाना शुभ नहीं माना जाता।
बिना श्रद्धा के पूजा करनाकेवल औपचारिकता निभाने के बजाय सच्चे मन और श्रद्धा से पूजा करना अधिक फलदायी माना जाता है।
पूजा अधूरी छोड़ देनायदि व्रत रखा है तो पूजा और आरती पूरी विधि-विधान से करनी चाहिए।
बासी भोजन का सेवन करनासावन सोमवार में ताजा और सात्विक भोजन को ही शुभ माना गया है।
स्वच्छता की अनदेखी करनापूजा से पहले शरीर, मन और पूजा स्थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।

यह भी पढ़ें: Ganesh Durva Katha: भगवान गणेश को क्यों चढ़ाई जाती है दूर्वा? पढ़ें पौराणिक कथा

श्रावण में भगवान शिव को जलाभिषेक क्यों किया जाता है ?

श्रावण माह की कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथा के अनुसार, देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन किया। मंथन शुरू हुआ तो सबसे पहले अमृत नहीं, बल्कि बेहद घातक हलाहल विष निकला। उस विष की गर्मी इतनी भयानक थी कि पूरी सृष्टि संकट में पड़ गई। न देवता उसे संभाल पाए और न ही असुर। तभी सभी भगवान शिव के पास पहुंचे। भगवान शिव ने बिना एक पल सोचे पूरा विष अपने कंठ में धारण कर लिया। माता पार्वती ने विष को उनके गले से नीचे नहीं उतरने दिया। इसी कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए।

लेकिन विष की तीव्र गर्मी से भगवान शिव का शरीर तपने लगा। तब देवताओं ने उन्हें लगातार जल अर्पित किया, ताकि उनका ताप शांत हो सके। मान्यता है कि यही परंपरा आगे चलकर सावन में जलाभिषेक के रूप में शुरू हुई।

Palak Gupta
लेखक परिचय
Palak Gupta
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.