गजानन संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करें पूजा, 2 अगस्त का शुभ मुहूर्त और सामग्री लिस्ट

गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 पर जानें पूजा सामग्री, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय का समय।

Shakshi Chauhan

2 अगस्त 2026

1 min read
गजानन संकष्टी चतुर्थी पर ऐसे करें पूजा, 2 अगस्त का शुभ मुहूर्त और सामग्री लिस्ट

हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है यह व्रत भगवान श्री गणेश को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम पूर्वक व्रत एवं पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा सुख समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में गजानन संकष्टी चतुर्थी 2 अगस्त रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत को खोला जाता है।

व्रत के नियम:-

गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान गणेश का स्मरण करना चाहिए। इस दिन यथासंभव सात्विक भोजन करना चाहिए या निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखना चाहिए। व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करें। किसी के प्रति कटु वचन न बोलें, क्रोध से बचें तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करें। पूजा के समय पूरे श्रद्धा भाव से भगवान गणेश का ध्यान करें और “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। इससे मन को शांति मिलती है और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है।

पूजा सामग्री:-

गजानन संकष्टी चतुर्थी की पूजा के लिए गणेश जी की प्रतिमा या चित्र, लाल या पीले वस्त्र, रोली, कुमकुम, अक्षत, दूर्वा घास, लाल फूल ,धूप, दीपक, घी, अगरबत्ती, नारियल,सुपारी ,पान ,कलवा, मौली, मोदक या लड्डू ,मौसमी फल, पंचामृत ,गंगा जल तथा चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल का पात्र तैयार रखें।भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

चंद्र दर्शन का महत्व:-

संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देकर भगवान गणेश की पूजा पूर्ण होती है। इसके बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है, मानसिक तनाव कम होता है तथा परिवार में खुशहाली बनी रहती है। इसलिए चंद्र दर्शन के बिना इस व्रत को अधूरा माना जाता है।

प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से शुद्ध करें और रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद गणेश मंत्र या गणेश चालीसा का पाठ करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। शाम को चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें जल का अर्घ्य दें और फिर व्रत व्रत का पारण करें।

यह भी पढ़ें: ओमान के पास जहाज पर हमला, 11 भारतीयों में 10 सुरक्षित; एक अब भी लापता, भारत ने की निंदा

शुभ मुहूर्त:-

पंचांग के अनुसार गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 2 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। चतुर्थी तिथि 1 अगस्त की रात 11:07 बजे से शुरू होकर 2 अगस्त की रात 11:15 बजे तक रहेगी। इस व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है, इसलिए चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है।

यह भी पढ़ें: बच्चों में भी हो सकता है हार्ट अटैक, खेलते समय सीने में दर्द को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

गजानन संकष्टी चतुर्थी सावन महीने के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है, अगर कोई यह व्रत श्रद्धा विश्वास और नियम के साथ करता है तो भगवान गणेश की उस पर अति कृपा होती है। और उसके जीवन से सभी दुखों का निवारण होता जाता है, और जीवन में सुख समृद्धि आती है। इसलिए इस पावन अवसर पर विधि विधान से पूजा कर गणपति बप्पा का आशीर्वाद अवश्य लें।

Shakshi Chauhan
लेखक परिचय
Shakshi Chauhan
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she…और पढ़ें
Shakshi Chauhan is a college student. she writes with her mind completely involved in writing. Even though she is into commerce field, but she still has passion for writing. It was her hobby and now she wants to hone the same and work on it. She really enjoys articulating things in her own way