8वां वेतन आयोग सरकार ने पहली बार फैमिली यूनिट और फिटमेंट फैक्टर पर संसद में दिया जवाब केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए बनने वाले 8वें वेतन आयोग को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। इस आयोग का सबसे बड़ा और चर्चित मुद्दा है “फिटमेंट फैक्टर” की गणना का तरीका, जिसके आधार पर ही न्यूनतम वेतन तय होता है। इसी से जुड़े “फैमिली यूनिट” वाले सवाल पर अब सरकार ने संसद में पहली बार जवाब दिया है।
दरअसल, कर्मचारी संगठनों की लंबे समय से यह मांग रही है कि न्यूनतम वेतन तय करने के लिए इस्तेमाल होने वाली फैमिली यूनिट को तीन सदस्यों से बढ़ाकर पांच सदस्यों तक किया जाए, जिसमें आशत माता-पिता को भी शामिल किया जाए।
जब यह मुद्दा संसद में उठाया गया, तो सरकार ने न तो इस प्रस्ताव के मिलने की पुष्टि की और न ही इससे साफ इनकार किया। इसके बजाय सरकार ने सिर्फ यह दोहराया कि जब तक आयोग अपना काम पूरा नहीं कर लेता, तब तक उसकी सफारिशें और उससे जुड़ी बातचीत पूरी तरह स्वतंत्र और गोपनीय रहगी।
समझने वाली बात यह है कि पिछले यानी 7वें वेतन आयोग ने 1957 के 15वें इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस के मानकों को अपनाया था, जिसके तहत परिवार को कर्मचारी, पति/पत्नी और दो बच्चों के रूप में माना गया था। इसी आधार पर मौजूदा फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय हुआ था।
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हालांकि नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ साइड जैसे कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि आज के समय में घर की जिम्मेदारियां कहीं ज्यादा बढ़ चुकी हैं। उनका प्रस्ताव है कि परिवार को पांच यूनिट के रूप में माना जाए, जिसमें आश्रित माता-पिता भी शामिल हों, और इसके पीछे तर्क के तौर पर बदलते सामाजिक हालात, माता-पिता व वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण से जुड़ा कानून, सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के प्रावधान और सुप्रीम कोर्ट की उन बातो का हवाला दिया गया है जिनमें सरकार से एक आदर्श नियोक्ता की तरह व्यवहार करने की बात कही गई है।
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माना जा रहा है कि 8वां वेतन आयोग पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में काम कर रहा है, जिसे 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। इसकी सिफारिशें करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनरों को सीधे प्रभावित करेंगी।
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फिलहाल कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि अगर फैमिली यूनिट में बदलाव होता है, तो इससे न्यूनतम वेतन ज्यादा व्यावहारिक और मौजूदा जरूरतों के हिसाब से तय हो सकेगा। लेकिन जब तक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपता, तब तक इस बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आएगी।





