Plastic Currency: भारत में प्लास्टिक नोट लाने की तैयारी, जानें क्या होंगे इसके बड़े फायदे

भारत में जल्द प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों की शुरुआत हो सकती है। जानिए ये नोट कागज के नोटों से कैसे अलग होंगे, क्या होंगे इनके बड़े फायदे और आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

Palak Gupta

17 जुलाई 2026

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Plastic Currency: भारत में प्लास्टिक नोट लाने की तैयारी, जानें क्या होंगे इसके बड़े फायदे

पिछले कुछ महीनों से भारत की करेंसी नोट में बड़ा बदलाव करने के चर्चा कर रही है। RBI ने आज यानि 17 जुलाई को प्लास्टिक नोट को लेकर खबर जारी की है। इसमें नोटों की छपाई के लिए ओपैसिफाइड पॉलिमर सब्सट्रेट शीटों के निर्माण तथा आपूर्ति के लिए कंपनियों से वैश्विक स्तर पर निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। इसका यूज प्लास्टिक के नोट बनाने में होता है। देश में कैश की बढ़ती मांग और हर साल खराब होने वाले करोड़ों नोटों को देखते हुए यह फैसला लिया जा रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड ने इस बारे में अखबारों में एक विज्ञापन दिया है कि जल्द ही भारत में प्लास्टिक करेंसी देखी जाएगी। यह कंपनी आरबीआई और नोट छापने तथा सिक्के ढालने वाली सरकारी कंपनी एसपीएमसीआईएल का जाइंट वेंचर है।

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प्लास्टिक नोट का क्यों विचार किया गया ?

भारत में कागज के नोट लगातार इस्तेमाल की वजह से जल्दी फट जाते हैं, मैले हो जाते हैं और चलन से बाहर हो जाते हैं। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में पुराने नोटों को नष्ट करना पड़ता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 2,380 करोड़ मैले और खराब नोटों को नष्ट किया गया, जिनमें सबसे ज्यादा 500 और 100 रुपय के नोट शामिल थे।

इसके साथ ही नए नोट छापने का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। 2024-25 में नोटों की छपाई पर करीब 6,372.8 करोड़ रुपय का खर्च आया था , जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पॉलीमर नोट लागू होते हैं, तो उनकी उम्र कागज के नोटों से कई गुना ज्यादा होगी। इससे नोटों को बार-बार छापने की जरूरत कम पड़ेगी, सरकार का खर्च घटेगा और लंबे समय में करेंसी सिस्टम अधिक टिकाऊ और किफायती बन सकेगा।

प्लास्टिक के नोट और कागज़ नोट में क्या अंतर है ?

पहलूकागज के नोटप्लास्टिक (पॉलीमर) नोट
टिकाऊपनजल्दी फट सकते हैंकई साल तक चलते हैं
पानी का असरभीगने पर खराब हो सकते हैंपानी से आसानी से खराब नहीं होते
नकली नोटनकली बनाना अपेक्षाकृत आसानआधुनिक सुरक्षा फीचर्स के कारण नकली बनाना मुश्किल
सफाईजल्दी गंदे हो जाते हैंलंबे समय तक साफ रहते हैं
उम्रकमकागज के नोटों से 2-4 गुना अधिक
रखरखावबार-बार नए नोट छापने पड़ते हैंलंबे समय तक उपयोग होने से लागत कम
पर्यावरणजल्दी बदलने पड़ते हैंलंबे समय तक चलने से संसाधनों की बचत
सुरक्षा फीचर्ससीमितपारदर्शी विंडो, माइक्रो प्रिंटिंग और एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स

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किन-किन देशों में पॉलीमर नोट हैं लागू ?

दुनिया के कई देशों ने पहले ही पॉलीमर नोटों को अपनाया हुआ है। ऑस्ट्रेलिया इस तकनीक को लागू करने वाला पहला देश था। इसके बाद कनाडा ने भी अपने सभी प्रमुख नोट पॉलीमर सामग्री में जारी किए। यूनाइटेड किंगडम में £5, £10, £20 और £50 के नोट प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। वहीं न्यूजीलैंड ने पूरी तरह पॉलीमर करेंसी को अपनाया है।

एशिया की बात करें तो सिंगापुर, मलेशिया और वियतनाम भी लंबे समय से पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें मलेशिया ने कुछ चुनिंदा मूल्यवर्ग के नोटों में यह तकनीक अपनाई है, जबकि वियतनाम में अधिकतर नोट पॉलीमर से बनाए जाते हैं। इसके अलावा रोमानिया भी उन शुरुआती देशों में शामिल है, जिसने अपनी करेंसी को पॉलीमर तकनीक में बदल दिया था। इन देशों का अनुभव बताता है कि प्लास्टिक नोट ज्यादा टिकाऊ होते हैं, जल्दी खराब नहीं होते और नकली नोटों पर रोक लगाने में भी काफी प्रभावी साबित हुए हैं।

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Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate,…और पढ़ें
Palak Gupta is pursuing a Bachelor's in Journalism and Media Management and works as a News Writer at Khabar Mirror. She specializes in accurate, credible, and reader-centric reporting, driven by a commitment to ethical journalism and continuous professional growth.